1 अक्टूबर से अब सुप्रीम कोर्ट में होगी पांच जजों की स्थायी संविधान पीठ

1 अक्टूबर से अब सुप्रीम कोर्ट  में होगी पांच जजों की स्थायी संविधान पीठ

सुप्रीम कोर्ट में अब एक स्थायी संविधान पीठ होगी, जिसमें पांच जजों पीठ कानून के सवाल और संविधान की व्याख्या करेगी। टाइम्स ऑफ इंडिया में रिपोर्ट है कि एक अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट में स्थायी तौर पर पांच जजों की संविधान पीठ काम करना शुरू कर देगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह महत्वपूर्ण फैसला उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट के नियमों 2013 में संशोधन किया गया है और ट्रांसफर याचिकाओं व सात साल की सजा तक के अपराध पर जमानत के लिए दाखिल विशेष अवकाश याचिकाओं से निपटने के लिए एकल पीठ का प्रावधान किया गया है।

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अनुच्छेद 145 (3) कहता है, न्यूनतम पांच न्यायाधीशों की पीठ मामले को सुनेगी

दरअसल अनुच्छेद 145 (3) यह प्रदान करता है कि उच्चतम न्यायालय के न्यूनतम पांच न्यायाधीशों की पीठ किसी भी मामले को तय करने के उद्देश्य से बैठेगी जिसमें इस संविधान की व्याख्या के रूप में कानून का पर्याप्त प्रश्न शामिल हो या अनुच्छेद 143 के तहत कोई संदर्भ सुनने के उद्देश्य से हो।

अपील की सुनवाई के दौरान यदि कोई तीन जजों की पीठ इस बात से संतुष्ट है कि अपील में इस कानून की व्याख्या के रूप में कानून का पर्याप्त प्रश्न शामिल हैं तो यह निर्धारित करती है कि अपील के निपटारे के लिए यह आवश्यक है कि मामले का संदर्भ संविधान पीठ को भेजा जाए। इसके बाद पीठ उक्त कानून के सवाल को संविधान पीठ को संदर्भित करती है और उक्त सवाल का जवाब मिलने पर अपील का निपटारा करती है

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सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा प्रथा यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट की एक तीन जजों की पीठ संविधान पीठ के लिए किसी मामले को संदर्भित करती है तो भारत के मुख्य न्यायाधीश पांच न्यायाधीशों की एक पीठ का गठन करते हैं । इसके लिए लंबित मामलों की संख्या और जजों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाता है।