अगर शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुआ है तो अंग्रेज़ी निजी क़ानून के तहत राहत का दावा नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

अगर शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुआ है तो अंग्रेज़ी निजी क़ानून के तहत राहत का दावा नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में यूके में भारतीय मूल के एक व्यक्ति को मैनचेस्टर के एक फ़ैमिली अदालत में चल रहे तलाक़ के मामले को जारी रखने से मना करदिया और कहा कि अगर कोई शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत है तो राहत अंग्रेज़ी निजी क़ानून के तहत नहीं माँगी जा सकती।

न्यायमूर्ति आरडी धानुका अरुणिमा टाकीयर की याचिका पर यह निर्णय दिया। अरुणिमा ने अपने पति नवीन टाकीयर की यूके की अदालत में दायर तलाक़ की अर्ज़ी पर रोकआदेश की माँग की है।

पृष्ठभूमि

वादी के अनुसार, अरुणिमा की शादी हिंदू रीति से बॉम्बे में दिसंबर 12, 2012 को हुई और यह शादी मीरा भायंदर नगरनिगम में पंजीकृत हुई। अरुणिमा का पति अपने पूर्वशादी से हुई बेटियों के साथ दिसम्बर 17, 2012 को यूके चला गया और अरुणिमा मुंबई में ही रह गई। पर वह जुलाई 2013 में यूके पहुँची और उसी समय से उसके पति नेउसके साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया और झगड़े होने लगे। अरुणिमा को उसने भारत आने के लिए बाध्य किया गया।

नवंबर 2013 में उसको यूके में नौकरी मिली पर उसे यूके में उसे प्रवेश करने की इजाज़त नहीं दी गई और उसे वापस भारत भेज दिया गया।

फ़ैसला

दोनों ही पक्षों की दलील सुनने के बाद और हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति धानुका ने कहा -

"…प्रतिवादी ने यूके की अदालत में तलाक़ की अर्ज़ी दी है और वादी को कोई भी गुज़ारा भत्ता नहीं दिया गया है…जब वादी यूके गई तो प्रतिवादी ने यूके की पुलिस की मददसे उसे वापस भारत भिजवा दिया…इस मामले को नियमित मामला नहीं माना जा सकता है जैसा कि प्रतिवादी ने कहा है।"

कोर्ट ने आगे कहा -

"अदालत का मानना है कि प्रतिवादी ने वादी के ख़िलाफ़ यूके की अदालत से हिंदू विवाह अधिनियम के तहत इंग्लिश पर्सनल लॉ के अनुरूप राहत की माँग की है जबकि वादीऔर प्रतिवादी की शादी इस क़ानून के तहत नहीं हुई है।"

इसलिए कोर्ट वादी की याचिका स्वीकार करता है।