क्या वकील आवासीय परिसर का इस्तेमाल दफ्तर के रूप में कर सकते हैं?

क्या वकील आवासीय परिसर का इस्तेमाल दफ्तर के रूप में कर सकते हैं?

चूंकि एक वकील की सेवा विशिष्ट ज्ञान, कौशल और अनुभव पर आधारित होती है, जो बहुत ही व्यक्ति-विशेष है, इसलिए इसे एक 'पेशेवर सेवा' माना जाता है।

लीगल प्रोफेशन कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं है। बल्कि, ये एक ऐसी पेशेवर गतिविधि माना जाता है, जो बिजनेस, ट्रेड और कॉमर्स से अलग है।

सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के कई निर्णय हैं जो इस अंतर को स्पष्ट करते हैं। चूंकि एक वकील की सेवा विशिष्ट ज्ञान, कौशल और अनुभव पर आधारित होती है, जो बहुत ही व्यक्ति-विशेष है, इसलिए इसे एक 'पेशेवर सेवा' माना जाता है।

शशिधरन वी पीटर और करुणाकर AIR 1984 SC 1700 के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक वकील का कार्यालय 'व्यावसायिक प्रतिष्ठान' नहीं है, जिसे दुकान व प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत पंजीकरण की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस निष्कर्ष को सही ठहराने के लिए किसी मजबूत तर्क की आवश्यकता नहीं है कि एक वकील का कार्यालय या वकीलों की एक फर्म 'दुकान' नहीं है।

शिव नारायण और अन्य बनाम बनाम एमपी बिजली बोर्ड और अन्य AIR 1999 MP 246 के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के जजमेंट में कहा गया है कि वाणिज्यिक दर पर बिजली की खपत के भुगतान के लिए एडवोकेट का वर्गीकरण "वाणिज्यिक" शीर्षक के तहत करना मनमाना और तर्कहीन और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के ‌अधिकारों से परे है।

"…पेशेवर गतिविधि के मामले में किसी व्यक्ति को ‌कॉम‌‌‌र्स‌ियल या व्यावसायिक गतिविधि के लिए, जहां सामानों की बिक्री या लाभ के मंतव्य से नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच सक्रिय सहयोग से लेनदेन किया जाता है, में अपने पेशेवर कौशल का इस्तेमाल करना पड़ता है। प्रोफेशन के मामले में, व्यक्ति आजीविका के लिए काम करता है, न कि केवल लाभ के उद्देश्य के लिए ", पेशे और वाणिज्य के बीच के अंतर को समझाते मध्य प्रदेश्‍ उच्च न्यायालय ने ये टिप्‍पणी की थी।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह अपील की गई थी। बिजली बोर्ड ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद बनाम सोहन लाल सचदेव (मृत) प्रतिनिधित्व श्रीमती हिरिंदर सचदेव द्वारा (2002) 2 एससीसी 494 पर भरोसा किया था। उस फैसले में कहा गया था कि गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली एक इमारत व्यावसायिक प्रतिष्ठान है, ये देखते हुए कि यदि उसका उपयोग घरेलू नहीं है तो ये वाणिज्यिक है।

जस्टिस अरिजीत पसायत और एचके सेमा की डिवीजन बेंच ने अधिवक्ताओं के कार्यालय पर घरेलू बिजली दर लागू करने के संबंध में मध्या प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को मंजूरी दे दी थी।

"एक पेशेवर गतिविधि एक व्यक्ति द्वारा अपने व्यक्तिगत कौशल और बुद्धिमत्ता द्वारा की जाने वाली गतिविधि होनी चाहिए। इसलिए एक पेशेवर गतिविधि और एक वाणिज्यिक गतिविध‌ि के बीच एक मौलिक अंतर है।" बेंच ने कहा था।

हालांकि, डिवीजन बेंच ने हिरिंदर सचदेव के मामले में में की गई टिप्पणी कि सभी गैर-घरेलू गतिविधियां वाणिज्यिक हैं, पर संशय व्यक्त किया और इस मामले को विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा दिया।

2000 के सिविल अपील नंबर 1065 में दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ ने दिनांक 27 अक्टूबर 2005 को कहा कि ये मुद्दा कि क्या अधिवक्ता एक वाणिज्यिक गतिविधि चला रहा था, हिरिंदर सचदेव के फैसले से संबंधित नहीं था। उसने हिरिंदर सचदेव के फैसले का सही माना, क्योंकि वहां अंतर वैधानिक परिभाषा पर आधारित था। बड़ी पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वो इस सवाल में नहीं गया कि क्या एक वकील को वाणिज्यिक गतिविधि जारी रखने के लिए कहा जा सकता है?

तो, इस प्रकार मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले कि वकालत वाणिज्यिक गतिविधि नहीं है, पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी।

राजस्थान हाइकोर्ट की जयपुर खंडपीठ ने जेवीवीएन लिमिटेड और अन्य बनाम श्रीमती परिणीति जैन और अन्य एआईआर 2009 राजस्थान 110 के मामले में कहा था कि अपने निवास से कार्यालय चलाने वाले वकील से व्यावसायिक आधार पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकता है। हालांकि, कार्यालय अगर एक स्वतंत्र वाणिज्यिक स्थान पर चलाया जाता है तो अधिवक्ता को वाणिज्यिक शुल्क से छूट नहीं दी जा सकती है। यहां निवास स्‍थान में कार्यालय और व्यावसायिक स्थान पर कार्यालय के बीच अंतर किया गया है। मद्रास हाइकोर्ट ने कानागासबाई बनाम अधीक्षण अभियंता के मामले में इसी का अनुकरण किया।

अधिवक्ताओं के कार्यालय पर 'व्यावसायिक भवन' के रूप में संपत्ति कर नहीं

दिल्ली हाइकोर्ट ने बीएन मैगॉन बनाम दक्षिण दिल्ली नगर निगम के मामले में कहा कि कार्यालय चलाने के लिए एक वकील द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला आवासीय परिसर संपत्ति कर के प्रयोजनों के लिए 'व्यावसायिक भवन' नहीं बन जाएगा। कोर्ट ने ये ध्यान में रखकर कहा था कि दिल्ली मास्टर प्लान 2021 में वकीलों, डॉक्टरों, चार्टर्ड एकाउंटेंट, आर्किटेक्ट्स आदि को व्यावसायिक गतिविधियों चलाने के ‌लिए आवासीय परिसर के उपयोग की अनुमति दी है, शर्त ये है कि पेशेवर स्थान क्षेत्र के लिए अनुमेय एफएआर से 50% से अधिक नहीं होना चाहिए।

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन पंचकूला बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा AIR 2015 P&H 13 मामले में, पंजाब एंड हरियाणा डिवीजन बेंच ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के नियमों को रद्द कर दिया था, जिसने अपने द्वारा आवंटित आवासीय परिसर का उपयोग करने एडवोकट ऑफिस के रूप करने के लिए शुल्क निर्धारित किया था। प्राधिकरण ने आवासीय उपयोग को वाणिज्यिक में बदलने के लिए यह फैसला ‌लिया था।

HUDA विनियमन ऐसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निर्मित क्षेत्र के 25% के उपयोग की अनुमति दी थी। हालांकि, प्राधिकरण ने आवासीय परिसर के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देने के लिए शुल्क लगाया, जिसे उच्च न्यायालय रद्द कर दिया।

"हमने हुडा की ओर से पेश विद्वान वरिष्ठ वकील से एक प्रश्न पूछा है कि यदि एक प्रसिद्ध लेखक एक अध्ययन कक्ष बनाता, जिसे वो एक किताब लिखने के लिए उपयोग करता है और ये उसकी कमाई का स्रोत है, तो क्या इसे गैर-आवासीय उपयोग कहा जा सकता है? इस सवाल का वास्तव में कोई संतोषजनक उत्तर नहीं है क्योंकि वकालत के व्यक्तिगत पेशे की गतिविधि भी उन पुस्तकों और कागजात के अध्ययन पर आधारित है, जिसके लिए वह जगह का उपयोग करता है। यह एक महान पेशा है, इसलिए इस संदर्भ में इसे कॉमर्स या बिजनेस न माना जाए।",जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये टिप्‍पणी की।

बेंच ने कहा कि एक वकील के कानूनी पेशे की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए हुडा विनियमों में निर्धारित सीमित स्थान के उपयोग की शर्त किसी पेशे के चरित्र या गतिविधि को वाणिज्यिक में नहीं बदल सकता है।

जब केरल राज्य आवास बोर्ड के आवंटियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए केरल हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई, जो अपने आवासीय परिसर का उपयोग वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए कर रहे थे, तो उसने अधिवक्ताओं के कार्यालयों के खिलाफ आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, हालांकि कई अन्य लोगों के खिलाफ निर्देश जारी किए गए थे जो उनका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर रहे थे। अदालत ने कहा कि एक वकील द्वारा योजना के तहत प्राप्त अपने आवास में कार्यालय चलाना वाणिज्यिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता है।

कोर्ट ने कहा, "…एक अपार्टमेंट में प्रोफेशनल द्वारा निवास के साथ कार्यालया चलाने को वाणिज्यिक गतिव‌िधि नहीं कहा जा सकता है।"

स्थानीय कानूनों द्वारा प्रतिबंध

भवन अधिभोग के संबंध में कई स्थानीय कानून उस स्थान पर प्रतिबंध लगाते हैं, आवासीय परिसर में जिसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधि के लिए किया जा सकता है। मैगनन बी मामले में निर्दिष्ट दिल्ली मास्टर प्लान में आवासीय स्थान के एफएआर के 50% के भीतर पेशेवर गतिविधि की अनुमति दी गई ‌थी।

हुडा विनियमन के मामले में, यह निर्मित स्थान का 25% था। केरल म्युनिसिपल बिल्डिंग रूल्स में कहा गया है कि अधिवक्ताओं, डॉक्टरों, आर्किटेक्ट्स आदि के लिए छोटे व्यावसायिक स्थान, जो 50 वर्ग मीटर के फर्श क्षेत्र से अधिक न हो और मुख्य आवासीय अधिभोग के हिस्से के रूप में उपयोग किए जाते हों, वे 'आवासीय भवनों' के समूह में शामिल हैं। ये नियम स्थानीय कानूनों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।

दिल्ली के संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रदेश नागरिक परिषद बनाम भारत संघ (2006) 6 एससीसी 305 के मामले में आदेश दिया कि आर्किटेक्ट, चार्टर्ड एकाउंटेंटों, डॉक्टरों और वकीलों द्वारा भी आवासीय परिसर में 50% से अधिक अनुमेय स्‍थान व्यावसायिक गतिविधियों को नहीं चलाया जा सकता है और उस आवासीय परिसर में ऐसे व्यक्ति द्वारा व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकती, जो उस परिसर का न‌िवासी नहीं है।

अंत में, अधिवक्ताओं के कार्यालय को आवासीय परिसरों से संचालित किया जा सकता है, क्योंकि इसे व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जाता है। हालांकि, यह स्थानीय कानूनों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के अधीन है।