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रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए 15 अगस्त तक का समय बढ़ाया

Live Law Hindi
10 May 2019 8:41 AM GMT
रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए 15 अगस्त तक का समय बढ़ाया
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सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अयोध्या रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मध्यस्थता पैनल को दिए गए समय को 15 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया है।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने यह कहा कि अदालत द्वारा नियुक्त मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष की रिपोर्ट मिल गई है और इस प्रक्रिया में हुई प्रगति नोट की गई है-

"मध्यस्थता जारी है और अध्यक्ष एक सौहार्दपूर्ण और पूर्ण समाधान पर पहुंचने के लिए 15 अगस्त तक के लिए इसका विस्तार चाहते हैं और जिसे हम देने के लिए इच्छुक हैं। लेकिन हम इस प्रगति (पार्टियों के बीच) को अभी के लिए गोपनीय बनाए रखेंगे। "

सुन्नी वक़्क़ बोर्ड एवं रामलला के लिए पेश वकीलों ने रखी अपनी राय

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने मध्यस्थता के सभी प्रयासों के प्रति समर्थन व्यक्त किया तो रामलला के लिए पेश वरिष्ठ वकील सी. एस. वैद्यनाथन ने जोर देकर कहा कि समिति को जून के अंत तक ही समय दिया जाना चाहिए।

"जब वो अगस्त तक का समय मांग रहे हैं तो हम यह कैसे कर सकते हैं? हम प्रक्रिया को शॉर्ट-सर्किट नहीं करना चाहते," मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में प्रक्रिया के विस्तार की अनुमति देते हुए यह कहा।

समिति ने की थी अपनी रिपोर्ट सीलबंद कवर में पेश

इससे पहले समिति ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक सीलबंद कवर में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। अगले महीने जून में एक समझौते पर पहुंचने के प्रयास को जारी रखने के लिए पक्षकार मिलने वाले हैं।

मध्यस्थता के लिए भेजा गया है अयोध्या रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद

2 महीने पहले अदालत ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति एफ. एम. आई. कलीफुल्ला, श्री श्री रवि शंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू को मध्यस्थता के लिए इस मामले को भेजा था।

दरअसल मध्यस्थता कार्रवाही यूपी के फैजाबाद में आयोजित करने के लिए निर्देशित की गई, जहां विवादित स्थल स्थित है।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्यस्थता प्रक्रिया को इन कैमरा आयोजित किया जाना चाहिए और मीडिया को इसके घटनाक्रम पर रिपोर्टिंग करने से रोक दिया गया था।

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