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संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों के आरोप अहम: तेलंगाना हाइकोर्ट ने उर्दू पत्रकार का पासपोर्ट रद्द करने का फैसला बरकरार रखा
संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों के आरोप अहम: तेलंगाना हाइकोर्ट ने उर्दू पत्रकार का पासपोर्ट रद्द करने का फैसला बरकरार रखा

तेलंगाना हाइकोर्ट ने उर्दू भाषा के पत्रकार द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए उनका पासपोर्ट रद्द किए जाने के फैसले को सही ठहराया।हाइकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट का नवीनीकरण कोई स्वचालित अधिकार नहीं है और जब किसी व्यक्ति की गतिविधियों को देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए प्रतिकूल बताया गया हो तो अदालत को अत्यंत सावधानी बरतनी होती है।जस्टिस नागेश भीमपाका ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्राकृतिक न्याय के...

विवाह या गर्भावस्था शिक्षा में बाधा नहीं बन सकती” : एमपी हाईकोर्ट ने छात्रा को उपस्थिति में छूट देने का कॉलेज को दिया निर्देश
"विवाह या गर्भावस्था शिक्षा में बाधा नहीं बन सकती” : एमपी हाईकोर्ट ने छात्रा को उपस्थिति में छूट देने का कॉलेज को दिया निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह और गर्भावस्था किसी महिला की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बन सकते। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया कि वे छात्राओं को मातृत्व/चाइल्ड केयर अवकाश, उपस्थिति में छूट और आवश्यक शैक्षणिक सहयोग प्रदान करें।मध्य प्रदेश हाईको की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल शामिल थे, ने कहा कि कार्यस्थलों पर उपलब्ध मातृत्व संरक्षण का लाभ शिक्षा प्राप्त कर रही महिलाओं को भी समान रूप से मिलना चाहिए।अदालत ने कहा—“पढ़ाई...

BREAKING| तीस हजारी कोर्ट में जज के सामने वकील पर हमला: CJI ने दिया कार्रवाई का भरोसा, बोले- गुंडा राज बर्दाश्त नहीं
BREAKING| तीस हजारी कोर्ट में जज के सामने वकील पर हमला: CJI ने दिया कार्रवाई का भरोसा, बोले- गुंडा राज बर्दाश्त नहीं

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के समक्ष यह आरोप लगाया कि पिछले शनिवार को कोर्ट रूम के भीतर जज की मौजूदगी में उस पर और एक आरोपी पर कथित तौर पर गुंडों ने हमला किया।वकील ने बताया कि वह एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज हरजीत सिंह पाल की अदालत में एक आरोपी की ओर से पेश हो रहा था। उसी दौरान शिकायतकर्ता के वकील के साथ कई लोग अदालत कक्ष में घुस आए और जज के सामने ही मारपीट शुरू कर दी।वकील के अनुसार हमलावरों ने कोर्ट रूम का दरवाजा...

अंतरिम भरण-पोषण से केवल तात्कालिक राहत, अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाइकोर्ट ने 40 हजार की अंतरिम राशि बढ़ाने से किया इनकार
अंतरिम भरण-पोषण से केवल तात्कालिक राहत, अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाइकोर्ट ने 40 हजार की अंतरिम राशि बढ़ाने से किया इनकार

राजस्थान हाइकोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य कार्यवाही के दौरान पीड़ित पक्ष को आर्थिक तंगी से बचाना होता है न कि पत्नी के अधिकार या भरण-पोषण की अंतिम राशि का निर्धारण करना।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण एक अस्थायी और विवेकाधीन राहत है, जिसे बिना विस्तृत सुनवाई या साक्ष्य के आधार पर दिया जाता है। यह न तो पत्नी के अधिकारों का अंतिम फैसला है और न ही पति की आय में उसके किसी हिस्से को मान्यता देता है।अदालत ने...

Consumer Protection Act | RWA के खिलाफ निष्पादन कार्यवाही खारिज करने के NCDRC आदेश को चुनौती, दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस
Consumer Protection Act | RWA के खिलाफ निष्पादन कार्यवाही खारिज करने के NCDRC आदेश को चुनौती, दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस

दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें एक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ दायर निष्पादन कार्यवाही यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि वे मूल उपभोक्ता शिकायत के पक्षकार नहीं थे।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने 15.09.2025 को पारित NCDRC के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 67 के संदर्भ में उठाए गए विचारणीयता के प्रश्न को नोट...

मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना में फैमिली पेंशन की कटौती नहीं हो सकती: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट
मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना में फैमिली पेंशन की कटौती नहीं हो सकती: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि मृतक के आश्रितों को मिलने वाली फैमिली पेंशन को मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना के दौरान घटाया नहीं जा सकता।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैमिली पेंशन का दुर्घटना में हुई मृत्यु से मिलने वाले मुआवजे से कोई संबंध नहीं है और इसे निर्भरता हानि की गणना से बाहर रखा जाना चाहिए।जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के हेलेन सी. रेबेलो बनाम महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम मामले का हवाला देते हुए कहा,“फैमिली पेंशन भी कर्मचारी द्वारा अपनी सेवा शर्तों के...

“संवैधानिक रूप से अनुचित” : सुप्रीम कोर्ट में याचिका, पश्चिम बंगाल SIR मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के व्यक्तिगत रूप से बहस करने पर उठाए सवाल
“संवैधानिक रूप से अनुचित” : सुप्रीम कोर्ट में याचिका, पश्चिम बंगाल SIR मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के व्यक्तिगत रूप से बहस करने पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर दलीलें देने को चुनौती दी गई है। पिछले सप्ताह ममता बनर्जी स्वयं सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित हुई थीं और उन्होंने SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर मौखिक दलीलें रखी थीं।यह हस्तक्षेप याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि इसका उद्देश्य अदालत की सहायता करना है,...

कम उम्र का अंतर, सहमति के संकेत और अपील में देरी: POCSO में दोषी नाबालिग की सजा पर पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट की रोक
कम उम्र का अंतर, सहमति के संकेत और अपील में देरी: POCSO में दोषी नाबालिग की सजा पर पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट की रोक

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने POCSO Act के तहत दोषी ठहराए गए नाबालिग आरोपी की सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाई।हाइकोर्ट ने यह अहम टिप्पणी की कि मामले में आरोपी और पीड़िता दोनों ही नाबालिग थे उनके बीच उम्र का अंतर बहुत अधिक नहीं था और अपील की सुनवाई निकट भविष्य में होने की संभावना नहीं है।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर शामिल की डिवीजन बेंच ने कहा,“आरोपों के विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि यदि सहवास हुआ भी तो वह सहमति से था, ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी ने क्रूरता बरती हो, पीड़िता...

मजिस्ट्रेट सिर्फ़ ज़्यादा सज़ा के कारण केस को सेशंस कोर्ट में नहीं भेज सकता, उसे कारण बताने होंगे: बॉम्बे हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट सिर्फ़ ज़्यादा सज़ा के कारण केस को सेशंस कोर्ट में नहीं भेज सकता, उसे कारण बताने होंगे: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 323 के तहत मजिस्ट्रेट को जांच या ट्रायल के किसी भी स्टेज पर केस को सेशंस कोर्ट में भेजने का अधिकार है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे या सिर्फ़ अपराध के लिए तय सज़ा की गंभीरता के आधार पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को अपने सामने दर्ज सबूतों पर चर्चा करने के बाद कारणों के साथ एक राय बनानी होगी, ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि केस की सुनवाई सेशंस कोर्ट में होनी चाहिए।जस्टिस प्रवीण एस. पाटिल चीफ...

पुलिस भर्ती के लिए अपॉइंटमेंट लेटर, एप्लीकेशन से पहले रद्द हुई FIR की जानकारी न देने पर रद्द नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पुलिस भर्ती के लिए अपॉइंटमेंट लेटर, एप्लीकेशन से पहले रद्द हुई FIR की जानकारी न देने पर रद्द नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल की नियुक्ति रद्द करने का फैसला रद्द किया। उस कांस्टेबल की उम्मीदवारी इसलिए खत्म कर दी गई, क्योंकि उसने कथित तौर पर एक ऐसी FIR का खुलासा नहीं किया, जिसे एप्लीकेशन और अटेस्टेशन फॉर्म जमा करने से पहले ही ट्रायल कोर्ट ने रद्द किया।जस्टिस जगमोहन बंसल ने पंजाब पुलिस नियमों (जो हरियाणा पर भी लागू होते हैं) का हवाला देते हुए कहा,"ऐसा कोई सब-कॉलम नहीं है, जो उम्मीदवारों को पहले से रद्द हो चुकी FIR की स्थिति का खुलासा करने के लिए अनिवार्य करता हो।...

[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] 'ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है': बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट, 1958 की धारा 33A के तहत किसी दस्तावेज़ को ज़ब्त करने की शक्ति गंभीर कानूनी शक्ति है, जिसका नागरिक के संपत्ति अधिकारों पर सीधा नागरिक परिणाम होता है। इसलिए इसका प्रयोग केवल उसी "रजिस्ट्रिंग अधिकारी" द्वारा किया जा सकता है, जिसके सामने दस्तावेज़ पंजीकृत किया गया। कोर्ट ने कहा कि धारा 33A किसी अन्य राजस्व अधिकारी या सीनियर अधिकारी को केवल प्रशासनिक पदानुक्रम के आधार पर ऐसी शक्ति मानने की अनुमति नहीं देती है।जस्टिस अमित बोरकर रिट याचिका पर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना संदर्भ के रामचरितमानस चौपाई का हवाला देने वाले वकील को उसका मतलब समझाया, देरी से दायर याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना संदर्भ के 'रामचरितमानस चौपाई' का हवाला देने वाले वकील को उसका मतलब समझाया, देरी से दायर याचिका खारिज की

हाल ही में दिए गए दिलचस्प आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने एक वकील के लिए 16वीं सदी के भारतीय कवि गोस्वामी तुलसीदास की अवधी भाषा में लिखी महाकाव्य 'श्री रामचरितमानस' की एक चौपाई का मतलब समझाया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने उस वकील को भी कड़ी फटकार लगाई, जिसने चौपाई के असली संदर्भ को समझे बिना उस पर भरोसा करने की कोशिश की थी।संक्षेप में मामलाअवनींद्र कुमार गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने राज्य सूचना आयोग (SIC) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी,...

केरल हाईकोर्ट ने दिया कुरान की शिक्षा देने वाले स्कूल को बंद करने का आदेश, कहा- RTE Act की मान्यता नहीं
केरल हाईकोर्ट ने दिया कुरान की शिक्षा देने वाले स्कूल को बंद करने का आदेश, कहा- 'RTE Act की मान्यता नहीं'

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक स्कूल को बंद करने का आदेश दिया, जो अपने स्टूडेंट्स को कुरान और उससे जुड़े विषय पढ़ा रहा था, क्योंकि यह राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन एक्ट, 2009 (RTE Act) की धारा 18 के अनुसार बिना वैध मान्यता के चल रहा था।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन दो संबंधित रिट याचिकाओं पर विचार कर रहे थे, जिनमें से एक दो व्यक्तियों ने दायर की। इन्होंने स्कूल के खिलाफ शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद असिस्टेंट एजुकेशनल ऑफिसर ने डिस्ट्रिक्ट एजुकेशनल ऑफिसर को रिपोर्ट भेजी, जिसमें पाया...

एक्टर विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, डीपफेक के दुरुपयोग पर लगाई रोक
एक्टर विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, डीपफेक के दुरुपयोग पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता एवं उद्यमी विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की रक्षा करते हुए उनके पक्ष में जॉन डो (अज्ञात व्यक्तियों) के विरुद्ध अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अभिनेता के हक़ में एक्स-पार्टी ऐड-इंटरिम डायनामिक इंजंक्शन जारी करते हुए कई प्रतिवादियों और अज्ञात डिजिटल इकाइयों को उनके नाम, छवि, आवाज़, हाव-भाव और अन्य विशिष्ट पहचान से जुड़े अधिकारों के दुरुपयोग से रोक दिया है।न्यायालय ने कहा कि विवेक ओबेरॉय ने प्रथम दृष्टया...

निरस्त Foreigners Act के तहत अपराध दर्ज करना प्रथम दृष्टया अवैध: फॉर्म-C दाख़िल करने में देरी पर दर्ज FIR को MP हाईकोर्ट ने किया रद्द
निरस्त Foreigners Act के तहत अपराध दर्ज करना 'प्रथम दृष्टया अवैध': फॉर्म-C दाख़िल करने में देरी पर दर्ज FIR को MP हाईकोर्ट ने किया रद्द

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक निजी मकान मालिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है, जिसमें उस पर किसी विदेशी नागरिक के ठहरने की जानकारी 24 घंटे के भीतर फॉर्म-C में न देने का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट है कि Foreigners Act, 1946 के निरस्त हो जाने के बाद उसके तहत किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, खासकर तब जब Immigration and Foreigners Act, 2025 लागू हो चुका है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि 1 सितंबर 2025 से 1946 का अधिनियम...

क्या कोई थर्ड पार्टी डिक्री के लिए Order IX Rule 13 CPC एप्लीकेशन फाइल कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
क्या कोई थर्ड पार्टी डिक्री के लिए Order IX Rule 13 CPC एप्लीकेशन फाइल कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल एक बड़ी बेंच को भेजा कि क्या सिविल डिक्री में कोई थर्ड पार्टी कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर, 1908 के ऑर्डर IX रूल 13 (Order IX Rule 13 CPC) के तहत एकतरफ़ा डिक्री को रद्द करने के लिए एप्लीकेशन दे सकती है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इस मुद्दे पर कोर्ट की पिछली बेंचों द्वारा दिए गए विरोधाभासी फैसलों पर ध्यान दिया।राज कुमार बनाम सरदारी लाल एंड अन्य (2004) के फैसले में कहा गया कि डिक्री में कोई थर्ड पार्टी ऐसी एप्लीकेशन दे सकती है, वहीं राम प्रकाश अग्रवाल...

क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत हुई शादियों को रजिस्टर करने के लिए राज्य अधिकारी बाध्य, राजस्थान 2009 का कानून कोई बाधा नहीं: हाईकोर्ट
क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत हुई शादियों को रजिस्टर करने के लिए राज्य अधिकारी बाध्य, राजस्थान 2009 का कानून कोई बाधा नहीं: हाईकोर्ट

पिछले हफ्ते दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 (ICM Act) के अनुसार हुई सभी ईसाई शादियों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करें, रिकॉर्ड करें और रजिस्टर करें, जिनके संबंध में एक्ट के तहत सर्टिफिकेट जारी किया गया।अपने विस्तृत आदेश में जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने ICM Act 1872 और राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2009 (RCMR Act) के बीच संबंधों को लेकर राज्य में फैली मौजूदा...