PG मेडिकल पाठ्यक्रम दाखिला : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए नए सिरे से काउंसलिंग के निर्देश दिए

PG मेडिकल पाठ्यक्रम दाखिला : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए नए सिरे से काउंसलिंग के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को यह निर्देश दिया है कि वो सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 2019-20 में PG मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नए सिरे से अंतिम काउंसलिंग करे ताकि 10% EWS (Economically Weaker Sections) कोटा रद्द होने के बाद सामान्य वर्ग के सभी छात्रों को सही मौका दिया जा सके।

"काउंसलिंग ऑनलाइन नहीं बल्कि हो मैन्यूअल"
जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस एम. आर. शाह की अवकाश पीठ ने कुछ छात्रों की याचिका पर यह निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इसके लिए सरकार पर्याप्त रूप से प्रचार भी करे और काउंसलिंग ऑनलाइन नहीं बल्कि मैन्यूअल हो। पीठ ने कहा है कि दाखिला प्रक्रिया 14 जून तक पूरी हो जानी चाहिए।

"सरकार को छात्रों की दुर्दशा के बारे में सोचना चाहिए"
इस दौरान पीठ ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। पीठ ने कहा कि सरकार को शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आगे आना चाहिए। हर साल छात्र राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट आते हैं। सरकार को इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के उपाय करने चाहिए और छात्रों की दुर्दशा के बारे में सोचना चाहिए।

"वर्ष 2019-20 के दौरान दाखिले में 10 प्रतिशत EWS कोटा लागू नहीं"
गौरतलब है कि 30 मई को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि शैक्षणिक वर्ष 2019-20 के दौरान महाराष्ट्र में PG मेडिकल पाठ्यक्रमों में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए 10 प्रतिशत EWS कोटा लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि प्रावधान लागू होने से बहुत पहले ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई थी।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने कहा था कि जब तक मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अतिरिक्त सीटें नहीं बनाई जाती, 10 प्रतिशत EWS कोटा दूसरों की कीमत पर नहीं दिया जा सकता है।

पीठ ने यह कहा था कि पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया नवंबर 2018 में शुरू हुई थी, जबकि 10 प्रतिशत EWS कोटे को मंजूरी देते हुए 103वां संवैधानिक संशोधन इस साल जनवरी में पारित किया गया था। पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने मार्च में पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए 10 EWS कोटा लागू किया।

पीठ ने कहा, "जारी प्रवेश प्रक्रिया के लिए 10 प्रतिशत EWS कोटा नहीं दिया जा सकता। खेल के शुरू होने पर आप खेल के नियम नहीं बदल सकते।"

अदालत में दाखिल हुई थी छात्र की याचिका
अदालत का यह आदेश जनरल कैटेगरी के एक छात्र द्वारा दायर याचिका पर आया जिसमें कहा गया था कि जब तक अतिरिक्त सीटें नहीं बनाई जाती, 10 प्रतिशत EWS कोटा उनकी सीटों के हिस्से को निगल जाएगा। छात्र रजत राजेंद्र अग्रवाल ने अपनी याचिका में महाराष्ट्र सरकार के 2 नोटिफिकेशन को चुनौती दी जिनके द्वारा राज्य के पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत EWS कोटा लागू किया गया था।