पुलिस फोर्स में खाली पदों को भरने का मामला-सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से किया आग्रह स्वत संज्ञान ले मामले में [आर्डर पढ़े]

पुलिस फोर्स में खाली पदों को भरने का मामला-सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से किया आग्रह स्वत संज्ञान ले मामले में [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हर राज्य के मुद्दें व समस्याएं होती है अलग-अलग,इसलिए संबंधित हाईकोर्ट की कर सकती है ठीक से ऐसे मामलों पर विचार

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि वह स्वत संज्ञान लेते हुए जनहित याचिकाएं रजिस्टर करे ताकि उनके राज्यों में पुलिस फोर्स में खाली पड़े विभिन्न पदों को भरा जा सके।

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगाई,जस्टिस दीपक गुप्ता व जस्टिस संजीव खन्ना की खंडपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि इस संबंध में दायर याचिका के सारे रिकार्ड सभी राज्यों की हाईकोर्ट के पास भेज दिए जाए।

मनीष कुमार ने इस मामले में वर्ष 2013 में एक याचिका दायर की थी। कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है क्योंकि पुलिस फोर्स में सभी स्तर पर काफी पद खाली पड़े हैंै। कोर्ट के निर्देश के बाद कई राज्यों ने अपने हलफनामें व स्टे्टस रिपोर्ट दायर की थी।

बाद में रिट पैटिशन में संशोधन कर दिया गया था और निम्नलिखित मांगें की गई है।-

1-सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाए कि वह अपने यहां पुलिस कमीशन नियुक्त करें। जो पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगे आरोपों की जांच करे,पुलिसकर्मियों की समस्याओं सुलझाने व पुलिस फोर्स के वेल्फेयर के लिए अनुशंसाएं करने का काम कर सके।

2-सभी राज्यों को निर्देश दिया जाए कि वह कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले 2009(5)एसससी 212 के तहत गाईड लाइन बनाए और उनको लागू करे ताकि बड़े स्तर पर होने वाले प्रदर्शन या उत्पात और जान व माल के नुकसान को होने से रोका जा सके।

3-सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाए कि पुलिस व स्टेड आम्र्ड फोर्स में पड़े खाली पदों को भरे ताकि पुलिस फोर्स में काम के अतिरिक्त दबाव में न रहे।

4-केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह किसी भी तरह के उपद्रव या दंगे और उनको रोकने या नियंत्रण करने के लिए पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में मीडिया द्वारा की जाने वाली रिपोर्टिंग के लिए गाईड लाइन बनाए।

5-सभी राज्यों को आदेश या निर्देश दिए जाए िकवह अपने संवैधानिक व वैधानिक उत्तरदायित्व के तहत पुलिस की किसी भी कार्रवाई के खिलाफ कोई अनुमान या परिकल्पना न बनाए।

पिछले सप्ताह जब इस मामले की सुनवाई की गई तो खंडपीठ ने कहा-

पेश मामले के तथ्यों व समय-समय पर इस कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों को देखते हुए एक केंद्रीय मुद्दा यह पाया गया है कि सभी राज्यों में पुलिस फोर्स में काफी सारे पद खाली पड़े है। इस संबंध में बहुत सारे राज्यों ने विस्तृत हलफनामे दायर किए है। इसलिए सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद इस कोर्ट ने पाया है कि इस मामले को सभी संबंधित हाईकोर्ट के पास भेज देना चाहिए ताकि मामले की अच्छे से निगरानी की जा सके। हर राज्य के अपने मुद्दे व समस्याएं होती है,जिनकी सुनवाई या निगरानी संबंधित हाईकोर्ट ज्यादा अच्छे से कर सकती हैं।

इसलिए हमारा मानना है कि सभी राज्यों से संबंधित रिकार्ड जिसमें हलफनामें आदि भी शामिल हो,उन राज्यों की हाईकोर्ट को भेज दिए जाए। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री यह सभी रिकार्ड संबंधित हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को भेज दे। साथ ही सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से यह आग्रह किया जाए कि वह इस मामले को स्वत संज्ञान जनहित याचिका में तब्दील करते हुए इस पर सुनवाई करे। साथ ही उन सभी मांगों पर विचार किया जाए,जो समय-समय पर की गई हैं।