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मालेगांव धमाका : NIA कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा की पेशी से छूट की अर्जी ठुकराई

Live Law Hindi
21 Jun 2019 6:16 AM GMT
मालेगांव धमाका : NIA कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा की पेशी से छूट की अर्जी ठुकराई
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वर्ष 2008 के मालेगांव धमाका केस की सुनवाई कर रही विशेष एनआईए कोर्ट ने भोपाल की बीजेपी व आरोपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की हर हफ्ते पेशी से छूट देने की अर्जी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को सप्ताह में एक बार चल रहे मुकदमे के दौरान मौजूद रहने का निर्देश दिया था।

संसद में प्रज्ञा ठाकुर की उपस्थिति पर दिया गया जोर

अपने आवेदन में प्रज्ञा ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, भोपाल से यात्रा और मुंबई शहर में सुरक्षा के मुद्दों पर छूट की मांग की। उनके वकील प्रशांत मागू ने यह तर्क दिया कि भारतीय जनता पार्टी ने संसद में उपस्थित होने पर अक्सर व्हिप जारी की है इसलिए संसद में उनकी उपस्थिति आवश्यक है। लोगों के भले के लिए उनकी 26 जुलाई तक संसद में उपस्थिति जरूरी है।

गुरुवार को विशेष न्यायाधीश विनोद पडलकर ने कहा-

"पार्टी के आदेश का पालन करना और संसद में भाग लेना आवश्यक है, लेकिन इसके बारे में कोई कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए।"

विशेष अदालत ने प्रज्ञा को गुरुवार को अदालत में पेश होने से छूट दे दी। न्यायाधीश पडलकर ने पिछली सुनवाई के दौरान प्रज्ञा की बातों पर गौर किया जब वो गुस्से में अदालत से बाहर निकली थी और कहा था कि उन्हें गंदी कुर्सी दी गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने जानबूझकर अदालत परिसर में निर्माण कार्य पर ध्यान नहीं दिया और ना ही अपने वकील से जानकारी ली।

प्रज्ञा ठाकुर एवं अन्य के खिलाफ आरोप

दरअसल विशेष एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। उन पर हत्या, हत्या के प्रयास, स्वेच्छा से खतरनाक हथियारों या साधनों से गंभीर चोट पहुंचाने, विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और आपराधिक साजिश की सजा का आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत अभियुक्तों पर धारा 3 (जान या संपत्ति को खतरे में डालने के लिए विस्फोट करने की सजा), धारा 4 (विस्फोट का प्रयास करने की सजा), धारा 5 (संदिग्ध परिस्थितियों में विस्फोटक रखने या रखने की सजा) के तहत आरोप लगाए गए हैं। विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 6 ( उकसाने की सजा) और शस्त्र अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी लगाई गई हैं।

25 अप्रैल 2017 को बॉम्बे हाईकोर्ट से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत मिल गई थी। हाईकोर्ट ने प्रज्ञा पर लगाई गई मकोका धारा को भी हटा दिया था। जिसके बाद मकोका के तहत जुटाए गए सबूत भी केस से निकाल दिए गए थे।

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