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छपाक के निर्माताओं को अदालत का निर्देश, फिल्म में योगदान देने के लिए अधिवक्ता अपर्णा भट्ट को क्रेडिट दिया जाए

LiveLaw News Network
9 Jan 2020 8:45 AM GMT
छपाक के निर्माताओं को अदालत का निर्देश, फिल्म में योगदान देने के लिए अधिवक्ता अपर्णा भट्ट को क्रेडिट दिया जाए
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दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को फिल्म 'छपाक' के निर्माताओं को योगदान स्वीकार करने के लिए एडवोकेट अपर्णा भट का नाम क्रेडिट में दिखाने का निर्देश दिया।

फिल्म छपाक एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी के जीवन पर आधारित है और अधिवक्ता अपर्णा भट्ट लक्ष्मी अग्रवाल की वकील रही हैं। फिल्म 10 जनवरी को रिलीज होने वाली है।

अधिवक्ता अपर्णा भट्ट ने फिल्म की निर्देशक मेघना गुलज़ार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल जज पंकज शर्मा ने एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि "तथ्य बताते हैं कि अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए वादी की याचिका अच्छी तरह से स्थापित है और यह आवश्यक है कि उनके योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए।"

अदालत ने निर्देश दिया कि अपर्णा भट्ट के योगदान को फिल्म के क्रेडिट्स में यह कहते हुए स्वीकार किया जाएगा कि 'अपर्णा भट्ट ने फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान यौन और शारीरिक हिंसा के खिलाफ लड़ाई जारी रखी है।'

वकील अपर्णा भट्ट ने आपराधिक हमले के संबंध में लक्ष्मी शर्मा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लक्ष्मी की ओर से एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें कोर्ट ने एसिड हमलों को रोकने के लिए कई दिशा-निर्देश दिए थे।

वादी के अनुसार, मेघना गुलज़ार ने स्क्रिप्ट तैयार करने के लिए अधिवक्ता अपर्णा भट्ट से सलाह ली थी। भट्ट ने कहा है कि उन्होंने लक्ष्मी अग्रवाल के मामले से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों को एक्सेस किया था, जिससे फिल्म बनाने में मदद मिली। यह भी कहा कि मेघना गुलज़ार के अनुरोध पर भट्ट ने स्क्रिप्ट के कई ड्राफ्टों को चेक किया था।

वादी में आगे कहा गया है कि यह एक आपसी समझ थी कि फिल्म में एडवोकेट अपर्णा भट्ट को लक्ष्मी के वकील के रूप में स्वीकार किया जाएगा। स्क्रिप्ट के अंतिम मसौदे में अंतिम क्रेडिट में एक नोट शामिल किया गया था, जिसमें कहा गया था कि

"" अपर्णा भट्ट महिलाओं के खिलाफ यौन और शारीरिक हिंसा के मामलों में अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। "

लेकिन जब भट्ट ने 7 जनवरी को फिल्म का प्रीमियर शो देखा था, तो उन्होंने देखा कि इस तरह के किसी नोट का ज़िक्र उसमें नहीं था। मेघना गुलज़ार से जब भट्ट ने इसके बारे में पूछा, तो जवाब दिया कि फिल्म में शामिल किसी के बारे में इस तरह का नोट नहीं देने का फैसला किया गया है।

इस पृष्ठभूमि में, यह कहते हुए मुकदमा दायर किया गया था:

"वादी ने फिल्म के निर्माण में हर संभव सहायता दी थी और यह सुनिश्चित करने के लिए कि फिल्म वास्तविक कहानी के लिए सही है। ऐसी सहायता गारंटी के आधार पर दी गई थी कि वादी का फिल्म में योगदान स्वीकार किया जाएगा।"

दिल्ली में पटियाल हाउस कोर्ट में दायर किए गए मुकदमे में फिल्म में योगदान देने के लिए अधिवक्ता भट्ट का नाम शामिल करने के लिए अनिवार्य निषेधाज्ञा मांगी गई।


आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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