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CBI Vs WB : सुप्रीम कोर्ट ने CBI की गिरफ्तारी की अनुमति की याचिका पर IPS राजीव कुमार से जवाब मांगा

Live Law Hindi
8 April 2019 12:41 PM GMT
CBI Vs WB : सुप्रीम कोर्ट ने CBI की गिरफ्तारी की अनुमति की याचिका पर IPS राजीव कुमार से जवाब मांगा
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से करोड़ों रुपये के शारदा चिट फंड घोटाले में उनकी गिरफ्तारी की सीबीआई की अर्जी पर उनका जवाब मांगा है।

राजीव कुमार दें 1 हफ्ते के भीतर जवाब
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की 3 जजों की बेंच ने राजीव कुमार को CBI की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें 1 हफ्ते का समय दिया है। सीबीआई ने शीर्ष अदालत से राजीव कुमार को गिरफ्तारी से संरक्षण देने वाले 5 फरवरी के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया है। पीठ अब इस मामले की सुनवाई 8 अप्रैल को करेगी।

सीबीआई का दावा, राजीव कुमार जांच में निष्क्रिय रहे
अपनी याचिका में सीबीआई ने कहा है कि बिधान नगर आयुक्त के रूप में राजीव कुमार के कार्यकाल के दौरान जब वह एसआईटी के कामकाज की देखरेख कर रहे थे, "उन्होंने अपनी निष्क्रियता से शारदा ग्रुप को 2012-2013 के दौरान 805.77 करोड़ रुपये अवैध रूप से इकट्ठा करने की सुविधा दी। साथ ही उन्होंने रोज वैली समूह को वर्ष 2012-2013 के दौरान 6865.85 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार भी करने दिया।

जांचकर्ताओं का जांच में सहयोग न करने का आरोप
सीबीआई ने विभिन्न उदाहरणों का हवाला दिया जहां राजीव कुमार ने पोंजी घोटाला मामलों में जांचकर्ताओं का जांच में सहयोग नहीं किया। इसमें कहा गया है कि राजीव कुमार द्वारा उच्चतम न्यायालय के आदेश के संदर्भ में सीबीआई अधिकारियों के समक्ष पूछताछ के लिए उपस्थित होने के बाद भी वे चुप रहे और सभी प्रासंगिक सवालों को खारिज कर दिया। साथ ही उन्होंने सीबीआई को चिट फंड मामलों में महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध कराने में भी मदद नहीं की।

एजेंसी ने कहा कि राजीव कुमार, जो चिट फंड मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) के दैनिक कामकाज के प्रभारी थे, कुछ प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र करने में विफल रहे और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ जांच के साथ आगे नहीं बढ़े।

सीबीआई ने कहा कि हालांकि शारदा मामले के मुख्य अभियुक्त सुदीप्त सेन द्वारा टीएमसी के पूर्व सांसदों कुणाल घोष और श्रीजॉय बोस, वरिष्ठ वकील नलिनी चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह, उनकी पत्नी मनोरंजन सिंह और व्यवसायी शांतनु घोष को चिट फंड मामलों में कथित रूप से सांठगांठ रखने के लिए नामित किया था लेकिन केवल घोष के खिलाफ राजीव कुमार कथित रूप से आगे बढ़े जबकि उनके द्वारा बाकी सभी को बख्श दिया गया।

"एक गंभीर आशंका है कि राजीव कुमार, तत्कालीन पुलिस आयुक्त, बिधान नगर पुलिस, अर्नब घोष, तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (डिटेक्टिव विभाग) और SIT व बिधान नगर पुलिस के अन्य जांच अधिकारियों ने मामले की जांच में सहयोग नहीं किया है," याचिका में कहा गया है।

सीबीआई कुमार को हिरासत में लेकर करना चाहती है पूछताछ

सीबीआई ने कहा कि गायब होने और सबूतों को नष्ट करने के कारण कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों की बड़ी साजिश और भूमिका की जांच करने के लिए, राजीव कुमार से पूछताछ करना आवश्यक है। सीबीआई का कहना है कि राजीव कुमार को हिरासत में लेकर शारदा समूह के निदेशकों व राजनेताओं के बीच सांठगांठ का पता लगाना आवश्यक है।

"शिलांग में कुमार ने नही दिए महत्वपूर्ण जवाब", सीबीआई
सीबीआई ने ये भी कहा है कि राजीव कुमार, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शिलांग में पूछताछ के लिए सीबीआई अधिकारियों के समक्ष पेश हुए, ने एजेंसी के सवालों के जवाब नहीं दिए और साथ ही उन्होंने चिट फंड मामलों में महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध कराने में सीबीआई की सहायता नहीं की। कुमार ने किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट को बताया गंभीर

इससे पहले 29 मार्च को सीबीआई बनाम पश्चिम बंगाल सरकार मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ पर सीबीआई द्वारा दाखिल सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट को बहुत ही गंभीर बताया था।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने सीबीआई को यह निर्देश दिया था कि वो 7 दिनों के भीतर एक अलग से अर्जी दाखिल करे।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई से कहा, "हम आपकी स्टेटस रिपोर्ट से गुजरे हैं। आपने (CBI) स्टेटस रिपोर्ट में प्रार्थना की है। यदि आप इसे एक अलग अर्जी बनाना चाहते हैं और स्टेटस रिपोर्ट की कुछ सामग्री देना चाहते है तो दे सकते हैं। लेकिन यह बहुत गंभीर है तो हम उन्हें (राजीव कुमार) को मौका दिए बिना अपने आप कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।"

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