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सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरियों व अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर फिलहाल अन्य आदेश देने से इनकार किया

Live Law Hindi
27 Feb 2019 12:54 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरियों व अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर फिलहाल अन्य आदेश देने से इनकार किया
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पुलवामा की घटना के बाद देश भर में रह रहे कश्मीरी छात्रों पर हमले को लेकर केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद से अभी तक देश मे कहीं भी कश्मीरी छात्रों से हिंसा की घटना सामने नहीं आई है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने कहा कि इस चरण पर कोई आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं है।

पीठ ने सभी राज्यों से 1 सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि अदालत द्वारा हेल्पलाइन नंबर व ई-एफआईआर जैसे आदेश दिए जा सकते हैं।

22 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के नोडल अफसरों को ये निर्देश दिए थे कि वो पुलवामा हमले के बाद कश्मीरी या किसी अल्पसंख्यक पर हमले, खतरे या सामाजिक बहिष्कार व भेदभाव की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करें।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने राज्यों के मुख्य सचिव व डीजीपी को भी यह निर्देश दिया था कि वो कश्मीरी या किसी अल्पसंख्यक पर हमले, खतरे या सामाजिक बहिष्कार व भेदभाव की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करें।

पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के अलावा दस राज्यों जम्मू- कश्मीर, उत्तराखंड, हरियाणा, यूपी, बिहार, मेघालय, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को कहा है कि वो नोडल अफसरों के नाम व पते संबंधी व्यापक प्रचार करे ताकि पीड़ित उनसे संपर्क कर सकें।

इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने पीठ को बताया कि पंजाब और महाराष्ट्र में भी हाल ही में कश्मीरी छात्रों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। उनका कहना था कि कोर्ट को नोडल अफसर नियुक्त किए जाने जाने चाहिए।

वहीं केंद्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने पीठ को बताया था कि केंद्र केवल राज्यों को एडवायजरी जारी कर सकता है क्योंकि कानून- व्यवस्था राज्यों का विषय है। इस संबंध में केंद्र ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिव को एडवायजरी भेजी है और नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।

दरअसल पुलवामा की घटना के बाद देश भर में रह रहे कश्मीरी छात्रों पर हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कश्मीरी छात्रों व नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।

वकील तारिक अदीब, जिन्होंने ये याचिका दाखिल की है, उनके द्वारा अपनी याचिका में देश के अलग- अलग इलाकों में कश्मीरी छात्रों पर हो रहे हमलों संबंधी मीडिया रिपोर्ट और मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय के सोशल मीडिया पर बयानों का हवाला भी दिया गया है।

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