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गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ हार्दिक पटेल की याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Live Law Hindi
2 April 2019 9:23 AM GMT
गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ हार्दिक पटेल की याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
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कांग्रेस के नेता हार्दिक पटेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें मेहसाणा के विसनगर दंगा मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।

मंगलवार को हार्दिक के वकील ने जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ के समक्ष इस मामले की जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। वहीं जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हार्दिक पर फैसला जुलाई 2018 में आया था। ऐसे में जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है।

दंगा भड़काने के आरोप में साल 2018 में विसनगर कोर्ट ने हार्दिक पटेल को दोषी ठहराते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई थी जिसके कारण वो जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव लड़ने से अयोग्य हो गए थे।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में पटेल ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत और एकपक्षीय हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने दोषसिद्धि को निलंबित करने का अनुरोध किया है क्योंकि गुजरात में चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख चार अप्रैल है।

याचिका में कहा गया कि हाई कोर्ट का 29 मार्च का फैसला सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने 8 अगस्त 2018 को उनकी दो साल की सजा को निलंबित किया था और ऐसे में उनकी दोषसिद्धि को भी निलंबित करने में कोई अड़चन नहीं है। इसके अलावा उनका केस मजबूत है और इसके लिए उनके पास आधार भी हैं।

हार्दिक ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2007 के नवजोत सिंह सिद्धू बनाम पंजाब राज्य मामले में दिए फैसले पर भरोसा जताया है। याचिका में कहा गया है कि नवजोत सिद्धू केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोषसिद्धि की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को ये भी देखना चाहिए कि दोषसिद्धि का व्यक्ति पर क्या प्रभाव होगा और उसे बरकरार रखा गया तो उसे कभी ना पूरा होने वाला नुकसान तो नहीं होगा। अगर अब दोषसिद्धि को निलंबित नहीं किया गया तो वो 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने के अधिकार का खो देंगे।

इसके साथ ही कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी फैसले में कहा था कि ऐसे मामलों में मौजूद

सबूतों पर भी गौर किया जाना चाहिए जबकि उनके केस में कोई सीधा सबूत नहीं है और पूरा केस कही-सुनी पर आधारित है। याचिका में दोषसिद्धि को निलंबित कर हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

दरअसल 23 जुलाई, 2015 को पाटीदार आंदोलन में हिंसा हो गई थी। दंगा भड़काने के आरोप में जुलाई 2018 को निचली अदालत ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को दोषी ठहराते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि कोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया था लेकिन दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। पटेल इस मामले को लेकर गुजरात हाई कोर्ट पहुंचे थे लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।

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