अवमानना के मामले में कोर्ट को उस आदेश की चारदिवारी में रहना होगा जिसकी अवज्ञा हुई है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

अवमानना के मामले में कोर्ट को उस आदेश की चारदिवारी में रहना होगा जिसकी अवज्ञा हुई है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवमानना के ख़िलाफ़ अपने न्यायाधिकार का प्रयोग करते हुए कोर्ट को उस आदेश की चारदिवारी में ही रहना है जिसकी 'अवज्ञा' हुई है।

न्यायमूर्ति आर बनुमती और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने Er. K. Arumugam vs. V. Balakrishnan में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई के दौरान यह कहा। आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने जिस आदेश की अवज्ञा हुई उसके बाहर जाकर यह आदेश दिया।

बालाकृष्णन ने अपनी याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट ने एक आदेश में ज़िला कलक्टर को यह सुनिश्चित करने को कहा कि उसे उचित और ठीकठाक मुआवज़ा दिलाए। ज़िला कलक्टर ने उसे ₹200 प्रति वर्ग फुट के हिसाब से मुआवज़ा दिए जाने का आदेश दिया। इस आदेश के लंबित रहने के दौरान कलक्टर ने एक और आदेश जारी किया जिसमें मुआवज़े को बदलकर ₹500 प्रति वर्ग फुट कर दिया। हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का निस्तारन करते हुए मुआवज़े की राशि को बदलकर ₹600 प्रति वर्ग फुट कर दिया।

"अवमानना के न्यायिक क्षेत्राधिकार में कोर्ट को ख़ुद को उस आदेश की चारदिवारी के भीतर ही सीमित रखना चाहिए जिसका उल्लंघन हुआ है," पीठ ने कहा और उसने हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। इस बारे में पीठ ने Sudhir Vasudeva v. M. George Ravishekaran मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का भी हवाला दिया।

पीठ ने कहा कि TWAD बोर्ड को ₹600 प्रति वर्ग फुट का मुआवज़ा देने का आदेश देना ग़लत था जिसके हिसाब से उसे ₹4, 00, 00,000 से अधिक की राशि देनी होगी। यह सार्वजनिक पैसा है और इस राशि का सरकारी ख़ज़ाने पर असर पड़ेगा। किसी निजी व्यक्ति को सरकारी राशि को इस तरह हड़पने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने अपील स्वीकार कर लिया।