हाईकोर्ट

सिंगल जज ने स्टूडेंट को लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करूंगा का पोस्टर दिखाने का दिया आदेश, हाईकोर्ट ने किया रद्द
सिंगल जज ने स्टूडेंट को 'लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करूंगा' का पोस्टर दिखाने का दिया आदेश, हाईकोर्ट ने किया रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक सिंगल जज का निर्देश रद्द किया, जिसमें यूनिवर्सिटी से निकाले गए एक स्टूडेंट को 30 मिनट (30 दिनों के लिए) यूनिवर्सिटी गेट पर एक पोस्टर लेकर खड़े होने के लिए कहा गया, जिस पर लिखा था कि वह "कभी किसी लड़की के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेगा"।इस निर्देश को अनुचित और अपमानजनक बताते हुए चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने कहा कि ऐसी सज़ा छात्र के चरित्र पर "स्थायी दाग" छोड़ देगी।संक्षेप में मामलाबेंच स्टूडेंट द्वारा दायर रिट याचिका में अक्टूबर में...

हाईकोर्ट ने दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज एग्जाम 2023 के फाइनल रिजल्ट में बदलाव करने से इनकार किया, कहा- दखल देने से आ सकती है मामलों की बाढ़
हाईकोर्ट ने दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज एग्जाम 2023 के फाइनल रिजल्ट में बदलाव करने से इनकार किया, कहा- दखल देने से आ सकती है मामलों की बाढ़

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज एग्जामिनेशन, 2023 के फाइनल रिजल्ट में बदलाव की मांग वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक दखल से बाढ़ आ सकती है, जिससे कई तरह के नतीजे हो सकते हैं और यह प्रक्रिया बेकार हो जाएगी।जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि अदालतों को संयम बरतना चाहिए और शैक्षणिक और मूल्यांकन मामलों के रेगुलेशन में जांच अधिकारियों को उचित छूट देनी चाहिए।कोर्ट ने कहा कि भले ही व्यक्तिगत शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन समाधान करते समय चयन...

चाइल्ड कस्टडी दिशानिर्देश | दिल्ली हाईकोर्ट ने पेरेंटिंग प्लान के लिए PIL को प्रशासनिक पक्ष को भेजा, समिति नीति पर फैसला करेगी
चाइल्ड कस्टडी दिशानिर्देश | दिल्ली हाईकोर्ट ने 'पेरेंटिंग प्लान' के लिए PIL को प्रशासनिक पक्ष को भेजा, समिति नीति पर फैसला करेगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक PIL याचिकाकर्ता से, जिसने संरचित 'बाल पहुंच और कस्टडी दिशानिर्देश' और 'पेरेंटिंग प्लान' बनाने की मांग की, इस मुद्दे पर नीति बनाने के लिए हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष से संपर्क करने को कहा।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इस तरह आयुष्मान इनिशिएटिव फॉर चाइल्ड राइट्स और एकम न्याय फाउंडेशन द्वारा दायर PIL याचिका का निपटारा यह देखते हुए किया कि इस मामले पर हाई कोर्ट की उचित समिति द्वारा विचार किया जाना था।कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दो...

दिल्ली हाईकोर्ट ने NCRB पोर्टल पर नॉन-FIR शिकायत डेटा, पेंडिंग और तय कोर्ट केस के इंटीग्रेशन की मांग की
दिल्ली हाईकोर्ट ने NCRB पोर्टल पर नॉन-FIR शिकायत डेटा, पेंडिंग और तय कोर्ट केस के इंटीग्रेशन की मांग की

दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) पोर्टल पर उन शिकायत मामलों के डेटा को इंटीग्रेट करने की मांग की, जिनमें FIR दर्ज नहीं होती, साथ ही उन मामलों को भी जो सक्षम अदालतों में पेंडिंग हैं या तय हो चुके हैं।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने NCRB के डायरेक्टर और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के DDG से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा कि क्या NCRB पोर्टल पर उक्त डेटा को इंटीग्रेट करने के लिए कोई कदम उठाए गए।इस डेटा में जेल में बंद कैदियों के खिलाफ पेंडिंग...

नोएडा टेक्नीशियन की मौत का मामले में विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक की तत्काल रिहाई का आदेश
नोएडा टेक्नीशियन की मौत का मामले में विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक की तत्काल रिहाई का आदेश

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने गुरुवार को नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से जुड़े मामले में बड़ा आदेश देते हुए एमज़ेड विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि अभय कुमार की गिरफ्तारी हाईकोर्ट के हालिया फैसले और निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए की गई।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पाया कि अभय कुमार की गिरफ्तारी उमंग रस्तोगी एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्णय के विपरीत की गई। विशेष रूप...

S.53A CrPC | पटना हाईकोर्ट ने यौन अपराध के मामलों में आरोपी का मेडिकल जांच करने के लिए पुलिस को संवेदनशील बनाने को कहा
S.53A CrPC | पटना हाईकोर्ट ने यौन अपराध के मामलों में आरोपी का मेडिकल जांच करने के लिए पुलिस को संवेदनशील बनाने को कहा

पटना हाइकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 53ए को भूला हुआ प्रावधान बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पुलिस को संवेदनशील बनाया जाए ताकि यौन अपराध के मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसका मेडिकल टेस्ट कराया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर जांच में गंभीर और अपूरणीय खामियां रह जाती हैं।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ IPC की धारा 376 और POCSO Act की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास से दंडित आरोपी की आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी।अभियोजन के अनुसार वर्ष 2016...

हर चुनावी चूक भ्रष्ट आचरण नहीं होती: झारखंड हाईकोर्ट ने सिंदरी से चंद्रदेव महतो का चुनाव बरकरार रखा
हर चुनावी चूक 'भ्रष्ट आचरण' नहीं होती: झारखंड हाईकोर्ट ने सिंदरी से चंद्रदेव महतो का चुनाव बरकरार रखा

झारखंड हाईकोर्ट ने 3 फरवरी 2026 को सिंदरी विधानसभा क्षेत्र (38) से निर्वाचित चन्द्रदेव महतो चुनाव को बरकरार रखते हुए कहा कि चुनावी अभियान में हर तरह की विसंगति मात्र से 'भ्रष्ट आचरण' सिद्ध नहीं होता, जब तक यह साबित न किया जाए कि वह मतदाताओं को गुमराह कर अन्य प्रत्याशियों की संभावनाओं को वास्तविक रूप से प्रभावित करने के लिए की गई हो।एकल पीठ में जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने यह फैसला जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत दायर चुनाव याचिका पर सुनाते हुए दिया। याचिका में अक्टूबर–नवंबर 2024 के झारखंड...

आवेदन संख्या और उपस्थिति का उल्लेख अनिवार्य: दिल्ली हाइकोर्ट ने जिला कोर्ट्स को जारी किए दिशा-निर्देश
आवेदन संख्या और उपस्थिति का उल्लेख अनिवार्य: दिल्ली हाइकोर्ट ने जिला कोर्ट्स को जारी किए दिशा-निर्देश

दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी की सभी जिला कोर्ट्स को विस्तृत प्रैक्टिस दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि प्रत्येक न्यायिक आदेश में यह स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि किन आवेदन पर फैसला किया गया और पक्षकार या उनके वकील पेश हुए थे या नहीं।कोर्ट ने जिला कोर्ट्स के कई आदेशों में बुनियादी विवरणों की कमी पर गंभीर चिंता जताई।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि उनके समक्ष बार-बार ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें लंबित कार्यवाहियों के दौरान दायर अंतरिम और अन्य आवेदनों पर...

अध-कचरी याचिका: दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, लगाया 25,000 का जुर्माना
अध-कचरी याचिका: दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, लगाया 25,000 का जुर्माना

दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने इसे अध-कचरी याचिका करार दिया।कोर्ट ने कहा कि यह याचिका तीन साल की अत्यधिक देरी से दाखिल की गई और इसमें पूरा रिकॉर्ड तक संलग्न नहीं किया गया। हाइकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए 25,000 का जुर्माना भी लगाया।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि यह राशि नई दिल्ली स्थित एम्स के पुअर पेशेंट्स फंड में जमा कराई जाए।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लागत उस अधिकारी से वसूली जाएगी,...

परीक्षा की निष्पक्षता में मानसिक शांति भी शामिल: दिल्ली हाइकोर्ट ने बायोमेट्रिक गड़बड़ी से प्रभावित JEE अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति दी
परीक्षा की निष्पक्षता में मानसिक शांति भी शामिल: दिल्ली हाइकोर्ट ने बायोमेट्रिक गड़बड़ी से प्रभावित JEE अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति दी

दिल्ली हाइकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की निष्पक्षता केवल परीक्षा कक्ष में प्रवेश देने तक सीमित नहीं होती बल्कि यह भी जरूरी है कि अभ्यर्थी को ऐसे प्रक्रियात्मक झटकों का सामना न करना पड़े जो उसकी मानसिक शांति और एकाग्रता को भंग कर दें।इसी आधार पर हाइकोर्ट ने JEE 2026 की मुख्य परीक्षा (सेशन-I) में बायोमेट्रिक गड़बड़ी से प्रभावित अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति दी।मामले की सुनवाई जस्टिस जस्मीत सिंह ने की।याचिकाकर्ता श्लोक भारद्वाज परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचे...

समझौते के आधार पर अग्रिम ज़मानत लेकर बाद में मुकरना न्यायालय के विश्वास का उल्लंघन: हाईकोर्ट ने 2022 की ज़मानत आदेश वापस लिया
समझौते के आधार पर अग्रिम ज़मानत लेकर बाद में मुकरना न्यायालय के विश्वास का उल्लंघन: हाईकोर्ट ने 2022 की ज़मानत आदेश वापस लिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि कोई भी अभियुक्त केवल समझौते (कम्प्रोमाइज़) के आधार पर अग्रिम ज़मानत हासिल कर, बाद में न्यायालय के समक्ष दिए गए गंभीर आश्वासनों से मुकर नहीं सकता। ऐसा आचरण न्यायिक उदारता के दुरुपयोग और न्यायालयीय विश्वास के उल्लंघन के समान है। जस्टिस सुमीत गोयल ने 2022 में दी गई अग्रिम ज़मानत को वापस लेते हुए यह टिप्पणी की।न्यायालय ने कहा कि वह एक चिंताजनक प्रवृत्ति का संज्ञान ले रहा है, जिसमें अभियुक्त “आपसी समझौते” को एक रणनीतिक हथकंडे की तरह इस्तेमाल कर...

सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों को सामाजिक मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों को सामाजिक मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने वाले सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों को समाज या माता-पिता की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं है और न ही कोई व्यक्ति या संस्था उनके इस निर्णय में दख़ल दे सकती है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि सहमति से विवाह करने का निर्णय पूरी तरह पवित्र है और ऐसे निर्णय को सम्मान दिया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब दोनों व्यक्ति वयस्क हों और उन्हें अपने जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो।अदालत ने दोहराया कि विवाह करने का अधिकार मानवीय स्वतंत्रता का...

2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के बड़ी साज़िश मामले में जमानत याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के 'बड़ी साज़िश' मामले में जमानत याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े 'बड़ी साज़िश' मामले में दो आरोपियों—अथर खान और सलीम मलिक—द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने जमानत याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।सलीम मलिक की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप सह-आरोपी मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद के समान हैं, जिन्हें हाल...

सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं
सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा न सिर्फ़ याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारी, बल्कि एक दूसरे अधिकारी के खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की राहत दी, जो राहत के लिए कोर्ट नहीं आया।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि दूसरा अधिकारी कोर्ट नहीं आया, यह नहीं कहा जा सकता कि उसके खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां सही थीं। समानता के सिद्धांत के आधार पर यह माना गया कि जब कोई खास कार्रवाई कानूनी रूप से गलत पाई जाती है तो एक पक्ष को दिया गया फ़ायदा उसी तरह की स्थिति वाले दूसरे...

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास पुलिस की रिक्वेस्ट के बिना पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास पुलिस की रिक्वेस्ट के बिना पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

यह मानते हुए कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास CrPC की धारा 167 के तहत पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है, जब तक कि ऐसी रिक्वेस्ट इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी से न आए, जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस कस्टडी पुलिस द्वारा बताई गई जांच की ज़रूरत पर आधारित होनी चाहिए, न कि प्रॉसिक्यूशन के विवेक पर।जस्टिस संजय परिहार ने राज्य द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन खारिज करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बार चार्जशीट दायर हो जाने के बाद इसका मतलब यह होता है कि कस्टडी में...

गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया
गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट का फॉर्म भले ही उसके सब्सटेंस पर भारी पड़ता हो, लेकिन जब उसकी नींव ही गलत आरोप पर आधारित हो तो राज्य बाद में जांच के नतीजे के हिसाब से आरोप को हल्का या दोबारा इंटरप्रेट नहीं कर सकता।याचिकाकर्ता-कांस्टेबल का सस्पेंशन रद्द करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि अनुशासनात्मक अथॉरिटी को सज़ा देने से पहले दुर्व्यवहार को सही ढंग से क्लासिफाई करना होगा, नहीं तो पूरी कार्रवाई मनमानी हो जाएगी।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता के सस्पेंशन के...

पूरे उत्तर प्रदेश में कोई जुवेनाइल रिहैब इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- JJ Act बेकार, स्कूलों, शिक्षकों की भूमिका पर विचार किया
पूरे उत्तर प्रदेश में कोई जुवेनाइल रिहैब इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- JJ Act 'बेकार', स्कूलों, शिक्षकों की भूमिका पर विचार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में स्थिति पर गहरी चिंता जताई, जब राज्य सरकार ने उसके सामने यह माना कि पूरे राज्य में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, (JJ Act) 2015 को लागू करने में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी कमियां हैं।असल में उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि पूरे राज्य में JJ Act, 2015 और JJ रूल्स, 2016 के तहत बताए गए मान्यता प्राप्त संस्थानों, जैसे "फिट पर्सन," "ग्रुप फॉस्टर केयर संस्थान," "ग्रुप फॉस्टर केयर देने वाले," और "केस वर्कर" की उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी नहीं है।बता दें, ये...

कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर दोबारा नौकरी पाने वाले पूर्व सैनिक सिविल पेंशन के हकदार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर दोबारा नौकरी पाने वाले पूर्व सैनिक सिविल पेंशन के हकदार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

एक पूर्व सैनिक द्वारा अपनी सिविल दोबारा नौकरी के लिए पेंशन लाभ मांगने वाली रिट याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ लंबी सर्विस के आधार पर पेंशन का दावा नहीं किया जा सकता, जब तक कि अपॉइंटमेंट पक्का, स्थायी न हो और पेंशन देने वाले नियमों के तहत न आता हो।जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा,"शुरू से ही याचिकाकर्ता को इस बात की जानकारी थी कि वह एक अस्थायी कर्मचारी है, जिसकी सेवाएं किसी भी समय खत्म की जा सकती हैं। इसलिए ऐसा कोई मौका नहीं आया, जहां उसे अपनी नौकरी की प्रकृति के आधार पर एक...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में क्लास XII पास करने वालों के लिए एडिशनल सब्जेक्ट की सुविधा खत्म करने के CBSE का फैसला रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में क्लास XII पास करने वालों के लिए 'एडिशनल सब्जेक्ट' की सुविधा खत्म करने के CBSE का फैसला रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने CBSE के दो नोटिफिकेशन रद्द किया, जिसमें 2025 में क्लास XII पास करने वाले स्टूडेंट्स के लिए प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर "एडिशनल सब्जेक्ट" में बैठने की सुविधा वापस ले ली गई। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला मनमाना था, इसे पिछली तारीख से लागू किया गया और यह वैध उम्मीद के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।जस्टिस जसमीत सिंह ने 2025 में क्लास XII बोर्ड परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच को मंज़ूरी दी और कहा कि विवादित पॉलिसी में बदलाव बिना किसी उचित नोटिफिकेशन और बिना...