अयोध्या दिन -4 : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, रोजाना ही करेंगे सुनवाई, मुस्लिम पक्ष के वकील चाहें तो बीच में ब्रेक ले सकते हैं

अयोध्या दिन -4 : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, रोजाना ही करेंगे सुनवाई, मुस्लिम पक्ष के वकील चाहें तो बीच में ब्रेक ले सकते हैं

बेंच ने मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन को यह कहा कि पीठ इस विवाद पर रोजाना सुनवाई करेगी। हालांकि CJI रंजन गोगोई ने यह कहा कि जब उनकी दलीलें शुरू होंगी तो धवन अपनी तैयारी के लिए सप्ताह के बीच में ब्रेक ले सकते हैं और पीठ को सूचित कर सकते हैं।

रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उस मांग को ठुकरा दिया है जिसमें मामले की रोजाना सुनवाई का विरोध किया गया था।

मामले की सुनवाई होगी रोजाना, धवन ले सकते हैं तैयारी के लिए ब्रेक

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एस. ए. बोबड़े, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन को यह कहा कि पीठ इस विवाद पर रोजाना सुनवाई करेगी। हालांकि CJI रंजन गोगोई ने यह कहा कि जब उनकी दलीलें शुरू होंगी तो धवन अपनी तैयारी के लिए सप्ताह के बीच में ब्रेक ले सकते हैं और पीठ को सूचित कर सकते हैं।

मामले की रोजाना सुनवाई को धवन ने करार दिया था 'अव्यवहारिक'

दरअसल इस मामले की चौथे दिन की सुनवाई शुरू होते ही मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सप्ताह में पांचों दिन सुनवाई के लिए असमर्थता जताई थी। धवन ने कहा, "हमने सुना है कि अदालत सप्ताह के पांचों दिन इस मुद्दे पर सुनवाई करेगी लेकिन हम इसमें सहयोग नहीं कर पाएंगे। केस में इतने ज्यादा कागजात हैं, अनुवाद हैं कि ये संभव नहीं है। ये अमानवीय और अव्यवहारिक है। "

इस दौरान CJI रंजन गोगोई ने यह कहा कि उनकी बात सुन ली गई है और इस पर विचार कर उन्हें बताया जाएगा और शाम को पीठ ने धवन को अपना फैसला बता दिया।

रामलला पक्ष ने मामले के शीघ्र निपटारे पर दिया जोर

इसके बाद रामलला पक्ष की ओर से पेश के. परासरन ने अपनी दलीलें जारी रखीं। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि विवाद एक अरसे से चला आ रहा है और अब इसका निपटारा होना चाहिए। पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सबूत मिले है उससे ये साफ़ पता चलता है कि वहाँ मस्ज़िद से पहले मंदिर था।

"देवता हैं हर कण में, रूप की आवश्यकता नहीं"

पीठ ने उनसे यह पूछा कि एक देवता को न्यायिक व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? इस पर परासरन ने जवाब दिया कि देवता हर कण में है, उसके रूप की जरूरत नहीं। यहां तक कि पहाड़ों को देवताओं के रूप में पूजा जाता है, तिरुवनमलाई और चित्रकूट में "परिक्रमा" की जाती है।

जस्टिस भूषण ने यह कहा कि ऐसे सबूत हैं कि अयोध्या में जन्मस्थान के आसपास एक 'परिक्रमा' होती है। क्या वह जन्मस्थान को कुछ पवित्रता प्रदान करेगा? परासरन ने कहा कि गोवर्धन में भी परिक्रमा होती है। यही तीर्थयात्रा है। ये सुनवाई मंगलवार 13 अगस्त को भी जारी रहेगी।