प्राचीन समाज स्वतंत्रता और समानता को तवज्जो देता था, अब लोग रूढ़िवादी विचारों से प्रभावित हो रहे हैं : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

प्राचीन समाज स्वतंत्रता और समानता को तवज्जो देता था, अब लोग रूढ़िवादी विचारों से प्रभावित हो रहे हैं : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

हमारे प्राचीन समाज ने स्वतंत्रता और समानता जैसे आदर्शों का प्रतिपादन किया था, जबकि हज़ारों सालों से चली आ रही दासप्रथा के कारण बाद में इस देश में जातिवाद जैसी कुरीतियाँ पैदा हुईं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राज शेखर अत्री ने पुलिस का संरक्षण प्राप्त करने सम्बंधी याचिका को निपटाते हुए यह बात कही।

इस तरह के एक मामले में, एक युवती ने हाईकोर्ट में आवेदन कर अपने रिश्तेदारों से स्वयं के बचाव हेतु पुलिस सुरक्षा की मांग करी थी। दरअसल उस युवती ने एक दूसरी जाति के युवक से शादी की है। "इस कोर्ट की राय में, याचिकाकर्ताओं को अपने जान, अपने शरीर और अपनी आज़ादी के बचाव के लिए सुरक्षा माँगने का पूरा अधिकार है…हालाँकि दोनों ही यह दावा करते हैं कि वे क़ानूनी रूप से शादीशुदा हैं पर उनकी शादी की वैधता इस कोर्ट के लिए कोई मुद्दा नहीं है", कोर्ट ने कहा।

कोर्ट ने आगे कहा कि संवैधानिक दर्शन, जाति, पंथ, धर्म, रिहाईश आदि के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को नहीं मानता है। "उसने समानता और स्वतंत्रता का प्रतिपादन किया है। पर संविधान के लागू होने के 68 साल बीत जाने के बाद भी नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण नागरिकों पर रूढ़िवाद हावी है और वे परंपरागत समाज में विश्वास करते हैं। यह सामाजिक न्याय और समानता को प्रभावित करता है", कोर्ट ने कहा।

इसके बाद कोर्ट ने प्रदीप कुमार सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले में दिए फ़ैसले का दुबारा ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया था -

इस तरह की धमकी मिलने की स्थिति में उस इलाक़े का एसएसपी ख़ुद उस व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

वह निर्दिष्ट थाने के संबंधित अधिकारी को आवश्यक दिशानिर्देश देगा। अगवा किए जाने की शिकायत अगर लड़की के परिवार के किसी सदस्य से मिली है तो लड़की के पति को गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा।

अगर लड़की बालिग़ है तो पुलिस उसको ज़बरन उसके माँ-बाप के हवाले नहीं कर सकती है। लड़के के ख़िलाफ़ भी आपराधिक बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए।

अगर एसएसपी/एसपी को सूचना देने के बावजूद शिकायतकर्ता की जान पर ख़तरा बना हुआ है, और वे कहीं आ-जा नहीं सकते हैं, तो उस स्थिति में हाईकोर्ट में अपील एकमात्र रास्ता है।

अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, शादी के पंजीकरण का कार्यालय खुला हुआ है तो ऐसे जोड़ों को वहाँ जाकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुरूप अपनी शादी पंजीकृत करा लेनी चाहिए और इसकी एक प्रति पुलिस को भी भेज देनी चाहिए।

पर अगर किसी लड़के ने धोखे से किसी लड़की से शादी की है तो इस आदेश के प्रावधान उस व्यक्ति की गिरफ़्तारी में आड़े नहीं आएंगे।

कोर्ट ने अंततः इस याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा राज्य को यह आदेश दिया कि वह इस शिकायत की जाँच करे और अगर ख़तरे की आशंका सही पायी जाती है तो याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा दें।