2002 गुजरात दंगा : मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जुलाई तक टली

2002 गुजरात दंगा : मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जुलाई तक टली

गुजरात में वर्ष 2002 गोधरा कांड के बाद हुए दंगों की जांच करने वाली SIT द्वारा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी व अन्य को क्लीन चिट देने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई तक के लिए टाल दिया है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस ए. एम. खानविलकर ने कहा कि अब इस मामले में अंतिम सुनवाई जुलाई में नॉन मिसलेनियस डे में होगी। बीते 15 जनवरी को भी पीठ ने मामले को 4 हफ्ते के लिए टाल दिया था। 03 दिसंबर 2018 को भी जस्टिस ए. एम. खानविलकर और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने ये सुनवाई, याचिकाकर्ता जाकिया जाफरी और तीस्ता शीतलवाड़ के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के अनुरोध पर स्थगित की थी।

सुनवाई में सिब्बल ने कहा था कि वो इस संबंध में भारी संख्या में दस्तावेज दाखिल करना चाहते हैं जिससे पता चलता है कि ये एक बड़ी साजिश थी। सिब्बल ने कहा था कि ये मामला केवल गुलबर्गा सोसाइटी से ही जुड़ा हुआ नहीं है।

इससे पहले सुनवाई में SIT ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को एनजीओ 'सिटीजन फार जस्टिस एंड पीस' के तौर पर याचिका दाखिल करने का विरोध किया था। SIT की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि तीस्ता इस मामले में ना तो प्रभावित हैं ना ही वो पहले की याचिकाकर्ता हैं। वहीं तीस्ता के वकील ने कहा था कि वो कोर्ट की मदद करना चाहती हैं। इस पर पीठ ने कहा था कि वो याचिकाकर्ता के तौर पर नहीं बल्कि कोर्ट की सहायता कर सकती हैं।

वहीं मुकुल ने कहा था कि निचली अदालत ने इस मामले में 400 पन्नों का आदेश जारी किया था। गुजरात हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। अब 15 साल हो चुके हैं और इस मामले को और लंबा नहीं खींचा जा सकता है।

दरअसल SIT द्वारा मोदी व अन्य नेताओं और नौकरशाहों को क्लीन चिट को बरकरार रखने के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वकील अपर्णा भट्ट के माध्यम से दाखिल याचिका में मोदी व अन्य के खिलाफ जांच कराने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि 05 अक्तूबर 2017 को गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था कि गुजरात दंगों की दोबारा जांच नहीं होगी। हाईकोर्ट ने जाकिया जाफरी की इन दंगों के पीछे बड़ी साजिश वाली बात से भी इनकार किया था।

दरअसल हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में वर्ष 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को विशेष जांच दल द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था।