सीआरपीसी की धारा 482 : हाईकोर्ट को कारण बताना चाहिए क्यों याचिका स्वीकार की गई या खारिज की गई-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सीआरपीसी की धारा 482 : हाईकोर्ट को कारण बताना चाहिए क्यों याचिका स्वीकार की गई या खारिज की गई-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

समय-समय पर इस कोर्ट ने निष्कर्ष के समर्थन में कारण बताने की आवश्यकता पर बल दिया है क्योंकि यह कारण ही है,जो दिमाग लगाए जाने को इंगित करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से स्पष्ट कर दिया है कि हाईकोर्ट के लिए यह कारण बताना अनिवार्य है कि आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता यानि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका को स्वीकार या अस्वीकार क्यों किया गया है।

जस्टिस अभय मनोहर सपरे व जस्टिस दिनेश महेश्वरी की पीठ ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है,जिसमें एफआईआर को समाप्त करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। मामले को फिर से हाईकोर्ट के पास वापिस भेजते हुए पीठ ने कहा है िकइस पर नए सिरे से विचार किया जाए।
मामले को उच्च न्यायालय के पास फिर से भेजने की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि लगाए गए आदेश को देखने के बाद,हमने पाया हैं कि पैरा नंबर एक से चार में मामले के तथ्य शामिल है। पैरा नंबर पांच व छह में पक्षकारों के वकीलों की तरफ से दी गई दलीलें शामिल है। पैरा नंबर सात से नौ में निचली अदालत में चल रहे मामले का हवाला दिया है।पैरा नंबर दस व ग्यारह में इस कोर्ट के दो फैसलों के उद्धरण है और पैरा बारह में निष्कर्ष बताया गया है।
उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि,लगाए गए आदेश में न तो कोई चर्चा या विचार-विमर्श है और न ही वकील द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरण या दलीलों पर कोई तर्क या विचार। पीठ ने कहा कि-
''समय-समय पर इस कोर्ट ने निष्कर्ष के समर्थन में कारण बताने की आवश्यकता पर बल दिया है क्योंकि यह कारण ही है,जो दिमाग लगाए जाने को इंगित करता है। इसलिए,हाईकोर्ट के लिए यह अनिवार्य है कि वह बताए कि याचिका को क्यों स्वीकार या अस्वीकार किया गया है,जैसा भी मामला हो सकता है।''