अंतरिम भरण पोषण के आदेश के खिलाफ संशोधन याचिका बरकरार रखी जा सकती है? पटना हाईकोर्ट ने मामला पूर्ण पीठ को भेजा

अंतरिम भरण पोषण के आदेश के खिलाफ संशोधन याचिका बरकरार रखी जा सकती है? पटना हाईकोर्ट ने मामला पूर्ण पीठ को भेजा

पटना उच्च न्यायालय ने पूर्ण पीठ के पास इस मुद्दे को विचार के लिए भेज दिया है कि क्या दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक (proviso) के तहत पारित एक अंतरिम रखरखाव आदेश के खिलाफ संशोधन याचिका (revision petition) बरकरार रखी जा सकती है?

न्यायमूर्ति हेमंत कुमार श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने इस मुद्दे को भी संदर्भित किया कि क्या पारित किया गया एक अंतरिम रखरखाव/अनुरक्षण आदेश (interim maintenance order), एक वादकालीन आदेश (interlocutory order) या एक मध्यवर्ती आदेश (intermediate order) है?

पीठ ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक के तहत पारित एक अंतरिम रखरखाव आदेश को धारा 19 (4), कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम के तहत संशोधित किया जा सकता है। हालाँकि, इसने एक अन्य पीठ के फैसले पर गौर किया, जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक के तहत पारित एक अंतरिम रखरखाव के आदेश के खिलाफ, कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम, 1984 की धारा 19 (4) के तहत किया गया संशोधन बरक़रार नहीं होगा।

मामले को विचार के लिए भेजते हुए, अदालत ने कहा:

"बेशक, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक के तहत एक अंतरिम आदेश, आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 (1) के तहत दायर याचिका की लंबितता के दौरान पारित किया जाता है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 का दूसरा परंतुक, आवेदक को तुरंत राहत देने के उद्देश्य से कानून के अंतर्गत लाया गया है, लेकिन यह अंतरिम आदेश, संबंधित पक्षों के अधिकारों और देनदारियों को तय करता है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत अंतरिम आदेश पारित करने से पहले, ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है कि आवेदक के दावे का औपचारिक प्रमाण दिया जाये, लेकिन आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक के तहत पारित हुआ अंतरिम रखरखाव आदेश, प्रथम दृष्टया पक्षकारों के अधिकारों और देनदारियों को तय करता है।

इसके अलावा, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक के तहत पारित किया गया अंतरिम रखरखाव आदेश, समय-समय पर बदला जा सकता है। इसी प्रकार, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 (1) के तहत पारित आदेश को, यदि परिस्थिति की मांग हो तो, बाद के चरण में भी बदल जा सकता है।

इसके अलावा, यदि वह व्यक्ति जिसके खिलाफ अंतरिम रखरखाव का आदेश पारित किया गया है, वह अदालत के आदेश का पालन करने में, बिना किसी पर्याप्त कारण के, विफल हो जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कदम उठाया जा सकता है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक के तहत पारित आदेश, प्रथम दृष्टया, एक वादकालीन आदेश प्रतीत होता है, लेकिन क्या सही मायने में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दूसरे परंतुक के तहत पारित किया गया आदेश, एक वादकालीन आदेश है या नहीं, इसे देखना होगा।"