नवजात बच्चे को छोड़ने के आरोप में गिरफ्तार मां के साथ मीडिया में तस्वीर खिंचाने पर गोवा पुलिस को हाईकोर्ट ने फटकार लगाई

नवजात बच्चे को छोड़ने के आरोप में गिरफ्तार मां के साथ मीडिया में तस्वीर खिंचाने पर गोवा पुलिस को हाईकोर्ट ने फटकार लगाई

अपने दुधमुंहे बच्चे को लावारिस फेंकने के आरोप में गिरफ्तार एक मां के साथ मीडिया में तस्वीर खिंचाना गोवा पुलिस के कुछ अफसरों पर भारी पड़ा है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने पुलिस अफसरों को जमकर फटकार लगाई है। जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस एन डी सरदेसाई की डिवीजन बेंच ने एक मराठी दैनिक 'तरुण भारत'में प्रकाशित अखबार के लेख पर संज्ञान लिया है जिसमें ये तस्वीर छपी थी।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, " ये तस्वीर शिकार के बाद ट्रॉफी के साथ पोज देते हुए कुछ महाराजा / शिकारियों की एक छवि को समेटती है। कम से कम प्रथम दृष्टया, पुलिस अधिकारियों की ओर से इस तरह की कार्रवाई, जो तस्वीर में दिखाई दे रहे हैं, मां के मानवाधिकारों का उल्लंघन दिखाई देती है।" अदालत ने कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के कार्यों से मां के मानवीय अधिकार का हनन होता ही है और साथ ही निर्दोषता का अनुमान "आपराधिक न्यायशास्त्र की आधारशिला" है।

"निजता के अधिकार के साथ-साथ महिला की गरिमा का भी उल्लंघन"

यह भी कहा गया कि अधिकारियों ने निजता के अधिकार के साथ-साथ महिला की गरिमा का भी उल्लंघन किया है और कहा कि "कम से कम, प्रथम दृष्टया मीडिया के सामने मां को परेड करने में पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई मां के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और आहत करने वाला है।

समाचार लेख के अनुसार महिला और उसके पति को अपने नए जन्मे तीसरे बच्चे को छोड़ने के लिए गिरफ्तार किया गया था। ये बच्चा एक गैरेज में पाया गया था और उसे स्थानीय सरकारी अस्पताल में ले जाया गया था।

पुलिस से मांगा जवाब

पीठ ने दो सप्ताह के भीतर संबंधित पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा है और गोवा पुलिस के महानिदेशक और राज्य सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे रिकॉर्ड पर बताएं कि क्या पुलिस अधिकारियों द्वारा लंबित जांचों में मीडिया से सामान्य रूप से बातचीत और उन लोगों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए, जिन्होंने कोई अपराध किया हो, कोई नियम या दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं या नहीं।

अदालत ने आरोपी दंपति के छह और चार साल की उम्र के दो अन्य बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को उनके लिए उपयुक्त व्यवस्था करने का निर्देश देते हुए कहा,

"यह आवश्यक है कि इन बच्चों को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। हम चिंतित हैं कि उन्हें उनके माता-पिता की गिरफ्तारी के कारण छोड़ ना दिया जाए।"

इसके अलावा महिला और बाल विभाग के निदेशक को तीनों बच्चों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा गया है। पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख यानी 13 सितंबर को गोवा के एडवोकेट जनरल की उपस्थिति के निर्देश भी दिए हैं।