सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं, हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की याचिका खारिज की

सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं, हाईकोर्ट  ने बीमा कंपनी की याचिका खारिज की

"केंद्रीय मोटर वाहन नियम एक मोटर वाहन में एक प्रशिक्षक की मौजूदगी के बारे में सख्ती से विचार करता है, लेकिन मोटरसाइकिल को इससे बाहर करता है।"

एक सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया लर्नर लाइसेंस, एक वैध लाइसेंस है और एक राइडर या लर्नर को मोटरसाइकिल चलाने के दौरान किसी प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि कार के मामले में आवश्यक है, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मृतक महिला के परिवार को मोटर दुर्घटना न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए अवार्ड को चुनौती देने वाली बीमा कंपनी की याचिका को ख़ारिज करते हुए यह कहा।

न्यायमूर्ति के. नटराजन ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और ट्रिब्यूनल द्वारा ज्योतिबा शिगाते और उनके नाबालिग बेटे की. मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग करते हुए दायर याचिका पर दिए गए आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने 9 प्रतिशत ब्याज के साथ विभिन्न शीर्षों के तहत मुआवजे के रूप में 12,65,731 रुपये की राशि दिए जाने का आदेश दिया।

केस की पृष्ठभूमि:

29 मई 2009 को दावेदार की पत्नी, मंगला, अंजना द्वारा संचालित की जा रही मोटरसाइकिल (पंजीकरण नंबर KA 22/EB-9566) पर पिलियन सवार के रूप में बैठी थी अर्थात मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी हुई थी और जब उक्त वाहन बेलगाम-बेलगुंडी रोड पर बोकनूर क्रॉस के पास पंहुचा, अंजना ने तेज रफ्तार के साथ मोटरसाइकिल को लापरवाही से चलाया, जिससे दुर्घटना हो गयी। मंगला मोटरसाइकिल से गिरकर घायल हो गयी। इलाज के दौरान अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।

मृतका एक सरकारी प्राथमिक मराठी स्कूल में प्रधानाध्यापक के रूप में काम कर रही थी और प्रति माह 30,000 रुपये कमा रही थी और वह आयकर दाता (income tax Assessee) भी थी। वह अपने पूरे परिवार को पाल रही थी, इसलिए, मामले में दावेदारों ने विभिन्न आधारों पर मुआवजे के लिए 30 लाख रुपये दिए जाने की प्रार्थना की।

बीमा कंपनी ने तर्क दिया:

दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल चला रही अंजना के पास मोटरसाइकिल चलाने हेतु कोई वैध लाइसेंस नहीं था और वह केवल एक लर्नर लाइसेंस रखती थी। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के अनुसार, एक व्यक्ति जो लर्नर लाइसेंस रखता है, उसे प्रशिक्षक के साथ चलना चाहिए। हालाँकि, यहां इस मामले में मृतका, प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा चलायी जा रही मोटर साइकिल पर पिलियन सवार के रूप में बैठी थी और प्रतिवादी नंबर 1 के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और केवल एक लर्नर लाइसेंस था। उसे प्रशिक्षक के साथ मोटर साइकिल चलानी सीखनी या उसकी सवारी करनी चाहिए थी।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 3 के उप-नियम (1) के प्रावधान के अनुसार, (संक्षिप्त में "नियम"), उसे मोटरसाइकिल पर अंग्रेजी अक्षर 'एल' लिखना चाहिए था और प्रशिक्षक के बिना एक लर्नर द्वारा मोटरसाइकिल चलाया जाना, बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन होगा और यह पॉलिसी के नियमों और शर्तों का एक बुनियादी उल्लंघन है। लेकिन, ट्रिब्यूनल ने बीमाकर्ता पर देयता निर्धारित करते हुए त्रुटि की और मोटरसाइकिल के मालिक पर यह दायित्व निर्धारित किया जाना चाहिए।

जहाँ तक मुआवजा राशि की गणना का संबंध है। यह तर्क दिया गया था कि "दूसरे दावेदार (नाबालिग पुत्र) के सम्बन्ध में निर्भरता की हानि के चलते मुआवजे की गणना के लिए, आय के केवल 25% पर विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि मृतका का पति कामकाजी व्यक्ति हैं। इस मामले में विभाजित गुणक (split multiplier) लागू किया जाएगा, क्योंकि मृतका स्थायी कर्मचारी, एक शिक्षिका थी, जो 5 साल के भीतर अपनी सेवा से सेवानिवृत्त हो जाती और इसलिए पूरे वेतन को सेवानिवृत्ति के बाद निर्भरता का नुकसान नहीं माना जा सकता है।"

दावेदारों ने तर्क दिया:

टू व्हीलर मोटरसाइकिल के लिए किसी इंस्ट्रक्टर की आवश्यकता नहीं होती है और इंस्ट्रक्टर की आवश्यकता केवल फोर-व्हीलर सीखने के लिए होती है। मोटरसाइकिल पर 'L' बोर्ड लगाने के संबंध में बीमा कंपनी द्वारा कोई डिफेन्स नहीं दिया गया है और न्यायालय के समक्ष स्कूटर की कोई भी तस्वीर नहीं लायी गयी जिसमे यह दिखाया गया हो कि स्कूटर पर 'L' अक्षर का उल्लेख नहीं किया गया था।

इसके अलावा, "मुआवजे की मात्रा के संबंध में, हालांकि मृतका हेडमिस्ट्रेस थी और चूंकि वह घर की कमाने वाले सदस्या थी, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि पहला दावेदार, सिर्फ इसलिए कि वह एक कर्मचारी है और कमाई भी कर रहा है, अपनी पत्नी पर निर्भर नहीं था।"

अदालत ने कहा:

"केंद्रीय मोटर वाहन नियम एक मोटर वाहन में एक प्रशिक्षक की मौजूदगी के बारे में सख्ती से विचार करता है, लेकिन मोटरसाइकिल को इससे बाहर करता है। इसलिए, मैं मानता हूं कि एक लर्नर लाइसेंस भी एक वैध लाइसेंस है, सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को एक प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि चार पहिया मोटर वाहनों के मामले में आवश्यक है, जहाँ प्रशिक्षक की आवश्यकता होती है। इसलिए, बीमाकर्ता द्वारा दी गयी इस दलील को, कि प्रतिवादी नंबर 1 (अंजना) के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और वह मोटरसाइकिल की सड़क पर सवारी के दौरान केवल लर्नर लाइसेंस के साथ थी, स्वीकार नहीं किया जा सकता है।"

आगे यह कहा गया, "अपीलार्थी/बीमाकर्ता के विद्वान वकील द्वारा दी गयी दलील, कि न्यायाधिकरण ने अत्यधिक मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है, स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसके लिए इस न्यायालय के किसी भी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।"