ऑनर किलिंग और अंतर जातीय विवाह में खाप पंचायत के दखल को रोकना जरूरी : एमिक्स राजू रामचंद्रन ने SC में दाखिल किए सुझाव [सुझाव पढ़ें]

इस नोट में ऐसे कुछ सुझाव हैं जिन पर इस माननीय न्यायालय द्वारा विचार किया जा सकता है (जब तक उचित कानून लागू नहीं किया जाता है), उदाहरण के तौर पर ऐसे हत्याओं की समस्या को हल करने की दृष्टि से, जो शायद कुछ खाप पंचायतों के इशारे, उकसावे  या प्रोत्साहन से होती हैं,” एमिक्स क्यूरी राजू रामचंद्रन 

  ” शक्ति वाहिनी ‘द्वारा दायर जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिक्स क्यूरी  वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने खाप पंचायतों के अंतर-जाति विवाहों में अनैतिक हस्तक्षेप की रोकथाम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुझाव दाखिल किए हैं और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच से से आग्रह किया है कि अगस्त 2012 में पेश 242 वीं कानून आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए केंद्र को निर्देश दिया जाए। उन्होंने इस खतरे से निपटने के लिए एक विशेष कड़े कानून का सुझाव दिया है।

दरअसल कानून आयोग के पैनल की रिपोर्ट ने “शादीशुदा या शादी करने की इच्छा रखने वाले युगल और उनके परिवार के सदस्यों की स्वतंत्रता को खतरे में डालने के काम” को रोकने के लिए एक कानून का प्रस्ताव किया था। उन्होंने कहा, “5 साल से अधिक हो चुके हैं जब कानून आयोग ने इसकी रिपोर्ट दी थी।”  इसके अलावा रामचंद्रन ने खाप पंचायत द्वारा जोड़े के उत्पीड़न के हर मामले में एसआईटी द्वारा त्वरित जांच का सुझाव दिया है और अपराधियों की गिरफ्तारी का भी सुझाव दिया है।

इसमें कहा गया है, “इस नोट में ऐसे कुछ सुझाव हैं जिन पर इस माननीय न्यायालय द्वारा विचार किया जा सकता है (जब तक उचित कानून लागू नहीं किया जाता है), उदाहरण के तौर पर ऐसे हत्याओं की समस्या को हल करने की दृष्टि से, जो शायद कुछ खाप पंचायतों के इशारे, उकसावे  या प्रोत्साहन से होती हैं।”

तीन प्रमुख सुझाव: 

  1. यदि किसीपुलिस अधिकारी या जिला प्रशासन के किसी भी अधिकारी को खाप पंचायत की किसी भी “प्रस्तावित” सभा के बारे में जानकारी मिलती है, तो वह तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों और क्षेत्र के प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक व  जिले के पुलिस अधीक्षक को जानकारी देगा। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक ऐसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिन्हें राज्य / जिले के संबंध में पहचाना गया है) खाप पंचायत के सदस्यों से मिलेंगे और बताएंगे कि ऐसी बैठक / सभा आयोजित नहीं हो सकती और ये अवैध सभा होगी। यदि इसमें कोई फैसला लिया गया है, जो किसी भी तरीके से दंपति या जोड़े के परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाएगा, तो पुलिस खाप पंचायत के सदस्यों के खिलाफ IPC की धारा  141 r/w 143 and 503 r/w 506 के तहत FIR दर्ज करेगी। 
  2. यदि खाप पंचायत के सदस्य बैठक में भाग लेते हैं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि इस तरह की सभा में दंपति या उनके परिवार को नुकसान की उचित आशंका हो सकती है  तो जिला मजिस्ट्रेट / उप-विभागीय मजिस्ट्रेट जिला / क्षेत्र या तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर या संज्ञान लेकरसीआरपीसी के तहत निवारक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे जिसमें सीआरपीसी की धारा 144  भी शामिल है। 
  3. यदि यह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को लगता है कि खाप पंचायत की बैठक को अन्यथा रोका नहीं जा सकता है और पुलिस अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि बैठक में कुछ निर्णय लेने की संभावना है जिसके परिणामस्वरूप जोड़ेऔर / या उनके परिवारोंको नुकसान हो सकता है तो  धारा 151 सीआरपीसी के तहत गिरफ्तार करने की शक्ति को लागू किया जा सकता है। 

राजू रामचंद्रन ने सुझाव दिया कि जब किसी विशेष क्षेत्र में कानून और व्यवस्था के प्रभारी के नोटिस में ये जानकारी आती है कि किसी खाप पंचायत ने अंतर-जाति या अंतर-धार्मिक विवाह के परिवार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किसी भी आदेश को पारित कर दिया है तो एसएचओ तुरंत एफआईआर दर्ज करने को बाध्य होगा।

    SP / DY SP को  यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्थानीय पुलिस स्टेशन ऐसे मामलों की त्वरित और प्रभावी जांच करें ताकि गैरकानूनी बैठक का आयोजन और अवैध अनुदेशों को पारित नहीं किया जा सके और जिम्मेदार व्यक्तियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए।

   उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में एक एसआईटी का गठन किया जा सकता है जहां यह पता चले कि खाप पंचायत ने एक दंपति या परिवार के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया है या एक सम्मान को लेकर हत्या हुई है, जो कि खाप पंचायत  के फैसले के चलते हुई है।

उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों की जांच पुलिस अधीक्षक की देखरेख में पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी  के नेतृत्व में होनी  चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जांच त्वरित और प्रभावी है और खाप की भूमिका पूरी तरह से जांच की गई है।

नीतीश कटारा मामले का हवाला

रामचंद्रन ने कोर्ट के सामने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ( उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के जज) अक्टूबर 2016 में नीतीश कटारा के मामले में दोषी विकास और विशाल की सजा का हवाला दिया जिसमें दोनों को  छूट के बिना 25 साल की कारावास की सजा सुनाई थी। नीतीश कटारा ऑनर किलिंग का मामला था।

रामचंद्रन ने न्यायालय को याद दिलाया कि कटारा मामले में बेंच ने कहा था: “उनकी (भारती यादव) व्यक्तिगत पसंद आत्म सम्मान है और उसमें एक गड़बड़ी पैदा करने से उसका सम्मान नष्ट हो रहा है।उसकी पसंद को समाप्त करके तथाकथित भाई या पिता के सम्मान या वर्ग सम्मान को लागू करना अत्यधिक क्रूरता का अपराध है और ये अधिक है, जब यह इस ढंग के तहत किया जाता है। यह मध्ययुगीन जुनूनी तर्कों के साथ ‘सम्मान’ की तुलना में एक निंदनीय और अप्रिय धारणा है।

 242 वीं कानून आयोग रिपोर्ट

 एमिक्स ने अदालत से आग्रह किया कि अगस्त 2012 में प्रस्तुत 242 वें कानून आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए केंद्र को निर्देश दिया जाए, जिसमें विशेष कानून का सुझाव दिया गया था।   रिपोर्ट में कहा गया कि “यह आवश्यक है कि इस तरह की शादी / विवाह का इरादा और युवा जोड़े के आचरण को अस्वीकार करने के उद्देश्य के लिए मण्डली या बैठक के खिलाफ पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए।” रिपोर्ट में जोडा गया कि   ऐसी मंडली को गैरकानूनी बैठक  के रूप में माना जाएगा और सामाजिक बहिष्कार या उत्पीड़न के लिए किसी भी आदेश को कारावास के साथ दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसा कहा गया था कि अपराध गैर-जमानती और गैर समझौता योग्य हो।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों के किसी भी हमले या एक वयस्क व्यक्ति और अंतर जाति विवाह के लिए चुनने वाली महिला के खिलाफ फैसले को “बिल्कुल अवैध” करार दिया।

 सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई पुरूष और महिला विवाह करता है, कोई खाप, पंचायत, व्यक्ति या समाज उनसे प्रश्न नहीं कर सकता। इसके बाद बेंच ने केंद्र से पूछा था कि रामचंद्रन द्वारा दिए गए सुझावों पर अंतर-जाति या अंतर-कबीले (गोत्र) से शादी करने के लिए परिवार के सम्मान के नाम पर युवा जोड़ों के उत्पीड़न और हत्या को रोकने के तरीके पर प्रतिक्रिया दे।

 

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