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सुप्रीम कोर्ट ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर सिंह बंधुओं को अवमानना में जेल भेजने की चेतावनी दी

Live Law Hindi
6 April 2019 11:27 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर सिंह बंधुओं को अवमानना में जेल भेजने की चेतावनी दी
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रैनबैक्सी कंपनी के दो पूर्व प्रमोटरों मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने जापानी फर्म दाइची सैंक्यो को 3,500 करोड़ रुपये की मध्यस्थता अवार्ड राशि का भुगतान नहीं किया तो वो दोनों को जेल भेज देगा।

सिंगापुर के मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा पारित अवार्ड का है मामला
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की 3 जजों की पीठ ने सिंह बंधुओं को जापान की फर्म दाइची सैंक्यो के पक्ष में सिंगापुर के मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा पारित अवार्ड को सुरक्षित रखने के प्रस्ताव के साथ आने में विफल रहने के बाद यह चेतावनी दी है।

CJI ने अदालत में मौजूद दोनों भाइयों से कहा, "आप (दोनों भाई) दुनिया के आधे हिस्से के मालिक हो सकते हैं, लेकिन आपके पास इस बात की कोई ठोस योजना नहीं है कि मध्यस्थ राशि कैसे प्राप्त होगी। आपने कहा कि किसी पर आपका 6,000 करोड़ रुपये बकाया है लेकिन यह न तो इधर है और न ही उधर है।"

CJI ने कहा, "हम राशि को सुरक्षित करना चाहते हैं। आप इसे कैसे जमा करने की योजना बना रहे हैं१ अगर हम उन्हें अवमानना का दोषी पाते हैं तो हम उन्हें जेल भेज देंगे। "

दोनों भाइयों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और पी. एस. पटवालिया ने किया जबकि जापानी कंपनी का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने किया। अदालत ने कहा कि वह 11 अप्रैल को इस अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगी।

इस दौरान सिंह भाइयों ने उस राशि के बारे में संदेह व्यक्त किया जो कंपनियों को बेचने के बाद प्राप्त होगी। शिविंदर सिंह ने कहा कि यदि परिचालन कंपनियों का परिसमापन किया गया तो इससे केवल 900 करोड़ रुपये मिलेंगे जो पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कंपनियों के मूल्य को बढ़ाने के लिए 2 साल के लिए दाइची के साथ काम करने की पेशकश की ताकि अगले 2 वर्षों में 2000 करोड़ की राशि मिल सके।

पिछली सुनवाई में CJI ने कहा था, "आप फार्मा केयर उद्योग के ध्वजवाहक थे, और यह अच्छा नहीं लगता कि आप एक मामले में अदालत में पेश हो रहे हैं।"

सिंगापुर की अदालत ने वर्ष 2016 में दिया था फैसला
दरअसल सिंगापुर की अदालत ने अप्रैल 2016 में दाइची को नुकसान के आरोप सही बताते हुए कहा था कि सिंह भाइयों ने कंपनी को जापानी फर्म को बेचने के समय रैनबैक्सी में गलत काम के बारे में कुछ जानकारी छिपाई थी। दोनों भाइयों ने सिंगापुर में इस अवार्ड की अपील की थी लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि दाइची भारत में इस अवार्ड को लागू कर सकती है।

पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने दाइची की अवमानना याचिका पर कार्रवाई करते हुए IHH हेल्थकेयर बरहाद को फोर्टिस हेल्थकेयर की बिक्री पर यथास्थिति का आदेश दिया था।

जापानी कंपनी ने रैनबैक्सी बिक्री सौदे में अमेरिका के साथ अपने विनियामक संकट को उजागर करने में विफलता के बाद सिंह भाइयों के खिलाफ 3500 करोड़ रुपये के मध्यस्थता अवार्ड के कार्यान्वयन के लिए भारतीय अदालतों को मामला स्थानांतरित कर दिया।

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