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" कोरोना का सांप्रदायिकरण" : सुप्रीम कोर्ट में सोशल मीडिया में कोरोना जिहाद, जैसे संदेशों पर रोक लगाने व कार्रवाही करने की याचिका

LiveLaw News Network
14 April 2020 9:37 AM GMT
 कोरोना का सांप्रदायिकरण : सुप्रीम कोर्ट में  सोशल मीडिया में कोरोना जिहाद, जैसे संदेशों पर रोक लगाने व कार्रवाही करने की याचिका
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'Communalising Corona' : Plea In SC Seeks Direction To Remove Communal Hashtags Like #CoronaJihad,#TablighiJamatVirus Etc. From Social Media

 दिल्ली के निज़ामुद्दीन में तब्लीगी जमात की बैठक को सांप्रदायिक रूप देने वाले ट्विटर पर 'हैशटैग' के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसमें जमातियों को पूरे देश में जानबूझकर कोरोना वायरस फैलाने का दोषी बताया जा रहा है।

याचिकाकर्ता-अधिवक्ता खाजा एजाजुद्दीन ने कहा है कि ये ट्रेंड # इस्लामिक कोरोनावायरसजिहाद , # कोरोनाजिहाद, # निजामुद्दीनईडियटस, #तब्लीगीजमातवायरस, आदि के रूप में तैयार किए गए हैं, और ये विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के विपरीत हैं और धर्म के खिलाफ हैं।

इसके अलावा, "यह भारत के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार में प्रचलित कानूनों के विपरीत है, जिसमें धर्म का अपमान करने, समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और देश के सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए दंडात्मक कानून लागू करने का आह्वान किया गया है।"

तेलंगाना उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले वकील याचिकातकर्ता का कहना है कि दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात द्वारा 13 मार्च 2020 से 15 मार्च 2020 तक एक धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें दुनिया भर से विद्वान और

भारत के विभिन्न राज्यों से लोग आए थे और आयोजकों ने उन्हें दिन-प्रतिदिन आवश्यक सुविधाएं प्रदान करके रखा था।

20 मार्च के आसपास बैठक के समापन के बाद, कोरोना वायरस का बड़े पैमाने पर प्रसार हुआ था, जिसके कारण भारत सरकार ने 22 मार्च को "जनता कर्फ्यू" घोषित किया, जिसका अर्थ है कि उस विशेष तिथि पर पूरे देश को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इसके बाद, 24 मार्च से अप्रैल 14 तक तालाबंदी की घोषणा की गई।

यह वर्णन किया गया है कि "उपस्थित लोगों को वापस अपने राज्यों को भेजे जाने के बाद, और उनके संबंधित स्थानों पर पहुंचने के दौरान या उसके बाद कोरोनोवायरस लक्षणों का पता लगने के कुछ मामले सामने आए। जो प्रतिभागी विदेश से आए थे और दिल्ली के निजामुद्दीन में रह रहे थे, उनका परीक्षण पॉजिटिव आया और 'राज्य' ने उन्हें मानदंड के अनुसार आइसोलेशन में रख दिया।

"मीडिया द्वारा दिए गए व्यापक प्रचार के कारण कि दिल्ली के निज़ामुद्दीन के तब्लीगी जमात से कोरोनावायरस के कई सकारात्मक मामले पाए गए, ट्विटर पर ये बड़े पैमाने पर ट्रेंड कर रहा है और धर्म को कोरोनावायरस की बीमारी से जोड़ा गया है, याचिका में कहा गया है।

याचिकाकर्ता ने कहा, "कोरोनोवायरस के लिए विशेष समुदाय को दोष देना WHO द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों के विपरीत जो 18.03.2020 को जारी किए गए और इनमें कहा गया कि धर्म को महामारी से नहीं जोड़ा जाएगा। "

उन्होंने आग्रह किया है कि, "कानून के शासन को बनाए रखने के लिए, इन सोशल मीडिया पोस्ट, अनुचित ट्वीट या उपयोग को रोककर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जो विशेष समुदाय को प्रभावित कर रहा है।"

याचिकाकर्ता ने केंद्र और तेलंगाना पुलिस को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को "महामारी को धर्म से जुड़ने वाली अवैध प्रवृत्ति को रोकने" की आवश्यकता के लिए दिशा-निर्देश देने की प्रार्थना की है, क्योंकि यह "अत्यधिक अनुचित, अवैध और असंवैधानिक" है।

इसके अलावा, यह मांग की गई है कि "ऑनलाइन सोशल मीडिया नेटवर्क या साइटों को किसी भी संदेश को ले जाने से रोका जाए जो विशेष समुदाय की भावनाओं का अपमान करते हैं।"

निजामुद्दीन में बैठक को सांप्रदायिक बनाने के लिए मीडिया के कुछ वर्गों के खिलाफ कार्रवाई करने की एक याचिका शीर्ष अदालत के समक्ष इस्लामिक विद्वानों के एक अन्य संगठन- जमात उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर की गई है और सुप्रीम कोर्ट ने मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।

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