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सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में मेट्रो शेड के लिए आरे में पेड़ों की कटाई पर यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
7 Oct 2019 5:51 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में मेट्रो शेड के लिए आरे में पेड़ों की कटाई पर यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया
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सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने सोमवार को मुंबई उपनगर में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी। इसके बाद
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अब और पेड़ नहीं काटे जाएंगे और दशहरा की छुट्टी के बाद पर्यावरण की बेंच द्वारा पहले से तय किए गए पेड़ों की कटाई की वैधता तय की जा सकती है।

कोर्ट ने पेड़ काटने के विरोध में हिरासत में लिए गए सभी पर्यावरण कार्यकर्ताओं की रिहाई का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

जस्टिस अरुण मिश्रा और अशोक भूषण की दो-जजों की बेंच का गठन तब हुआ जब कानून के छात्रों के एक समूह ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए शीर्ष अदालत के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने पर्यावरणविदों द्वारा पेड़ों के कटान पर रोक लगाने के लिए दिए गए एक आवेदन को खारिज कर दिया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े और गोपाल शंकरनारायणन छात्रों के लिए उपस्थित हुए। उन्होंने प्रस्तुत किया कि यह मुद्दा कि आरे वन है या नहीं, सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। एनजीटी इस मुद्दे पर विचार कर रहा है कि क्या क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन है। इसलिए, अधिकारियों को लंबित निर्णय के दौरान पेड़ काटने से बचना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को मौखिक रूप से कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट चले जाने से पहले अधिकारियों ने पेड़ों को काटना शुरू नहीं किया होगा।

शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की खंडपीठ ने गोरेगांव में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को चुनौती देने वाली एनजीओ और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा दायर पांच याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

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