बीमा कंपनियाँ पॉलिसी की शर्तों को एकतरफ़ा कार्रवाई कर बदल नहीं सकतीं और कवरेज को कम नहीं कर सकतीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

बीमा कंपनियाँ पॉलिसी की शर्तों को एकतरफ़ा कार्रवाई कर बदल नहीं सकतीं और कवरेज को कम नहीं कर सकतीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी बीमा कंपनियाँ मनमाना ढंग से काम नहीं कर सकती और उसने न्यू इंडिया एश्योरेंश कंपनी लिमिटेड के उस क़दम को निरस्त कर दिया जिसके तहत उसने पॉलिसी की शर्तों को समाप्त कर कवरजे को घटा दिया था।

यह मामला Twenty First Century Media Pvt Ltd को बेची गई बीमा योजना का है। यह एक खेल विपणन और प्रबंधन कंपनी है और यह बीमा बाढ़, बारिश आदि के कारण क्रिकेट मैच के रद्द होने से बचाव के लिए है।

अक्टूबर 17, 2010 में कोच्चि में खेला जाने वाला एक मैच बारिश के कारण रद्द हुआ और कंपनी ने इसकी भरपाई के लिए बीमा कंपनी को अपना दावा भेजा।

कंपनी इस तरह का दावा आगे जाकर भी कर सकती है, बीमाकर्ता कंपनी ने अक्टूबर 18, 2010 को 'बाढ़, बारिश आदि' जैसी बातों को ख़ुद ही हटा दिया।

कंपनी ने इसका विरोध किया और जब गोवा में अक्टूबर 25, 2010 होने वाला मैच रद्द हुआ तो कंपनी ने अपना दावा बीमा कंपनी से किया। पर बीमाकर्ता ने इस दावे को मानने से माना कर दिया और कहा कि ये शर्तें अब हटा दी गई हैं। कोच्चि का दावा 2011 में निपटाया गया।

ऐसा कहे जाने पर कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की पर हाईकोर्ट ने उसकी याचिका ख़ारिज कर दी यह कहते हुए कि यह क़रार का मामला है जिसमें तथ्यों के ऊपर विवाद है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह विवाद तथ्यों को लेकर नहीं है और कंपनी ने एकतरफ़ा कार्रवाई की है जो कि मनमाना है। न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने कहा,

प्रतिवादी की कार्रवाई निर्विवाद रूप से मनमाना है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत अपीलकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है…क़रार के संदर्भ में भी, राज्य अनुच्छेद 12 के तहत मनमाने तरीक़े से कार्रवाई नहीं कर सकता है।

इस तरह, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया और बीमा कंपनी को गोवा मैच के राड होने के कंपनी के दावे का भुगतान करने का आदेश दिया।