NI अधिनियम की धारा 138: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निदेशक के ख़िलाफ़ शिकायत पर तब तक सुनवाई नहीं जब तक कम्पनी को आरोपी नहीं बनाया जाता

NI अधिनियम की धारा 138: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निदेशक के ख़िलाफ़ शिकायत पर तब तक सुनवाई नहीं जब तक कम्पनी को आरोपी नहीं बनाया जाता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कंपनी के निदेशक के ख़िलाफ़ चेक बाउंस की शिकायत पर तब तक सुनवाई नहीं हो सकती जब तक कि उस कम्पनी के ख़िलाफ़ शिकायत नहीं दर्ज की जाती।

, की पीठ ने हाईकोर्ट के उस आदेश को भी ख़ारिज कर दिया जिसके तहत एक आरोपी की सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका को निरस्त कर दिया गया था।

पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता ने निदेशक के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी जबकि कम्पनी के ख़िलाफ़ शिकायत नहीं दर्ज कराई थी। पीठ ने आगे कहा कि आरोपी ने यह चेक निजी रूप में नहीं दिया था बल्कि लक्ष्मी सीमेंट एंड सिरेमिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड नामक कंपनी के निदेशक के रूप में जारी किया था।

पीठ ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने से पहले कुछ शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है। पीठ ने कहा ये शर्तें हैं : चेक को जारी करने के छह माह के भीतर बैंक में पेश किया जाए; चेक के बाउंस होने की सूचना बैंक से मिलने की तिथि के 30 दिनों के भीतर लिखित में इसकी शिकायत चेक जारी करने वाले से की जाए; और अगर चेक जारी करने वाला व्यक्ति नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर आवश्यक राशि नहीं चुकाता है।"

पीठ ने इस मामले में निगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट ऐक्ट की धारा 141 के तहत दूसर मामलों में आए फ़ैसलों का भी ज़िक्र किया।

यद्यपि कोर्ट ने इस शिकायत को ख़ारिज कर दिया पर कहा कि आरोपी ने कोर्ट में (उसके पूर्व आदेश के तहत) जो पैसे (₹4,15,000) जमा कराए हैं उसे शिकायतकर्ता को भुगतान कर दिया जाएगा।

चूँकि शिकायतकर्ता इस मामले में नोटिस दिए जाने के बाद भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ है, कोर्ट ने रेजिस्ट्री को आदेश दिया की वह उसे कोर्ट के इस आदेश के बारे में बता दे।