हमले में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी न हो तो यह हमेशा अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हमले में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी न हो तो यह हमेशा अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अभियोजन के मामले को केवल इसलिए अविश्वसनीय करार नहीं दिया जा सकता क्योंकि हमले में इस्तेमाल हथियार या गोली बरामद नहीं की गई थी।

दरअसल प्रभाष कुमार सिंह बनाम बिहार राज्य में हत्या के एक मामले में अभियुक्तों की समवर्ती दोषसिद्धी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील में मुख्य विवाद यह था कि मृतक की मौत को गोली की चोट से जोड़ने के लिए चिकित्सा साक्ष्य निर्णायक नहीं हैं। दलील दी गई थी कि गोली या उसके किसी भी हिस्से को बरामद नहीं किया गया।

पीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद कहा कि इस घटना के स्पष्ट चश्मदीद गवाह हैं और दोनों में से कोई भी चश्मदीद गवाह जिरह के दौरान नहीं हिला और वे घटना से संबंधित तथ्यों को सही से याद कर रहे थे।

इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट की प्रकृति बंदूक की गोली से चोट मौत का कारण बताई गई और इसके साथ-साथ शव परीक्षण चिकित्सक का बयान भी है।

ऐसे में केवल यह तथ्य कि हमले में शामिल हथियार या गोली बरामद नहीं की गई, अभियोजन पक्ष के मुकदमे को ध्वस्त नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने अपील को खारिज कर दिया।