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जुए के ख़िलाफ़ पीआईएल : बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, कई बार अंतरात्मा की लड़ाई में दुष्टता की जीत हो जाती है

LiveLaw News Network
2 Oct 2019 5:29 AM GMT
जुए के ख़िलाफ़ पीआईएल : बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, कई बार अंतरात्मा की लड़ाई में दुष्टता की जीत हो जाती है
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जुआ और पुलिस की निष्क्रियता के ख़िलाफ़ एक जनहित याचिका का निष्पादन करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने मनुष्य की अंतरात्मा और दुष्टता के बीच लड़ाई की बात कही। पीठ ने कहा कि इसका हाल समाज की अंतरात्मा को प्रकाशित करना होगा। पीठ ने इसके साथ-साथ क़ानून को लागू करने और पुलिस को सतर्क रहने की बात कही।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और आरजी अवचात की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। यह जनहित याचिका बलिराम ने मराठवाड़ा में जुए के बड़े पैमाने पर प्रचलन की रिपोर्ट के बाद दायर की।

बलिराम के वक़ील पंडितराव एस आनेराव और अजय कुमार वाघमारे ने अदालत से पुलिस को निर्देश देने का आग्रह किया था कि वह जुए की गतिविधि में लिप्त किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफआईआर दायर करे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पुलिस इन जुआरियों से मिले हुए हैं क्योंकि उन्हें भी जुए की राशि में हिस्सेदारी मिलती है।

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पुलिस को सतर्क रहने की हिदायत देते हुए पीठ ने कहा, "जैसा कि कहानी में है, जब ईश्वर ने इस दुनिया को बनाया और इसमें छोटे-बड़े सभी प्राणियों की रचना की, उसने आदमी को भी बनाया और दुष्ट को भी बनाने की ग़लती की। जब फ़रिश्ते को पता चला कि दुष्ट को भी बनाया गया है, उसने ईश्वर से पूछा कि वह दुष्ट को कहां रखेगा, क्योंकि वह ईश्वर को सदा परेशान करता रहेगा। ईश्वर ने कहा : उसने मनुष्य को विवेक दिया है और वह दुष्ट को मनुष्य के अंदर जगह देगा। लोगों का विवेक दुष्ट को दबाकर रखेगा। दुर्भाग्य से, दुष्ट और विवेक के बीच लड़ाई में, कई बार दुष्ट की जीत हो जाती है।"

"हम अपनी नदियों और तालाबों की अपनी मां समझकर पूजा करते हैं, लेकिन उसे प्रदूषित करने से हम नहीं चूकते जो हमारी मां है। समाज में हमेशा ही विरोधाभासी व्यवहार किया है।

जिस मामले को सामने लाया गया है वह सामाजिक समस्या है। इसका समाधान समाज के लोगों को समझा-बुझाकर ही किया आजा सकता है। सामाजिक संगठनों को इसमें बीच में आना होगा ताकि वे समाज के विवेक को ठीक कर सकें"।

अदालत ने यह भी कहा कि कानून को लागू किए जाने की ज़रूरत है और उसने पुलिस को सतर्क रहने और किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ शिकायत आने पर उसके ख़िलाफ़ उचित सबूत प्राप्त होने पर कार्रवाई करने को कहा।



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