NI अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोपी और उसके गवाह हलफ़नामा दायर कर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

NI अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोपी और उसके गवाह हलफ़नामा दायर कर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि Negotiable Instruments Act के तहत दायर मामलों में गवाहों की तरह ही, आरोपी भी धारा 145 के तहत हलफ़नामा दायर कर गवाही दे सकता है।

न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला ने कहा, "आरोपी की ओर से दी गई गवाही में सीआरपीसी की धारा 315 के तहत आरोपी भी शामिल हो सकता है। अगर गवाह अपना साक्ष्य NI अधिनियम की धारा 145 के तहत हलफ़नामे के रूप में देता है, तो आरोपी की गवाही भी हलफ़नामे के रूप में हो सकती है।

कोर्ट ने यह बात राकेशभाई मगनभाई बरोत नामक एक व्यक्ति की याचिका पर कही। बरोत ने गत वर्ष मार्च में पारित आदेश को चुनौती दी थी जिसमें हलफ़नामे के रूप में अपने और गवाहों के साक्ष्य प्रस्तुत करने के आवेदन को ख़ारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता पर धारा 138 के तहत आरोप लगाया गया था।

हाईकोर्ट निचली अदालत के से सहमत नहीं हुआ और इस दलील को ख़ारिज कर दिया कि इस अधिनयम की धारा 145 आरोपी को शामिल नहीं करता और सिर्फ़ शिकायतकर्ता और उसके गवाहों को ही हलफ़नामा दायर कर गवाही देने का अधिकार है।

अदालत ने यह भी कहा कि धारा 145(2) में हलफ़नामे के द्वारा शिकायतकर्ता और आरोपी के गवाही देने का प्रावधान है। इसके बाद उसने यह भी कहा कि आरोपी ख़ुद को गवाह के रूप में जाँच कर सकता है और इसलिए उसको साक्ष्य हलफ़नामा दायर करने की अनुमति दी जाएगी।

इसके अलावा कोर्ट ने ग़ौर करते हुए कहा कि कोर्ट ने कहा कि इस प्रश्न का जवाब एकल जज द्वारा Afzal Pasha v. Mohamed Ameerjan मामले में दे दिया गया है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फ़ैसले से सहमति जताते हुए कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया और संबंधित आदेश को रद्द कर दिया।