बड़ी संख्या में लोगों से रुपए लिए जाने से संबंधित अपराध में अग्रिम जमानत नहीं दे सकते : सुप्रीम कोर्ट

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    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह आर्थिक अपराधों से संबंधित मामलों में जमानत देने में इच्छुक नहीं है, खासकर जब आरोपी पर कई जमाकर्ताओं को ठगने का आरोप हो।

    जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा,

    "मान लीजिए, आपने हजारों लोगों से रुपए छीन लिए हैं, उन्हें ठग लिया है। और आप कहते हैं, कृपया पीड़ितों की दुर्दशा की परवाह किए बिना उन्हें अग्रिम जमानत दें। हो सकता है, परिवारों के पास उनके पास पैसे न हों। वे नहीं भेज सकते।" उनके बच्चे स्कूल जाते हैं। उन्हें दूसरों से भीख मांगना, उधार लेना और चोरी करना पड़ती है। यह स्वीकार्य नहीं है।"

    पीठ समसुल आलम खान नामक व्यक्ति की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आर बसंत ने अदालत को बताया, "मैंने निचली अदालत में 9 लाख रुपये जमा करने की पेशकश की थी।" उन्होंने सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो मामले का रेफरेंस दिया।

    बेंच ने पूछा,

    "क्या यह एक आर्थिक अपराध होगा या नहीं?"

    यह भारतीय दंड संहिता की धारा 420 [धोखाधड़ी] के तहत आने वाला अपराध है, बसंत ने जवाब दिया।

    खंडपीठ ने आगे सवाल किया,

    "जमाकर्ताओं से पैसा लेना, क्या यह आरबीआई अधिनियम या सेबी अधिनियम के तहत एक आर्थिक अपराध होगा?"

    बसंत ने उत्तर दिया कि हर अपराध जिसमें पैसा शामिल है, वित्तीय अपराध नहीं है।

    न्यायालय ने व्यक्त किया कि वह केवल तभी जमानत देगा जब "राशि" अधिक नहीं होगी।

    “अगर संलिप्तता कम राशि की है, तो हम जमानत देने के इच्छुक हैं। अगर बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं, तो हम इच्छुक नहीं हैं। हम इस पर बहुत स्पष्ट हैं।"

    बसंत ने तर्क दिया,

    “हम चार्जशीट के अनुसार जा सकते हैं। इसमें कहा गया कि 9 लाख, दूसरा पक्ष इसे कैसे बढ़ा सकता है?”

    इसके बाद खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को मामले में नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में निचली अदालत में राशि जमा कराने का निर्देश दिया। इसके साथ अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को निचली अदालत में पेश होने के अधीन अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए।

    आदेश में कहा गया,

    "सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता के ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने के अधीन, उसे ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए जाने वाले नियमों और शर्तों पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा।"

    मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी।

    केस टाइटल: समसुल आलम खान अमित शर्मा बनाम भारत संघ | एसएलपी (सीआरएल) नंबर 12626/2022 आईआई-ए

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