ममता बनर्जी के खिलाफ FIR और जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

  • ममता बनर्जी के खिलाफ FIR और जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 अक्टूबर) को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने तथा जांच की मांग वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

    याचिका में ED ने आरोप लगाया है कि कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राजनीतिक सलाहकार संस्था I-PAC के कार्यालय में तलाशी के दौरान ममता बनर्जी और पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर जांच में बाधा डाली थी।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए सीमित मुद्दे पर आदेश सुरक्षित रखा कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जानी चाहिए या नई राज्य सरकार को ही जांच करने दी जाए।

    कपिल सिब्बल बोले- राज्य सरकार जांच करने में सक्षम

    ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं हैं और राज्य में दूसरी राजनीतिक पार्टी की सरकार है। ऐसे में राज्य सरकार मामले की जांच कर सकती है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आवश्यकता नहीं है।

    सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी मामले को CBI को सौंपने के लिए स्वतंत्र है और इसमें कोई बाधा नहीं है। उन्होंने अदालत से सवाल किया कि जब राज्य सरकार स्वयं जांच कर सकती है, तो न्यायालय को विशेष आदेश पारित करने की आवश्यकता क्यों है।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने पिछली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की ओर से दी गई समान दलीलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष की चिंता यह है कि राज्य सरकार द्वारा जांच किए जाने पर उस पर राजनीतिक मकसद से काम करने के आरोप लग सकते हैं।

    इस पर सिब्बल ने आश्वासन दिया कि जांच में ऐसा कुछ नहीं होगा।

    ED ने उठाया निष्पक्ष जांच का सवाल

    ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि यदि राज्य सरकार मामले को CBI को सौंपती है, तो उस पर भी दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के आरोप लगाए जा सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। ऐसे में वे जांच को प्रभावित करने की स्थिति में हो सकते हैं।

    ED की याचिका में ममता बनर्जी के अलावा पश्चिम बंगाल के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा और तत्कालीन दक्षिण कोलकाता के पुलिस उपायुक्त प्रियव्रत रॉय को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED द्वारा कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय में की गई तलाशी से संबंधित है।

    ED का आरोप है कि तलाशी के दौरान ममता बनर्जी वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ कार्यालय पहुंचीं और अधिकारियों का सामना किया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी परिसर से कुछ फाइलें अपने साथ ले गईं, जिससे जांच प्रभावित हुई।

    इन्हीं आरोपों के आधार पर ED ने ममता बनर्जी और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने तथा मामले की जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस सीमित सवाल पर आदेश सुरक्षित रखा है कि जांच CBI को सौंपी जाए या राज्य सरकार को ही इसकी जिम्मेदारी दी जाए।

    इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story