Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

कर्नाटक राजनीतिक संकट : सुप्रीम कोर्ट ने 10 बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता पर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए

Live Law Hindi
12 July 2019 11:05 AM GMT
कर्नाटक राजनीतिक संकट : सुप्रीम कोर्ट ने 10 बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता पर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए
x

लगभग 1 घंटे तक विस्तृत सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक विधानसभा के 10 विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

मामले में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अदालत के सामने आए
CJI रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने यह कहा कि मामले में पर्याप्त महत्व के मुद्दे उत्पन्न हुए हैं, विशेष रूप से समय सीमा के भीतर निर्णय लेने के लिए अध्यक्ष को निर्देश जारी करने के लिए न्यायालय की शक्ति से संबंधित। साथ ही ऐसी स्थिति में अयोग्यता पर पहले फैसला हो या इस्तीफे पर। पीठ ने कहा कि इस मामले में गहन विचार की आवश्यकता है। कोर्ट ने सुनवाई को अगले मंगलवार के लिए स्थगित कर दिया है।

स्पीकर पर लगाया गया अदालत की अवमानना का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि स्पीकर ने 10 विधायकों द्वारा पेश किए गए इस्तीफे पर निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय सीमा के अनुसार कार्य करने से इनकार करते हुए अदालत की अवमानना ​​की है।

रोहतगी ने कहा कि इस्तीफे "एक पंक्ति के पत्र" थे, जिनके लिए निर्णय लेने के लिए अधिक समय की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायकों को सदन में उपस्थित होने और बजट पर वोट देने के लिए व्हिप जारी किया गया है। उनके इस्तीफे की स्वीकृति में देरी को उनकी अयोग्यता का कारण बनाया जा रहा है।

स्पीकर की ओर से रखा गया अपना पक्ष
इस पर पलटवार करते हुए वरिष्ठ वकील डॉ ए. एम. सिंघवी ने कहा कि स्पीकर का संवैधानिक दायित्व अनुच्छेद 190 (3) (बी) के तहत यह सुनिश्चित करना है कि विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक और वास्तविक हों। बागी विधायक त्यागपत्र देकर अयोग्यता से बचने का प्रयास कर रहे हैं। सिंघवी ने कहा कि अध्यक्ष को इस बात की जांच करनी है कि क्या संविधान की अनुसूची 10 के तहत दलबदल विरोधी धारा के अनुसार उन्होंने अयोग्य ठहराया जाए, जोकि जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी की ओर से दी गयी दलील
मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि याचिका "राजनीतिक रूप से प्रेरित" है जिसमें अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। स्पीकर की तथाकथित देरी से किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। धवन ने यह तर्क दिया कि हालांकि अदालत असाधारण परिस्थितियों में स्पीकर के निर्णय की समीक्षा कर सकती है लेकिन निर्णय होने से पहले ही वह अध्यक्ष को निर्देश जारी नहीं कर सकती।

SC द्वारा तय समय सीमा के भीतर नहीं लिया गया इस्तीफे पर निर्णय
वहीं विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय के लिए गुरुवार को न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के अनुसार कार्य करने से इनकार कर दिया था। "विधायकों ने मुझसे संवाद नहीं किया और राज्यपाल के पास पहुंचे। वह क्या कर सकते हैं? क्या यह दुरुपयोग नहीं है? वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। मेरा दायित्व इस राज्य और देश के संविधान के लोगों के प्रति है। मैं देरी कर रहा हूं क्योंकि मैं इस जमीन से प्यार करता हूं। मैं जल्दबाजी में काम नहीं कर रहा हूं," स्पीकर कुमार ने विधायकों से मिलने के बाद यह बात मीडिया से कही थी।
SC ने विधायकों को स्पीकर के समक्ष पेश होने का दिया था आदेश

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 बागी विधायकों को गुरुवार शाम 6 बजे विधानसभा स्पीकर के समक्ष पेश होकर इस्तीफे पर अपनी बात रखने को कहा था।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ ने स्पीकर से आग्रह किया था कि वो इन बागी विधायकों की बात सुने और शाम को ही इस पर आदेश जारी करें। विधायक दावा कर रहे हैं कि स्पीकर के. आर. रमेश कुमार ने गैर-कानूनी रूप से उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है और अपने संवैधानिक कर्तव्य को छोड़ दिया है।

विधायकों ने अपने इस्तीफे को बताया था स्वैच्छिक

याचिका दायर करने वाले 10 विधायकों ने यह कहा था कि कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष उनके इस्तीफे पर निर्णय लेने में देरी कर रहे हैं क्योंकि वह विधानसभा सत्र शुरू होने पर शुक्रवार को उनकी अयोग्यता का फैसला करना चाहते हैं।विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट से यह माँग की कि स्पीकर द्वारा उन विधायकों को अयोग्य घोषित करने से रोकने और उनका इस्तीफा स्वीकार करने के निर्देश दिए जाएं।

विधायकों का कहना था कि उनका इस्तीफा स्वैच्छिक और बिना किसी डर के है क्योंकि उन्हें यकीन है कि कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी का शासन एक ठहराव पर आ गया है। विधायकों ने सरकार में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को उजागर करने के लिए आईएमए, पोंजी घोटाला और जेएसडब्ल्यू भूमि घोटाले का हवाला दिया था।

विधानसभा अध्यक्ष भी पहुँचे थे अदालत
कर्नाटक राजनीतिक संकट मामले में गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे और उस आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई थी जिसमें गुरुवार को ही शाम 6 बजे 10 बागी विधायकों से मिलने और रात 12 बजे तक फैसला देने को कहा गया था। हालांकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने इस मामले में तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

"पीठ नहीं जारी कर सकती ऐसा कोई आदेश"
स्पीकर के वकील ए. एम. सिंघवी और देवदत्त कामत द्वारा कहा गया कि स्पीकर संवैधानिक रूप से पहले अयोग्यता कार्यवाही करने के लिए बाध्य है और उस पर विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि पीठ द्वारा ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता और इस याचिका पर अभी सुनवाई होनी चाहिए। लेकिन पीठ ने कहा कि उसने सुबह ही इस मामले में आदेश पारित कर दिया है और अध्यक्ष को यह तय करना है कि उनकी कार्रवाई क्या होनी चाहिए।

"विधायकों के इस्तीफे किसी दबाव में तो नहीं, ये जांचने में लगेगा वक़्त"
दरअसल कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी अर्जी में कहा है कि संवैधानिक कर्तव्य और विधानसभा नियमों के तहत वो ये सत्यापित करने के लिए बाध्य हैं कि विधायकों द्वारा दिए गए इस्तीफे स्वैच्छिक थे या दबाव मे दिए गए थे। इसलिए ये जांच आधी रात तक पूरी नहीं की जा सकती है।

स्पीकर ने कहा है कि वह बागी विधायकों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता कार्यवाही पर विचार कर रहे हैं और उसके लिए भी उन्हें समय चाहिए। अदालत के निर्णय के चलते इस्तीफे की स्वैच्छिक प्रकृति का फैसला करना मुश्किल हो गया जिसकी उचित जांच की आवश्यकता हो सकती है।

Next Story