गुजरात के पूर्व मंत्री हरेन पंड्या की हत्या की SIT से जांच की CPIL की याचिका पर SC ने फैसला सुरक्षित रखा

गुजरात के पूर्व मंत्री हरेन पंड्या की हत्या की SIT से जांच की CPIL की याचिका पर SC ने फैसला सुरक्षित रखा

गुजरात के पूर्व मंत्री हरेन पंड्या की हत्या के मामले की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग वाली सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटीगेशन (CPIL) की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिल विनीत सरन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद ये फैसला सुरक्षित रखा।

हालांकि इस दौरान पीठ ने प्रशांत भूषण से सवाल पूछा कि जब बार काउंसिल का नियम है कि किसी संस्था का पदाधिकारी कोर्ट में बहस नहीं कर सकता तो वो इस मामले में कैसे पेश हो रहे हैं। इस पर प्रशांत ने कहा कि वो इस केस में बिना किसी फीस के पेश हो रहे हैं और अगर कोर्ट एमिकस क्यूरी की नियुक्ति करता है तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दौरान याचिका का विरोध किया कि किसी आपराधिक मामले को लेकर जनहित याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।

इससे पहले जस्टिस ए. के. सीकरी की पीठ ने 08 फरवरी को कहा था कि जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी, जो पहले से ही इस मामले पर सुनवाई कर रही है। इस दौरान वकील प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया था कि अब नए तथ्य सामने आए हैं जिनके बाद इस हत्याकांड की फिर से जांच की जरूरत है।

गैर सरकारी संग‍ठन सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटीगेशन (CPIL) द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि मामले में नए सिरे से जांच की आवश्यकता है क्योंकि हाल में कुछ "चौंकाने वाली जानकारी" सामने आई हैं जिन्हें देखे जाने की जरूरत है। याचिका में दावा किया गया कि जो नई जानकारियां सामने आई हैं उनमें डीजी वंजारा समेत आईपीएस अधिकारियों के पंड्या की हत्या करने की साजिश में शामिल होने की आशंका स्पष्ट रूप से है। इसमें पुलिस के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ही राजनीतिक लोगों की भी भूमिका हो सकती है।

याचिका में हाल ही में सोहराबुद्दीन केस में गवाह आजम खान के ट्रायल कोर्ट में दिए गए बयानों का हवाला दिया गया है जिसमें दावा किया गया है कि हरेन पंड्या की हत्या डीजी वंजारा के इशारे पर की गई। ये भी कहा गया है कि उसे ऐसा बताया गया था कि ये हत्या तुलसीराम प्रजापति ने दो लोगों के साथ मिलकर की थी।

गौरतलब है कि गुजरात में भाजपा सरकार के दौरान गृह राज्यमंत्री रहे हरेन पंड्या की हत्या अहमदाबाद में 26 मार्च, 2003 को गोली मारकर कर दी गई थी। हत्या के समय पंड्या सुबह की सैर को निकले थे।

सीबीआई की जांच के मुताबिक, वर्ष 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगे का बदला लेने के लिए पंड्या की हत्या कर दी गई थी। इससे पहले विशेष पोटा अदालत ने मुख्य आरोपी असगर अली के बयान के आधार पर आरोपियों को साजिश रचने का दोषी करार दिया था। अली ने स्वीकार किया था कि उनकी योजना, वर्ष 2002 के गुजरात दंगे का बदला लेने के लिए गुजरात के प्रमुख विहिप और हिंदू नेताओं पर हमले की थी। पोटा अदालत ने वर्ष 2007 में 12 दोषियों को सजा सुनाई जिनमें से 09 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी गयी। लेकिन 2011 में हाई कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया था।