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'किसी को संस्थान को नष्ट करने की इजाजत नहीं ' : CJI ने असम हिरासत केंद्र मामले में खुद को अलग करने से इनकार किया, हर्ष मंदर को हटाया

Live Law Hindi
2 May 2019 2:47 PM GMT
किसी को संस्थान को नष्ट करने की इजाजत नहीं  : CJI ने असम हिरासत केंद्र मामले में खुद को अलग करने से इनकार किया, हर्ष मंदर को हटाया
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक्टिविस्ट और याचिकाकर्ता हर्ष मंदर की उस अर्जी को ठुकरा दिया जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से असम हिरासत केंद्र मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की गई थी।

"अदालत के आदेश को देखा जाना चाहिए, टिप्पणी को नहीं"
मामले की सुनवाई करते हुए CJI गोगोई ने कहा कि अगर वो मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हैं तो ये संस्थान के विनाश की तरह होगा। याचिकाकर्ता को अदालत में बहस के दौरान टिप्पणियों पर नहीं जाना चाहिए बल्कि केवल लिखित आदेश को ही देखना चाहिए।

"सुनवाई का फैसले न्यायाधीश द्वारा होगा, न कि मुकदमे बाज द्वारा"
इसके साथ ही पीठ ने हर्ष मंदर को मामले की याचिकाकर्ता के रूप में हटा दिया और सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज को याचिकाकर्ता बना दिया। साथ ही वकील प्रशांत भूषण को अमिक्स क्यूरी के रूप में नियुक्त किया गया। पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई का फैसला न्यायाधीश द्वारा किया जाना चाहिए, न कि मुकदमेबाज द्वारा।

हर्ष मंदर की अदालत के समक्ष टिप्पणी
इस दौरान हर्ष मंदर ने सुप्रीम कोर्ट को यह बताया कि उनकी याचिका असम में हिरासत केंद्रों में अमानवीय स्थितियों पर थी, जहां अवैध विदेशियों को रखा जाता है। लेकिन CJI द्वारा की गई टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वो इस याचिका का उपयोग अवैध विदेशियों को हटाने के लिए कर रहे हैं।

CJI का हर्ष मंदर से सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि मामले का परिणाम पक्षपातपूर्ण हो सकता है। इसपर चीफ जस्टिस ने हर्ष मंदर से कहा, "क्या हम यह नहीं कह सकते कि आप असम सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं ताकि मुख्य सचिव कार्रवाई का सामना करने से बच सके ... आप इसका जवाब कैसे देंगे?"

हर्ष मंदर ने इससे इनकार किया और कहा कि यह सब गलत है और उनको किसी के द्वारा स्थापित नहीं किया गया। इस बीच असम सरकार और केंद्र ने याचिकाकर्ता का यह कहते हुए विरोध किया कि यह निंदनीय है।

चीफ जस्टिस ने हर्ष मंदर से कहा, "जब अदालत किसी मामले पर बहस करती है...हम वकीलों से उनके जवाब के लिए सवाल पूछते हैं ... आपको लिखित आदेश देखना होगा। जब मामला लंबित है तो आप एक राय से कैसे पूछ सकते हैं? आपको न्यायाधीशों पर विश्वास करना चाहिए। हम किसी को संस्थान को नष्ट करने की इजाजत नहीं देंगे।"


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