नाबालिग़ का स्वेच्छा से आरोपी के साथ होना ज़मानत मिलने को आसान करनेवाला है : गुजरात हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

नाबालिग़ का स्वेच्छा से आरोपी के साथ होना ज़मानत मिलने को आसान करनेवाला है : गुजरात हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को एक व्यक्ति को ज़मानत दे दी जिस पर 17 साल की एक लड़की का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है।

ऐसा करते हुए न्यायमूर्ति एसएच वोरा ने कहा कि आरोपी और नाबालिग़ लड़की के बीच प्रेम संबंध है और यह लड़की अपनी इच्छा से इस आरोपी के साथ गई।

"बार ने जो दलील दी है और एपीपी ने जो चार्जशीट के दस्तावेज़ पेश किए हैं और भाविकबेन के दर्ज बयान के अनुसार ऐसा लगता है कि आरोपी याचिकाकर्ता और लड़की के बीचक प्रेम संबंध है।

इसमें संदेह नहीं कि पीड़ित लड़की आरोपी के साथ अपनी इच्छा से गई और इस तरह से ये तथ्य अपराध को कम करने वाले तथ्य हैं और निचली अदालत को इस पर ग़ौर करते हुए ज़मानत याचिका पर विचार करना चाहिए था और इसलिए इसे देखते हुए वर्तमान अपील पर ग़ौर करने की ज़रूरत है", यह कहते हुए कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता को ज़मानत दी जाती है।

एक व्यक्ति सिकंदर अबुलहसन अंसारी ने कोर्ट में ज़मानत के लिए अपील की थी जिस पर यौन अपराध बाल संरक्षण अधिनिय (POCSO), 2012 में आईपीसी की धारा 363, 366 और 376 और धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

इस व्यक्ति ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न से बचाव) अधिनियम, 1989 की धारा 14-A के तहत अपने ज़मानत याचिका को विशेष पोकसो जज द्वारा रद्द किए जाने के ख़िलाफ़ आवेदन किया। कोर्ट को बताया गया कि आरोपी और लड़की के बीच प्रेम संबंध है और लड़की अपनी मर्ज़ी से आरोपी के साथ गई थी।

राज्य ने अपनी दलील में कहा था कि इस मामले में सहमति का मामला इसलिए नहीं उठता है क्योंकि लड़की बालिग़ नहीं है और वह सिर्फ़ 17 साल की है और जिस समय यह घटना हुई वह सिर्फ़ नाबालिग़ थी।

कोर्ट ने हालाँकि, कहा कि इस अपील पर ग़ौर करना ज़रूरी है और ज़मानत नहीं दिए जाने के आदेश को ख़ारिज कर दिया। कोर्ट ने आरोपी को ₹10 हज़ार का बॉंड भरने को कहा और उसे ज़मानत दे दी।