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जयललिता की मौत: सुप्रीम कोर्ट ने जांच आयोग की कार्यवाही पर रोक लगाई, तमिलनाडु सरकार को नोटिस

Live Law Hindi
27 April 2019 7:26 AM GMT
जयललिता की मौत: सुप्रीम कोर्ट ने जांच आयोग की कार्यवाही पर रोक लगाई, तमिलनाडु सरकार को नोटिस
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सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मौत की जांच के लिए गठित आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

शुक्रवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल की याचिका पर ये कदम उठाया और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर उनकी ओर से जवाब मांगा।

हालांकि इस दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के. वी. विश्वनाथन ने इसका विरोध किया और कहा कि आयोग की 90 फीसदी जांच पूरी हो चुकी है।

दरअसल AIADMK की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने अपोलो अस्पताल में 5 दिसंबर, 2016 को जयललिता की मृत्यु के बाद सितंबर 2017 में उच्च न्यायालय के जज जस्टिस ए.अरुमुघस्वामी की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था।

अपोलो अस्पताल ने इसके विरोध में मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की लेकिन 4 अप्रैल को मद्रास उच्च न्यायालय ने अस्पताल में AIADMK नेता की मौत की चल रही जांच के खिलाफ अस्पताल की आपत्ति को खारिज कर दिया। अस्पताल ने आयोग द्वारा उसके डॉक्टरों को समन और अस्पताल के रिकॉर्ड की मांग को चुनौती दी थी। अस्पताल चाहता था कि जांच की कार्यवाही को रोक दिया जाए। अस्पताल ने उच्च न्यायालय को बताया था कि स्वतंत्र भारत में यह पहली बार हुआ कि किसी राजनीतिक नेता को दिए गए चिकित्सा उपचार की शुद्धता की जांच के लिए आयोग को अनुमति दी गई।

इसके बाद अपोलो ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ के समक्ष अपोलो अस्पताल ने यह तर्क दिया कि आयोग AIDMK संस्थापक और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन ( MGR) के मृत्यु रिकॉर्ड भी चाहता है।

गौरतलब है कि 75 दिनों तक चेन्नई के अपोलो अस्पताल में इलाज के बाद 5 दिसंबर 2016 को जे. जयललिता का निधन हो गया था। मौत पर सवाल उठाते हुए तमिलनाडु के विपक्षी दल DMK ने मांग की थी कि इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जांच की जानी चाहिए।

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