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उन्नाव रेप केस : दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान दर्ज करने के लिए AIIMS में कोर्ट लगाने की अनुमति दी

LiveLaw News Network
7 Sep 2019 4:59 AM GMT
उन्नाव रेप केस : दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान दर्ज करने के लिए AIIMS में कोर्ट लगाने की अनुमति दी
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन्नाव बलात्कार की पीड़िता के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर में बयान दर्ज करने को मंजूरी दे दी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने देर शाम प्रशासनिक पक्ष से इस आशय की एक अधिसूचना जारी की। इसमें कहा गया है कि विशेष न्यायाधीश धर्मेश शर्मा, जो मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, पीड़िता की गवाही दर्ज करेंगे।

अधिसूचना में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने आदेश दिया है कि "विशेष न्यायाधीश धर्मेश शर्मा, तीस हजारी जिला अदालत परिसर के अलावा एम्स के ट्रॉमा सेंटर के परिसर / भवन में पीड़िता की गवाही दर्ज करने के लिए अदालत का आयोजन करेंगे। "

बलात्कार पीड़िता को एम्स में भर्ती कराया गया है क्योंकि वह एक सड़क दुर्घटना के दौरान घायल हो गई थी। इस केस में भाजपा से निकाले गए विधायक कुलदीप सिंह सेंगर आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पीड़िता को लखनऊ के एक अस्पताल से दिल्ली ले आया गया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय से मांगी थी अनुमति

दरअसल उन्नाव की घटना से जुड़े मामलों में मुकदमे की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखा था जिसमें डॉक्टरों के कहने के बाद पीड़िता के बयानों की रिकॉर्डिंग के लिए एम्स में इन कैमरा कार्यवाही करने की अनुमति मांगी गई थी क्योंकि उसे अदालत परिसर में लाना उचित नहीं था।

शर्मा ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को सूचित किया है कि सीबीआई, महिला और उसके परिवार को इस तरह की कार्यवाही पर "कोई आपत्ति" नहीं है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को जांच एजेंसी को कहा है कि वे दो सप्ताह में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करें।

इसके अलावा पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा था कि वो ट्रायल जज के उस अनुरोध पर फैसला करे जिसमें पीड़िता के बयान दर्ज करने के लिए एम्स में कोर्ट बनाने को कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया था संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त को बलात्कार पीड़िता की ओर से दी गई चिट्ठी पर संज्ञान लेते हुए आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर व अन्य के खिलाफ दर्ज पांचों केसों को उत्तर प्रदेश से दिल्ली की तीस हजारी अदालत में ट्रांसफर कर दिया था।

पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को दो सप्ताह के भीतर रायबरेली हादसे की जांच पूरी करने का निर्देश दिया था और दिल्ली की तीस हजारी के जिला जज धर्मेश शर्मा को तुरंत ट्रायल शुरू कर सभी केसों की 45 दिनों में सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए थे।

पीठ ने सीबीआई अधिकारियों को कोर्ट में बुलाकर केस की जानकारी लेने के बाद पीड़िता, उसके परिवार, वकील व उसके परिवार को CRPF की सुरक्षा मुहैया कराने को कहा था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने के निर्देश भी दिए थे।

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