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CTET 2019 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने की याचिका पर SC ने केंद्र और CBSE को नोटिस जारी किया

Live Law Hindi
16 May 2019 1:20 PM GMT
CTET 2019 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने की याचिका पर SC ने केंद्र और CBSE को नोटिस जारी किया
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET), 2019 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और CBSE को नोटिस जारी कर उनकी ओर से जवाब मांगा है।

1 जुलाई तक देना है जवाब
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजीव खन्ना की वेकेशन बेंच ने केंद्र और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 1 जुलाई तक अपना जवाब देने को कहा है।

CTET के अंतर्गत 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग
दरअसल अदालत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से संबंधित कुछ याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें CTET 2019 के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का आग्रह किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत को यह बताया कि CBSE ने 23 जनवरी, 2019 को CTET के संचालन के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया था जिसमें 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों को नहीं दिया गया है।

याचिका में की गयी मांग का अंश
"CBSE ने CTET, 2019 के संचालन के लिए दिनांक 23 जनवरी, 2019 को प्रकाशित विज्ञापन जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इसका (आरक्षण) लाभ नहीं दिया गया है और इसलिए वर्तमान रिट याचिका यह सुनिश्चित करने के लिए दायर की जा रही है कि लोगों को कानूनी रूप से कमजोर वर्ग में शामिल किया जाए। CTET -2019 विज्ञापन में अन्य आरक्षित वर्ग (एससी, एसटी और ओबीसी) को समान लाभ दिया गया है," इस याचिका में कहा गया है।

पीठ की टिप्पणी
हालांकि 13 मई को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने यह कहा था कि परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए कोई आरक्षण नहीं हो सकता क्योंकि ये केवल प्रवेश के दौरान ही आता है। परीक्षा की अधिसूचना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को कोई आरक्षण नहीं देती है।

पीठ ने कहा, "योग्यता परीक्षा के लिए कोई आरक्षण नहीं हो सकता। यह पूरी तरह से गलत है। यह (CTET) केवल एक अर्हकारी परीक्षा है। आरक्षण का मुद्दा केवल प्रवेश के समय आएगा।"

संविधान का 103वां संशोधन
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में CBSE द्वारा जारी की गई अधिसूचना को संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी है। ये संविधान (103 वां संशोधन) अधिनियम, 2019 संसद द्वारा पारित किया गया था और यह 16 जनवरी को लागू हुआ था।

इस संशोधन अधिनियम के तहत केंद्र ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित सामान्य वर्ग के नागरिकों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और शारीरिक रूप से विकलांग जैसे अन्य आरक्षित श्रेणियों के लाभ के लिए पहले से मौजूद आरक्षण नीति के अलावा 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है।

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