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मिलिए उन 6 महिला वकीलों से जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील के तौर पर नामित किया

Live Law Hindi
30 March 2019 2:08 PM GMT
मिलिए उन 6 महिला वकीलों से जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील के तौर पर नामित किया
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 37 वकीलों को वरिष्ठ वकीलों के रूप में नामित किया। उस सूची में 6 महिलाएं भी शामिल हैं।

इनके नाम हैं: माधवी गोराडिया दीवान, अनीता शेनॉय, अपराजिता सिंह, मेनका गुरुस्वामी, ऐश्वर्या भाटी और प्रिया हिंगोरानी।

माधवी दीवान - वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हैं। उन्हें 17 दिसंबर, 2018 को ASG नियुक्त किया गया था और वो 30 जून, 2020 तक इस पद पर रहेंगी। वकील दीवान ने यूके के कैंब्रिज विश्वविद्यालय के पेम्ब्रोक कॉलेज से कानून की डिग्री प्राप्त की और बॉम्बे हाईकोर्ट में अपना अभ्यास शुरू किया। उन्होंने 2 राज्य सरकारों गुजरात और मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। वो एक निपुण लेखक के रूप में भी जानी जाती हैं।

अनीता शेनॉय - वर्ष 1995 में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंगलोर से स्नातक हुईं और लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक राज्य की वकील रही हैं।

मेनका गुरुस्वामी - नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंगलोर से 1997 में स्नातक हुईं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में रोड्स स्कॉलर के रूप में कानून पढ़ा है। उन्हें हार्वर्ड लॉ स्कूल में लॉ में मास्टर्स के लिए डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (डी फिल) से सम्मानित किया गया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार सलाहकार के रूप में भी काम किया है और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ में पढ़ाया है।

नवतेज जौहर मामले में, जिसमें समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया, गुरुस्वामी ने आईआईटी छात्रों और एलजीबीटीक्यू समुदाय के स्नातकों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने मणिपुर के अतिरिक्त गैर न्यायिक हत्या मामले में भी सुप्रीम कोर्ट में अमिक्स के रूप में सहायता प्रदान की थी। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में रोड्स हाउस में उनके चित्र का अनावरण कर दुर्लभ सम्मान भी दिया गया है। उनका नाम फोर्ब्स की वर्ष 2019 ट्रेलब्लेज़र सूची में शामिल किया गया था।

ऐश्वर्या भाटी - वो एक एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड हैं। वर्ष 2017 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश का AAG नियुक्त किया गया था। भाटी ने वरिष्ठ पदनाम को "सपने के सच होने" के रूप में वर्णित किया और कहा कि वह "महान जिम्मेदारी" के बारे में जानती हैं जो इस पदनाम के साथ आती है।

प्रिया हिंगोरानी - वर्ष 1990 से सक्रिय कानून व्यवस्था में हैं जब उन्हें बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में वकील के रूप में नामांकित किया गया था। उनका प्राथमिक अभ्यास सुप्रीम कोर्ट में हुआ और उन्होंने दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, पंजाब और हरियाणा, ओडिशा, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के उच्च न्यायालयों के साथ- साथ ट्रिब्यूनल और अधीनस्थ न्यायालयों में भी कार्य किया है।

उन्हें कराधान, सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क, बीमा, परिवार और वैवाहिक कानून, वाणिज्यिक कानून, श्रम और सेवा कानून, मानव अधिकार और संवैधानिक कानून सहित कानून के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित मामलों का अनुभव है।

अपराजिता सिंह - वो स्वतंत्र अभ्यास शुरू करने से पहले वरिष्ठ वकील साल्वे और यू. यू. ललित के जूनियर थीं। उन्होंने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के उपायों के सुझाव के लिए शीर्ष अदालत की अमिक्स क्यूरी के तौर पर मदद की जिसके कारण अप्रैल 2017 से BSIII वाहनों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। वह उस समिति का भी हिस्सा भी रहीं जिसने निराश्रित विधवाओं के पुनर्वास पर एक कॉमन वर्किंग प्रोग्राम यानी आम कार्य योजना का सुझाव दिया था।

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