सीआईसी ने कहा सरकार व अॅथारिटी फैलाए जागरूकता,शादी के रजिस्ट्रेेशन के लिए जरूरी नहीं है आधार

केंद्रीय सूचना आयोग(सी.आई.सी) ने सरकार व विवाह पंजीकरण अधिकारी को निर्देश दिया है कि विभिन्न मीडिया के जरिए वह लोगों में जागरूकता फैलाए कि शादी का पंजीकरण करवाने के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं है।

इस मामले में दायर दूसरी अपील का निपटारा करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त प्रोफेसर एम.श्रीधर आचार्यूलू ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि स्पेशल मैरिट एक्ट के तहत आॅन लाइन एप्लीकेशन फार्म में भी जरूरी बदलाव करें।

इस मामले में अपील दायर करने वाले ने रिट पैटिशन नंबर 494/2012 न्यायमूर्ति के.एस पुतास्वामी बनाम केंद्र सरकार के मामले में दिए गए फैसले की काॅपी भी पेश की थी। इस मामले में न्यायमूर्ति जे.चेलमेश्वर व न्यायमूर्ति जे.बोबड़े की खंडपीठ ने अपने 23 सितम्बर 2013 के अंतरिम आदेश में कहा था कि किसी व्यक्ति को इस वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए कि उसके पास आधार कार्ड नहीं है,बेशक सरकारी अधिकारियों ने इस संबंध में सर्कुलर जारी करके कुछ सुविधाएं पाने के लिए आधार कोर्ड को जरूरी बताया हो।

उसने 24 मार्च 2015 के उस लैटर को भी पेश किया जिसमें एस.डी.एम हेडक्वार्टर-2 ने दिल्ली सरकार के रेवेन्यू विभाग के सभी डिप्टी कमीश्नर से कहा था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करके दिए गए किसी प्रशासनिक निर्देश का कोई मूल्य नहीं होगा।

उसने यह भी बताया कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह का पंजीकरण कराने के लिए आधार कार्ड को जरूरी बनाया गया है,इसी के आधार पर तीस दिन के नोटिस की रसीद दी जाती है। जब भी कोई शादी के लिए आॅनलाइन अप्लाई करता है तो अन्य आईडी प्रूफ के आधार पर अप्लाई नहीं कर पाता है।

आयोग ने कहा कि न्यायमूर्ति के.एस पुतास्वामी बनाम केंद्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार कार्ड न होने के कारण किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। आयोग ने कहा कि विवाह का जरूरी पंजीकरण होने से महिलाओं के अधिकारों संबंधित कई मामलों में सहायता मिलेगी,जिसमें बाल विवाह,विवाह की न्यूनतम उम्रसीमा,बिना सहमति के शादी या द्विविवाह आदि शामिल हैं। इसके अलावा महिला को अपने मैरिटल होम में रहने का अधिकार व गुजारा भत्ता आदि के मामलों में भी फायदा होगा। अगर विवाह के पंजीकरण को जरूरी बनाया गया है तो यह भी जरूरी है कि सरकार इस प्रक्रिया को आसान बनाए और इसके लिए उपयुक्त ढ़ांचा या सुविधाएं उपलब्ध कराए ताकि सभी का ठीक से पंजीकरण हो सके,इसके लिए अतिरिक्त मैरिज अधिकारी भी नियुक्त किए जाए।

आयोग ने इस मामले में दायर अपील का निपटारा करते हुए कई अनुशंसाए की है। आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के लैंडमार्क फैसले में कहा गया है कि सरकारी सुविधाओं का फायदा लेने के लिए आधार जरूरी नहीं है। इसलिए सरकार व सरकारी अधिकारी इस मामले में लोगों के बीच जागरूकता फैलाए ताकि लोगों को पता चल सकें कि शादी के पंजीकरण के लिए आधार जरूरी नहीं है। वहीं विवाह पंजीकरण के लिए आॅन लाइन अप्लीकेशन फार्म में भी जरूरी बदलाव किए जाए।

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