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जम्मू- कश्मीर हाईकोर्ट में क्या हालात हैं, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट CJ से मांगी रिपोर्ट, CJI भी जा सकते हैं जम्मू-कश्मीर

LiveLaw News Network
16 Sep 2019 12:05 PM GMT
जम्मू- कश्मीर हाईकोर्ट में क्या हालात हैं, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट CJ से मांगी रिपोर्ट, CJI भी जा सकते हैं जम्मू-कश्मीर
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देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश से इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी है कि क्या हाईकोर्ट में लोगों को अपने केस ले जाने में परेशानी हो रही है। CJI रंजन गोगोई ने कहा है कि वे खुद हाईकोर्ट जाकर जायजा भी लेंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द हालात सामान्य करने के लिए राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए हर संभव प्रयास करे।

दरअसल CJI रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ बाल अधिकार विशेषज्ञ एनाक्षी गांगुली और राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (एनसीपीसीआर) की पहली अध्यक्षा प्रोफेसर शांता सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में जम्मू और कश्मीर में बच्चों की अवैध हिरासत पर कोर्ट से दखल देने की मांग की गई थी।

CJI ने हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश से मांगी रिपोर्ट

पीठ ने वकील से कहा कि वो इस याचिका को लेकर हाईकोर्ट जाएं। इस पर वकील ने कहा कि वहां दिक्कत है। ये सुनने पर CJI रंजन गोगोई ने हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश से इस पर रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद वे खुद भी वहां जाएंगे। ये गंभीर मसला है और यदि ऐसा नहीं पाया गया तो याचिकाकर्ता तैयार रहें।

केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सवाल

वहीं सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को कहा है कि घाटी में हालात सामान्य रखने के लिए क्या- क्या कदम उठाए गए हैं। इंटरनेट व संचार माध्यमों को बंद किए जाने और पत्रकारों पर लगी पाबंदी को लेकर दाखिल कश्मीर टाइम्स की एक्जीक्यूटिव एडिटर अनुराधा भसीन व अन्य की की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा।

वहीं केंद्र सरकार कश्मीर की स्थिति पर SG तुषार मेहता ने कहा कि हम एक अभूतपूर्व स्थिति का सामना कर रहे हैं। पांच अगस्त से एक भी गोली नहीं चली है। कोई जनहानि नहीं हुई। 93 पुलिस थानों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

5 अगस्त से 10 लाख से अधिक ओपीडी में मरीज देखे गए। 90 प्रतिशत मेडिकल दुकानें खुली हैं। 8,96,000 एलपीजी सिलेंडरों की होम डिलीवरी की गई है। 6.46 लाख क्विंटल राशन कश्मीर में पीडीएस के माध्यम से वितरित किया गया।

वहीं जस्टिस बोबडे ने कहा कि इंटरनेट, मोबाइल और लैंडलाइन बंद क्यों हैं ? किसने और क्यों बंद किए हैं। ये गंभीर मामला है और कोर्ट इसकी सुनवाई करेगा। पीठ ने तुषार से कहा कि वो सारी जानकारी हलफनामे के जरिए दाखिल करें।

AG ने कहा, सीमापार से पत्थरबाजों के लिए फंडिंग हो रही है

वहीं AG के के वेणगोपाल ने कहा कि सीमापार से पत्थरबाजों के लिए फंडिंग हो रही है। इस संबंध में वटाली को गिरफ्तार भी किया गया है। वहां हालात सामान्य ना होने देने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कश्मीर टाइम्स रोजाना जम्मू से छप रहा है और कई अन्य अखबार भी छप रहे हैं। मीडिया को सरकार द्वारा मदद दी जा रही है।

दरअसल कश्मीर टाइम्स की एक्जीक्यूटिव एडिटर अनुराधा भसीन ने धारा 370 के हटने के बाद घाटी में कामकाजी पत्रकारों पर लगी पाबंदियों को चुनौती दी है। अनुराधा भसीन ने अनुराेध किया है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद राज्य में पत्रकारों के कामकाज पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए। जिस तरह इंटरनेट व संचार माध्यमों पर रोक लगाई गई है वो बोलने व अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का उल्लंघन है।

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