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सुप्रीम कोर्ट ने जी. जनार्दन रेड्डी को बेल्लारी जाने की अनुमति दी पर CBI से पूछा 6 साल में भी क्यों नहीं हुए आरोप तय

Live Law Hindi
7 Jun 2019 3:45 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने जी. जनार्दन रेड्डी को बेल्लारी जाने की अनुमति दी पर CBI से पूछा 6 साल में भी क्यों नहीं हुए आरोप तय
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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन मामले के आरोपी जी. जनार्दन रेड्डी को अपने बीमार ससुर को देखने करने के लिए 2 सप्ताह के लिए बेल्लारी जाने की अनुमति दे दी।

सीबीआई पर उठे सवाल
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अजय रस्तोगी की अवकाशकालीन पीठ ने 8 जून से 2 सप्ताह के लिए बेल्लारी जाने की इजाजत दी। हालांकि इस दौरान पीठ ने सीबीआई पर सवाल भी उठाया कि रेड्डी के खिलाफ आरोपों के बावजूद 6 साल बाद भी निचली अदालत में आरोप तय क्यों नहीं हुए।

पीठ ने कहा कि 6 साल तक लाइन में लगे होने के बाद भी आरोप अभी तक क्यों तय नहीं किए गए। पीठ ने कहा कि वो इस पर बात पर चिंतित है और जानना चाहते हैं।

सीबीआई ने किया अपना बचाव
सीबीआई की ओर से पेश वकील माधवी दीवान ने कहा कि रेड्डी ट्रायल में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। सह अभियुक्तों ने FIR को खारिज करने की याचिकाएं दायर की जिन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने ट्रायल पर रोक लगा दी और इसीलिए देरी हुई। सीबीआई ने कहा कि वो इसे लेकर हलफनामा दाखिल करेंगे। लेकिन रेड्डी के वकील ने इसका विरोध किया।

पीठ ने इससे पहले बेल्लारी जाने के लिए 6 अवसरों पर रेड्डी को अनुमति दी थी और उनपर अनुमति के दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं है। वकील ने कहा कि अब अदालत को बेल्लारी जाने पर रोक के आदेश में संशोधन करना चाहिए। पीठ ने कहा कि इस पर बाद में विचार किया जाएगा।

दरअसल कर्नाटक राज्य के पूर्व मंत्री और खनन मंत्री जी. जनार्दन रेड्डी ने अस्पताल में भर्ती अपने बीमार ससुर से मिलने के लिए बेल्लारी की यात्रा की अनुमति के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

पूर्व मंत्री फिलहाल जमानत पर हैं और उन्हें शीर्ष अदालत से बिना पूर्व अनुमति के बेल्लारी जाने की अनुमति नहीं है। जनवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने रेड्डी को इस शर्त पर ओबलापुरम माइनिंग कंपनी (ओएमसी) से जुड़े एक अवैध खनन मामले में जमानत दी थी कि वह कर्नाटक या आंध्र प्रदेश में खनन क्षेत्रों में से किसी में भी नहीं जाएंगे। वह 3 साल तक जेल में भी रहे।

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