अगर पत्नी अपने पति के रिश्तेदारों के व्यवहार से ख़ुश नहीं है तो उसका अलग रहना और गुज़ारा ख़र्च माँगना जायज़ है : बॉम्बे हाईकोर्ट

अगर पत्नी अपने पति के रिश्तेदारों के व्यवहार से ख़ुश नहीं है तो उसका अलग रहना और गुज़ारा ख़र्च माँगना जायज़ है : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी पति के मां-बाप के व्यवहार से ख़ुश नहीं है और उनके साथ रहने में असुविधा महसूस कर रही है तो उसका अलग रहना और इस पर आने वाले ख़र्च की माँग करना जायज़ है।

न्यायमूर्ति वीके जाधव ने एक पति की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें उसने फ़ैमिली कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी थी। फ़ैमिली कोर्ट ने उसकी शादी के अधिकारों की बहाली की माँग संबंधी याचिका ख़ारिज कर दी थी और उसको अपनी पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया था।

पति के वक़ील ने हाईकोर्ट में कहा कि इस मामले में पति-पत्नी के बीच संबंध मधुर हैं और इसलिए पत्नी के घर से अलग रहने और गुज़ारा भत्ते के माँग का कोई कारण नहीं है। उसने यह भी कहा कि पति अपने बूढ़े माँ-बाप को छोड़कर घर से दूर नहीं रह सकता।

कोर्ट ने पत्नी की दलील पर भी ग़ौर किया जिसने कहा कि उसे अपने पति से कोई शिकायत नहीं है पर उसके रिश्तेदार उसे परेशान कर रहे हैं। इन दलीलों पर ग़ौर करते हुए न्यायमूर्ति जाधव ने कहा कि पत्नी की इच्छाओं को भी महत्त्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,

"हमारे समाज में पति की इच्छाओं को महत्त्व दिया जाता है। अगर पत्नी को अपने रिश्तेदारों के साथ रहने में असुविधा हो रही है इसके बावजूद उसे अपने पति की मर्ज़ी माननी पड़ती है और अपने पति की इच्छाओं का आदर करते हुए उसके मां-बाप के साथ रहना पड़ता है। हालाँकि, जीवन शैली के बदलते परिदृश्य और एकल परिवार की विकसित होती परिकल्पना को देखते हुए, पत्नी की इच्छाओं को भी महत्त्व देने की ज़रूरत है। अगर पत्नी को पति के मां-बाप के व्यवहार के कारण उनके साथ रहने में परेशानी हो रही है मुश्किल हो रही और वह इस वजह से अपने माँ-बाप के साथ रह रही है, तो मेरे विचार में पत्नी का ऐसा करना उचित है और उसका गुज़ारा भत्ते की माँग करना सही है।"

ऐसा कहते हुए कोर्ट ने पति की याचिका ख़ारिज कर दी।