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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के ' दलित ' शब्द का इस्तेमाल ना करने के सर्कुलर के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

Live Law Hindi
18 Feb 2019 12:02 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के  दलित  शब्द का इस्तेमाल ना करने के सर्कुलर के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
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सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति के सदस्यों को संबोधित करने एवं उनका वर्णन करने के लिए "दलित" शब्द का उपयोग नहीं करने के केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के खिलाफ दाखिल याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पीठ की दिलचस्पी इस याचिका पर विचार करने में नहीं है। इस याचिका में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के वर्ष 2018 के सर्कुलर को चुनौती दी गई जिसमें निजी टेलीविजन चैनलों को 'दलित' कि बजाए 'अनुसूचित जाति' शब्द का उपयोग करने के लिए कहा गया था।

याचिकाकर्ता वी. ए. रमेश नाथन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सर्कुलर की वैधानिकता पर सवाल उठाया और कहा, "भारत सरकार इस तरह का सर्कुलर कैसे जारी कर सकती है, जो मेरी पहचान पर सवाल उठा रहा है।" पीठ ने बिना रुके कहा, "इस स्तर पर, हम इस याचिका पर विचार करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।"

दरअसल मंत्रालय ने 7 अगस्त, 2018 के परिपत्र में सलाह दी थी कि मीडिया को अनुसूचित जाति के सदस्यों के लिए "दलित" शब्द का उपयोग करने से बचना चाहिए और उन्हें यह निर्देश दिया गया था कि सभी आधिकारिक लेन-देन, व्यवहार, समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को सूचित करने के लिए सिर्फ 'अनुसूचित जाति' का उपयोग किया जाना चाहिए।

इससे पहले जून 2018 में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को यह निर्देश दिया था कि मीडिया आउटलेट को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा भेजे गए उस सर्कुलर के प्रकाश में समाचारों में 'दलित' शब्द का उपयोग करना बंद करने पर विचार करने को कहा जाए, जो संघ और राज्य सरकारों को भेजा गया था कि अनुसूचित जाति से संबंधित किसी व्यक्ति के लिए इस शब्द का उपयोग ना किया जाए।

न्यायमूर्ति बी. पी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जेड. ए. हक की पीठ पंकज मेशराम द्वारा दायर पीआईएल पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने सभी सरकारी दस्तावेजों से 'दलित' शब्द को हटाने की मांग की थी।

नवंबर 2017 में, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय ने इस मामले में सुनवाई के दौरान आधिकारिक दस्तावेजों से दिए गए शब्द को हटाने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। अंत में, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के निदेशक ने 15 मार्च, 2018 को एक परिपत्र जारी किया, जिसमें कहा गया कि केंद्र और राज्य सरकारों को 'दलित' शब्द का उपयोग करने से बचना चाहिए।

याचिकाकर्ता के वकील एस. आर. नरनावेर ने कहा था कि उक्त परिपत्र के प्रकाश में मीडिया को उक्त शब्द का उपयोग करने से रोकने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए और उत्तरदाताओं और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भी यह निर्देश दिया जाना चाहिए।

इस प्रकार अदालत ने आई एंड बी मंत्रालय से कहा था कि मीडिया को इस शब्द का उपयोग करने से रोकने के लिए निर्देशित करने पर विचार करें।

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