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घर खरीदारों को कब्जे के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता, NCDRC ने डेवलपर को ब्याज सहित रुपए देने का आदेश दिया

LiveLaw News Network
16 Sep 2019 5:24 AM GMT
घर खरीदारों को कब्जे के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता, NCDRC ने डेवलपर को ब्याज सहित रुपए देने का आदेश दिया
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NCDRC ने माना है कि भवन इकाई के कब्जे के लिए खरीदारों को अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता है और रियल एस्टेट डेवलपर गोल्डन पीकॉक रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड को यह निर्देशित किया है कि घर खरीदार (homebuyer) को 4.12 करोड़ रूपये, ब्याज के साथ वापस करे।

यह आदेश कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 ('एक्ट') की धारा 21 (ए) (i) के तहत एक आलोक कुमार द्वारा, डेवलपर गोल्डन पीकॉक रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड और निर्माण कंपनी होमस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दायर एक शिकायत पर आया है।

शिकायतकर्ता आलोक कुमार ने यह प्रस्तुत किया कि वह टोक्यो, जापान में रहते थे और भारत में एक आवास की तलाश कर रहे थे और तब उन्होंने गुड़गांव के सेक्टर 109 में एक आवासीय परियोजना "माइकल शूमाकर वर्ल्ड टॉवर" के डेवलपर द्वारा दिया गया विज्ञापन देखा।

यह आलोक कुमार का तर्क था कि 'विज्ञापन द्वारा प्रलोभित' होने के बाद, उन्होंने वर्ष 2012 में आवासीय परियोजना में एक अपार्टमेंट बुक किया और वर्ष 2015 तक कुल रु 4,12,98,926 / - का भुगतान किया, उन्होंने यह भी बताया कि यह भुगतान करने हेतु उन्होंने 10.10% सालाना की ब्याज दर के साथ रु. 2,61,28,926/- का होम लोन लिया।

डेवलपर और आलोक कुमार के बीच निष्पादित 'फ्लैट क्रेता समझौते' के अनुसार, अपार्टमेंट के कब्जे को समझौते के निष्पादन की तारीख से, 6 महीने की अतिरिक्त अनुग्रह अवधि के साथ, 36 महीने के भीतर दिया जाना था, जो अवधि 19 अगस्त 2016 को समाप्त हो गयी थी।

आलोक कुमार द्वारा बताया गया कि निर्माण कार्य वर्ष 2015 से बंद हो गया था। डेवलपर ने शिकायतकर्ता को यह सूचित किया कि निर्माण कंपनी, होमस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अनुबंध समाप्त होने के बाद से काम धीमा हो गया था। फिर भी, अलोक कुमार को समझौते के संदर्भ में यह आश्वासन दिया गया कि, एक नई निर्माण कंपनी द्वारा बचा हुआ कार्य पूरा होने पर उन्हें कब्जा दे दिया जायेगा।

बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद, निर्माण कार्य वर्ष 2018 तक भी पूरा नहीं हुआ और जब आलोक कुमार ने इस साइट का दौरा किया तो इसे बंद पाया। कब्जे की विस्तारित तारीख के बाद से, 6 महीने से अधिक समय बीत चुका था और अभी तक डिलीवरी/कब्ज़े की एक सटीक तारीख डेवलपर द्वारा नहीं दी गई थी। अंत में, शिकायतकर्ता ने डेवलपर के साथ-साथ निर्माण कंपनी को एक कानूनी नोटिस जारी किया, जिसमें अपार्टमेंट के कब्जे की सही तारीख की मांग की गई थी, लेकिन वह नोटिस "इंकार किया" (refused) एवं "left" डाक टिप्पणी के साथ वापस प्राप्त की गयी।

डेवलपर या निर्माण कंपनी से किसी भी प्रकार की प्रभावी प्रतिक्रिया प्राप्त करने में असमर्थ, आलोक कुमार ने जुलाई 2018 में NCDRC का दरवाजा खटखटाया, और अपार्टमेंट खरीदने के लिए भुगतान किए गए धन की वापसी की मांग की। आलोक कुमार की शिकायत को आयोग ने 24 जुलाई 2018 को स्वीकार किया।

उपलब्ध सूचना पर NCDRC ने विचार किया और यह अभिनिर्णित किया कि करार की शर्तें, एकतरफा एवं अनुचित हैं और एक समझौते में इस तरह के एकतरफा उपबंधों को शामिल किया जाना, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अनुसार 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (unfair trade practice) होगा। आयोग ने यह भी देखा कि शिकायतकर्ता, आलोक कुमार को इकाई के कब्जे के लिए अनिश्चित काल तक प्रतीक्षा करने के लिए नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि निर्माण पूरा होना अभी बाकी है, भले ही बुकिंग की तारीख से 6 वर्ष से अधिक की अवधि पूरी हो गयी हो।

उपरोक्त के मद्देनजर, डेवलपर को यह निर्देश दिया गया कि वह रियलाइजेशन की तारीख तक आलोक कुमार को ब्याज के साथ 4,12,98,926 / - रुपये वापस करे। NCDRC बेंच ने कहा कि शिकायतकर्ता को यह ब्याज, उसके द्वारा होम लोन पर दिए गए ब्याज के लिए एवं 'मानसिक पीड़ा और मौद्रिक नुकसान' से गुजरने के लिए दिया जा रहा है। इसके अलावा, आयोग ने डेवलपर पर 25,000 / - की लागत (Cost) भी लगाई, और अपील का निपटान किया।



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