हाईकोर्ट
'पीड़िता का बलात्कारी के साथ जाना असामान्य व्यवहार': राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO केस में पूर्व सरपंच को बरी किया
एक पूर्व सरपंच के खिलाफ POCSO मामले में सज़ा रद्द करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यह बहुत ही असंभव है कि एक नाबालिग लड़की के साथ रेप होने के बाद वह अपनी मर्ज़ी से आरोपी के साथ दूसरी जगह जाए।इसके अलावा, पीड़िता की उम्र पर शक जताते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि स्कूल सर्टिफिकेट भले ही ज़रूरी हो, लेकिन जब सरकारी दस्तावेज़ों में विरोधाभासी जानकारी हो, तो सबसे पहले एडमिशन रिकॉर्ड को ही निर्णायक माना जाएगा।कोर्ट 17 साल की लड़की के साथ कथित यौन...
'आरोपी से सिर्फ़ फ़ोन कॉल करने से कोई व्यक्ति अपराध से नहीं जुड़ जाता': बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाबा सिद्दीकी मर्डर केस में सह-आरोपी को ज़मानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सह-आरोपी से सिर्फ़ टेलीफ़ोन पर बात करना, बिना किसी ऐसे सबूत के जो संगठित अपराध सिंडिकेट या खुद अपराध के बारे में जानकारी या उसमें भागीदारी का संकेत दे, किसी आरोपी को अपराध से जोड़ने के लिए काफ़ी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम एक्ट, 1999 (MCOCA) के कड़े प्रावधानों के तहत ज़मानत पर विचार करते समय, सिर्फ़ कॉल करने का आरोप, जिसके साथ साज़िश, जानकारी या मदद का कोई सबूत न हो, कानूनी शर्त को पूरा नहीं करता।जस्टिस डॉ. नीला गोखले पूर्व...
अविवाहित महिलाओं को 24 हफ़्ते तक गर्भपात का अधिकार, सुनिश्चित करें कि किसी को कोर्ट न जाना पड़े: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के X बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, NCT दिल्ली सरकार मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का व्यापक प्रचार करने का आदेश दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी महिला, खासकर अविवाहित महिला को 'अनचाही' प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर न किया जाए।उल्लेखनीय है कि 29 सितंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उपरोक्त फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अविवाहित महिलाएं भी आपसी सहमति से बने रिश्ते से...
'सम्मानित सांस्कृतिक संगठन को बदनाम किया गया': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जबरदस्ती वसूली का मामला रद्द किया, शिकायतकर्ता द्वारा RSS सदस्यता के 'दुरुपयोग' की निंदा की
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने लखनऊ की एक सोसाइटी के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सदस्य होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर शुरू किया गया।जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने कहा,"RSS जैसे एक बहुत ही अनुशासित और सम्मानित सांस्कृतिक संगठन" को उसके सदस्य (शिकायतकर्ता) ने बदनाम किया, जिसने एक निजी पार्किंग विवाद को सुलझाने के लिए अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया, जो कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग था। ...
ID Act | अगर कर्मचारियों ने पहले ही एम्प्लॉयर के सामने अपनी शिकायतें उठाईं और उनकी कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं तो उन्हें अलग से आवेदन करने की ज़रूरत नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 (ID Act) की धारा 2A(2) के तहत औपचारिक आवेदन करना ज़रूरी नहीं है, अगर कर्मचारियों ने एम्प्लॉयर को भेजे गए अपने रिप्रेजेंटेशन और शिकायतों की कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं, जिससे विवाद लेबर अथॉरिटीज़ के संज्ञान में आ गया हो।दीपक रोशन की सिंगल जज बेंच लेबर कोर्ट, देवघर के आदेशों को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसने कर्मचारियों के दावों को सिर्फ़ इस आधार पर खारिज किया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट की धारा...
एक्सप्लेनर : अनुच्छेद 224ए के तहत एडहॉक जजों की नियुक्ति
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 224ए ( हाईकोर्ट की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति) को हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में पांच रिटायर जजों की नियुक्ति के लिए लागू किया गया था। अब तक, अनुच्छेद 224ए को केवल तीन बार लागू किया गया है, जो 2007 में आखिरी बार था।क्या है अनुच्छेद 224ए ?भारतीय संविधान के "निष्क्रिय प्रावधान" के रूप में जाना जाता है, अनुच्छेद 224ए को संविधान (पंद्रहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 द्वारा शामिल किया गया था।यह हाईकोर्ट में लंबित मामलों के बैकलॉग...
डिजिटल अरेस्ट का कानूनी साया: BNS और IT Act में प्रक्रियात्मक कमियों का विश्लेषण
जैसे-जैसे साइबर धोखाधड़ी राष्ट्रीय सुर्खियों में हावी हो रही है, एक अजीब नमूना इसके परिष्कृत विकास के रूप में सामने आता है। 'डिजिटल अरेस्ट' रचनात्मक रूप से मनोवैज्ञानिक जबरदस्ती और तकनीकी स्पूफिंग को मिलाती है, जो अपहृत दूरसंचार नोड्स, म्यूल बैंक खातों और वरिष्ठ नागरिकों की एक श्रृंखला पर निर्भर करती है। एक विशिष्ट डिजिटल अरेस्ट घोटाले में, घोटालेबाज पीड़ितों को कॉल करते हैं और एक सरकार या कानून प्रवर्तन प्राधिकरण, या एक 'वर्चुअल अदालत' के रूप में पेश करते हैं। वे आधिकारिक वर्दी में पहने हुए...
संभल हिंसा मामला: यूपी सरकार व ASP ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR के आदेश को दी हाईकोर्ट में चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार और संभल के अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अनुज चौधरी द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की।इन याचिकाओं में संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा एएसपी चौधरी एवं अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी गई यह आदेश नवंबर 2024 की संभल हिंसा से संबंधित है।उक्त आदेश पिछले माह CJM विभांशु सुधीर द्वारा यामीन नामक व्यक्ति की अर्जी पर पारित किया गया। यामीन हिंसा में घायल युवक का पिता है और उसने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उसके...
विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक अधिकार: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक की पत्नी को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दी
झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व झारखंड विधायक एवं मंत्री कमलेश कुमार सिंह की पत्नी पर लगाए गए जमानत की शर्तों में संशोधन करते हुए उन्हें इलाज के लिए अमेरिका या यूनाइटेड किंगडम (UK) की यात्रा करने की अनुमति दी।कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने 13 मई 2014 को पारित उस आदेश में संशोधन किया, जिसके तहत याचिकाकर्ता को अपना पासपोर्ट जमा करने और विदेश यात्रा से रोका गया।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता जो...
संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों के आरोप अहम: तेलंगाना हाइकोर्ट ने उर्दू पत्रकार का पासपोर्ट रद्द करने का फैसला बरकरार रखा
तेलंगाना हाइकोर्ट ने उर्दू भाषा के पत्रकार द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए उनका पासपोर्ट रद्द किए जाने के फैसले को सही ठहराया।हाइकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट का नवीनीकरण कोई स्वचालित अधिकार नहीं है और जब किसी व्यक्ति की गतिविधियों को देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए प्रतिकूल बताया गया हो तो अदालत को अत्यंत सावधानी बरतनी होती है।जस्टिस नागेश भीमपाका ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्राकृतिक न्याय के...
"विवाह या गर्भावस्था शिक्षा में बाधा नहीं बन सकती” : एमपी हाईकोर्ट ने छात्रा को उपस्थिति में छूट देने का कॉलेज को दिया निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह और गर्भावस्था किसी महिला की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बन सकते। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया कि वे छात्राओं को मातृत्व/चाइल्ड केयर अवकाश, उपस्थिति में छूट और आवश्यक शैक्षणिक सहयोग प्रदान करें।मध्य प्रदेश हाईको की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल शामिल थे, ने कहा कि कार्यस्थलों पर उपलब्ध मातृत्व संरक्षण का लाभ शिक्षा प्राप्त कर रही महिलाओं को भी समान रूप से मिलना चाहिए।अदालत ने कहा—“पढ़ाई...
अंतरिम भरण-पोषण से केवल तात्कालिक राहत, अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाइकोर्ट ने 40 हजार की अंतरिम राशि बढ़ाने से किया इनकार
राजस्थान हाइकोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य कार्यवाही के दौरान पीड़ित पक्ष को आर्थिक तंगी से बचाना होता है न कि पत्नी के अधिकार या भरण-पोषण की अंतिम राशि का निर्धारण करना।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण एक अस्थायी और विवेकाधीन राहत है, जिसे बिना विस्तृत सुनवाई या साक्ष्य के आधार पर दिया जाता है। यह न तो पत्नी के अधिकारों का अंतिम फैसला है और न ही पति की आय में उसके किसी हिस्से को मान्यता देता है।अदालत ने...
Consumer Protection Act | RWA के खिलाफ निष्पादन कार्यवाही खारिज करने के NCDRC आदेश को चुनौती, दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस
दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें एक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ दायर निष्पादन कार्यवाही यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि वे मूल उपभोक्ता शिकायत के पक्षकार नहीं थे।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने 15.09.2025 को पारित NCDRC के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 67 के संदर्भ में उठाए गए विचारणीयता के प्रश्न को नोट...
मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना में फैमिली पेंशन की कटौती नहीं हो सकती: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि मृतक के आश्रितों को मिलने वाली फैमिली पेंशन को मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना के दौरान घटाया नहीं जा सकता।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैमिली पेंशन का दुर्घटना में हुई मृत्यु से मिलने वाले मुआवजे से कोई संबंध नहीं है और इसे निर्भरता हानि की गणना से बाहर रखा जाना चाहिए।जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के हेलेन सी. रेबेलो बनाम महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम मामले का हवाला देते हुए कहा,“फैमिली पेंशन भी कर्मचारी द्वारा अपनी सेवा शर्तों के...
कम उम्र का अंतर, सहमति के संकेत और अपील में देरी: POCSO में दोषी नाबालिग की सजा पर पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट की रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने POCSO Act के तहत दोषी ठहराए गए नाबालिग आरोपी की सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाई।हाइकोर्ट ने यह अहम टिप्पणी की कि मामले में आरोपी और पीड़िता दोनों ही नाबालिग थे उनके बीच उम्र का अंतर बहुत अधिक नहीं था और अपील की सुनवाई निकट भविष्य में होने की संभावना नहीं है।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर शामिल की डिवीजन बेंच ने कहा,“आरोपों के विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि यदि सहवास हुआ भी तो वह सहमति से था, ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी ने क्रूरता बरती हो, पीड़िता...
मजिस्ट्रेट सिर्फ़ ज़्यादा सज़ा के कारण केस को सेशंस कोर्ट में नहीं भेज सकता, उसे कारण बताने होंगे: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 323 के तहत मजिस्ट्रेट को जांच या ट्रायल के किसी भी स्टेज पर केस को सेशंस कोर्ट में भेजने का अधिकार है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे या सिर्फ़ अपराध के लिए तय सज़ा की गंभीरता के आधार पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को अपने सामने दर्ज सबूतों पर चर्चा करने के बाद कारणों के साथ एक राय बनानी होगी, ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि केस की सुनवाई सेशंस कोर्ट में होनी चाहिए।जस्टिस प्रवीण एस. पाटिल चीफ...
पुलिस भर्ती के लिए अपॉइंटमेंट लेटर, एप्लीकेशन से पहले रद्द हुई FIR की जानकारी न देने पर रद्द नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल की नियुक्ति रद्द करने का फैसला रद्द किया। उस कांस्टेबल की उम्मीदवारी इसलिए खत्म कर दी गई, क्योंकि उसने कथित तौर पर एक ऐसी FIR का खुलासा नहीं किया, जिसे एप्लीकेशन और अटेस्टेशन फॉर्म जमा करने से पहले ही ट्रायल कोर्ट ने रद्द किया।जस्टिस जगमोहन बंसल ने पंजाब पुलिस नियमों (जो हरियाणा पर भी लागू होते हैं) का हवाला देते हुए कहा,"ऐसा कोई सब-कॉलम नहीं है, जो उम्मीदवारों को पहले से रद्द हो चुकी FIR की स्थिति का खुलासा करने के लिए अनिवार्य करता हो।...
[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] 'ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट, 1958 की धारा 33A के तहत किसी दस्तावेज़ को ज़ब्त करने की शक्ति गंभीर कानूनी शक्ति है, जिसका नागरिक के संपत्ति अधिकारों पर सीधा नागरिक परिणाम होता है। इसलिए इसका प्रयोग केवल उसी "रजिस्ट्रिंग अधिकारी" द्वारा किया जा सकता है, जिसके सामने दस्तावेज़ पंजीकृत किया गया। कोर्ट ने कहा कि धारा 33A किसी अन्य राजस्व अधिकारी या सीनियर अधिकारी को केवल प्रशासनिक पदानुक्रम के आधार पर ऐसी शक्ति मानने की अनुमति नहीं देती है।जस्टिस अमित बोरकर रिट याचिका पर...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना संदर्भ के 'रामचरितमानस चौपाई' का हवाला देने वाले वकील को उसका मतलब समझाया, देरी से दायर याचिका खारिज की
हाल ही में दिए गए दिलचस्प आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने एक वकील के लिए 16वीं सदी के भारतीय कवि गोस्वामी तुलसीदास की अवधी भाषा में लिखी महाकाव्य 'श्री रामचरितमानस' की एक चौपाई का मतलब समझाया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने उस वकील को भी कड़ी फटकार लगाई, जिसने चौपाई के असली संदर्भ को समझे बिना उस पर भरोसा करने की कोशिश की थी।संक्षेप में मामलाअवनींद्र कुमार गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने राज्य सूचना आयोग (SIC) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी,...
केरल हाईकोर्ट ने दिया कुरान की शिक्षा देने वाले स्कूल को बंद करने का आदेश, कहा- 'RTE Act की मान्यता नहीं'
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक स्कूल को बंद करने का आदेश दिया, जो अपने स्टूडेंट्स को कुरान और उससे जुड़े विषय पढ़ा रहा था, क्योंकि यह राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन एक्ट, 2009 (RTE Act) की धारा 18 के अनुसार बिना वैध मान्यता के चल रहा था।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन दो संबंधित रिट याचिकाओं पर विचार कर रहे थे, जिनमें से एक दो व्यक्तियों ने दायर की। इन्होंने स्कूल के खिलाफ शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद असिस्टेंट एजुकेशनल ऑफिसर ने डिस्ट्रिक्ट एजुकेशनल ऑफिसर को रिपोर्ट भेजी, जिसमें पाया...


















![[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट [महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/05/12/500x300_599612-750x450472964-justice-amit-borkar.jpg)

