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बिहार के नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की तरह समान वेतन की पुनर्विचार याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में खारिज

LiveLaw News Network
27 Aug 2019 12:02 PM GMT
बिहार के नियोजित शिक्षकों को  नियमित शिक्षकों की तरह समान वेतन की पुनर्विचार याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में खारिज
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बिहार के लगभग 4 लाख नियोजित शिक्षकों (संविदा शिक्षकों) को नियमित शिक्षकों के समान वेतन देने के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

"पुराने फैसले में बदलाव का आधार मौजूद नहीं"

हाल ही में याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सपरे और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने कहा कि पुराने फैसले में बदलाव का कोई आधार मौजूद नहीं है और पीठ को अपने फैसले में कोई गलती नजर नहीं आई है। पीठ ने इससे पहले याचिकाकर्ता शिक्षकों की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई की मांग भी खुली अदालत में खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा था पटना हाईकोर्ट का निर्णय

इससे पहले मई में बिहार के लगभग 4 लाख नियोजित शिक्षकों (संविदा शिक्षकों) को झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया था जिसमें यह कहा गया था नियोजित शिक्षक भी नियमित स्थायी शिक्षकों के बराबर वेतन के हकदार हैं।

अदालत का मत और राज्य को सुझाव

राज्य द्वारा दायर अपील को अनुमति देते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सपरे और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने यह कहा था कि ऐसी स्थिति जबरदस्त असंतुलन पैदा कर सकती है और राज्य के वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव पैदा कर सकती है।

हालांकि इस फैसले में अदालत ने राज्य को एक सुझाव दिया था कि वह कम से कम समिति द्वारा सुझाए गए स्तर तक नियोजित शिक्षकों के वेतनमान को बढ़ाने पर विचार कर सकती है।

अदालत ने कहा था कि नियोजित शिक्षकों को दिया जाने वाला वेतन ढांचा निश्चित रूप से सरकारी शिक्षकों को दिए जाने वाले वेतनमान से कम है लेकिन सरकारी शिक्षकों की संख्या नियोजित शिक्षकों की संख्या से काफी कम है। यह भी देखा गया कि नियोजित शिक्षकों की भर्ती का तरीका नियमित सरकारी शिक्षकों की तुलना में पूरी तरह से अलग है।

कोर्ट ने कहा था :

"पंचायती राज संस्थाओं को चयन की प्रक्रिया सौंपने की कोशिश और राज्य शिक्षकों के कैडर को मृत या लुप्त कैडर होने देना, शिक्षा के प्रसार को प्राप्त करने की समान यांत्रिकी का हिस्सा थी। ये मुद्दे सभी एक एकीकृत नीति का हिस्सा थे और अगर न्यायिक हस्तक्षेप की प्रक्रिया द्वारा नियोजित शिक्षकों को समान वेतन और भत्ता उपलब्ध कराने के लिए कोई निर्देश जारी किए जाते हैं तो यह जबरदस्त असंतुलन पैदा कर सकता है और इससे वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव पैदा हो सकता है। "

यह कहते हुए कि शिक्षकों को शालीन एवं उचित भत्तों का हकदार होना चाहिए, पीठ ने कहा था कि राज्य समिति द्वारा सुझाए गए किसी भी परीक्षण या परीक्षा पर जोर दिए बिना समिति द्वारा सुझाए गए स्तर पर नियोजित शिक्षकों के वेतनमान को बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इस तरह के परीक्षण या परीक्षा को पास करने वालों को और भी बेहतर वेतनमान दिए जा सकते हैं।

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