सरकार द्वारा एक्जिम पाॅलिसी के तहत दिए जाने वाला प्रोत्साहन का अनुदान,नहीं है उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में आने वाली 'सेवा'-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सरकार द्वारा एक्जिम पाॅलिसी के तहत दिए जाने वाला प्रोत्साहन का अनुदान,नहीं है उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में आने वाली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक निर्यातक को आयात और निर्यात नीति (एक्जिम पाॅलिसी) के संदर्भ में प्रोत्साहन प्रदान करते समय,केंद्र सरकार द्वारा कोई भी प्रदान नहीं की जाती है,जिससे वह उपभोक्ता फोरमों के अधिकार क्षेत्र के लिए एक 'सेवा प्रदाता' बन जाए।

जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने इस मुद्दे पर विचार किया कि क्या वह व्यक्ति जिसने आयात और निर्यात नीति के संदर्भ में जारी किए गए आरईपी लाइसेंस के तहत दावा किया है, वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 2(1)(डी) की परिभाषा में एक उपभोक्ता है?
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस दलील को खारिज कर दिया था कि उपभोक्ता फोरम के पास उपभोक्ता शिकायत सुनने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि एक्जिम पाॅलिसी के तहत प्रोत्साहन प्रदान करने पर केंद्र सरकार द्वारा कोई सेवा प्रदान नहीं की जाती है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि-
''नीति का उद्देश्य आयातित पूंजीगत वस्तुओं, कच्चे माल और घटकों तक आसान पहुंच प्रदान करने, आयात को स्थानापन्न करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और प्रोत्साहन की गुणवत्ता में सुधार करके निर्यात को प्रोत्साहन प्रदान करना है ताकि औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित किया जा सके। एक्जिम नीति राज्य की राजकोषीय नीति और विदेशी व्यापार पर उसके समग्र नियंत्रण की एक घटना या प्रसंग है। अपनी नीति की घटना के रूप में, राज्य प्रोत्साहन का शासन प्रदान कर सकता है। उन प्रोत्साहनों का प्रावधान राज्य को एक सेवा प्रदाता नहीं बनाता है या इस प्रोत्साहन को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को न ही किसी सेवा का उपयोग करने वाला संभावित उपयोगकर्ता बनाता है। राज्य, राजस्व का उपयोग करने और इकट्ठा करने के लिए अपने अधिकार के प्रयोग में, कानून के तहत विविध नियामक व्यवस्था करता है। नीति के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए शासन अनुपालन के लिए तौर-तरीकों, उल्लंघन के लिए दंड और प्रोत्साहन प्रदान कर सकता है। इन प्रोत्साहनों का अनुदान राज्य को सेवा प्रदाता के रूप में गठित नहीं करता है।''
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया कि इसी तरह के एक संदर्भ में, बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड एक सेवा प्रदाता नहीं है और परीक्षा देने वाला छात्र उपभोक्ता नहीं है।
आयोग के आदेश को दरकिनार करते हुए, पीठ ने कहा कि जिला फोरम में अधिनियम के तहत दायर शिकायत पर सुनवाई करने के अधिकार क्षेत्र की अनुपस्थिति थी, जो एग्जिम पॉलिसी द्वारा शासित एक आरईपी लाइसेंस पर स्थापित और स्थापित किए गए दावे के संबंध में अधिनियम के तहत दायर की गई थी।