हम इस समस्या के प्रति पूरी तरह सचेत हैं: SIR में नाम कटने वाले वोटर की अपीलों पर प्राथमिकता से सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
Amir Ahmad
9 Oct 2026 12:04 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर अपीलों पर प्राथमिकता से सुनवाई की मांग पर विचार करने की सहमति दी। यह मांग खास तौर पर कोलकाता और हावड़ा नगर निकायों के उन मतदाताओं की अपीलों को लेकर की गई है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इन निकायों के चुनाव नवंबर में होने की संभावना है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि मामले को 16 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है या नहीं। इससे पहले मामले का उल्लेख करते हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जल्द सुनवाई की मांग की।
शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामले की सुनवाई अब 30 अक्टूबर के लिए तय की गई। उन्होंने इससे पहले सुनवाई करने का अनुरोध किया।
चीफ जस्टिस ने शुरुआत में कहा कि मामले को 29 अक्टूबर को सुना जा सकता है लेकिन शंकरनारायणन ने कहा कि तब तक देर हो सकती है, क्योंकि नगर निकाय चुनावों की अधिसूचना नवंबर के मध्य में जारी होने की संभावना है।
उन्होंने कहा,
“हम उपचुनाव पहले ही गंवा चुके हैं, अब नगर निकाय चुनाव भी गंवा देंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि अब तक जिन करीब एक लाख अपीलों पर फैसला हुआ है, उनमें से लगभग 93 प्रतिशत मामलों में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल किए गए हैं।
भूषण ने पीठ को बताया कि कोलकाता और हावड़ा के इन दो नगर निकाय क्षेत्रों से संबंधित करीब 1.70 लाख अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों में लंबित हैं। उन्होंने अंतरिम आदेश देने का अनुरोध किया ताकि इन अपीलकर्ताओं को चुनाव में मतदान करने की अनुमति मिल सके। उनका तर्क है कि जिन अपीलों पर फैसला हो चुका है उनमें 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में मतदाताओं के पक्ष में निर्णय आया है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपीलीय न्यायाधिकरणों के कामकाज से जुड़े मुद्दे पर विचार कर रहा है।
पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि कोर्ट इस समस्या के प्रति पूरी तरह सचेत है।
चीफ जस्टिस ने एक संभावित समाधान सुझाते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में चुनाव होने वाले हैं वहां मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की मांग करने वाले लोगों की अपीलों को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके विपरीत, नाम हटाने की मांग से जुड़ी अपीलों को बाद में सुना जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कोर्ट यह पता लगाएगा कि मामले को 16 अक्टूबर को सूचीबद्ध करना संभव है या नहीं। ऐसा नहीं होने पर 29 अक्टूबर को सुनवाई की जा सकती है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम और रेजिनगर में होने वाले उपचुनावों से पहले पश्चिम बंगाल के SIR मामलों पर तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की। उस समय चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की थी कि ये केवल उपचुनाव हैं। अब कोलकाता और हावड़ा के नगर निकाय चुनावों से पहले अपीलों के निपटारे में तेजी लाने की मांग की जा रही है।

