मेडिकल दाखिलों में मराठों के लिए SEBC कोटा पर अध्यादेश को चुनौती : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया

मेडिकल दाखिलों में मराठों के लिए SEBC कोटा पर अध्यादेश को चुनौती : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया

महाराष्ट्र में पीजी मेडिकल और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े मराठा समुदाय के लिए कोटा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर उनकी ओर से जवाब मांगा है। पीठ इस मामले की सुनवाई 24 जून को करेगी।

"मामले को बिना उपाय नहीं छोड़ा जा सकता"

जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस सूर्य कांत की अवकाश पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान यह कहा कि इस पर या तो HC फैसला कर सकता है या सुप्रीम कोर्ट। इसे बिना उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले SC से संपर्क किया था और पीठ ने इसे HC भेज दिया था। लेकिन एक अन्य मामले में EWS कोटा को लेकर SC ने कहा है कि कोई भी HC इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। वैसे भी HC या इस अदालत को अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला करना ही है।

मराठों के लिए 16% कोटा देने के फैसले को दी गयी चुनौती
दरअसल याचिकाकर्ता ने महाराष्ट्र अध्यादेश को मराठों के लिए 16% कोटा देने को चुनौती दी है और महाराष्ट्र सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि याचिका को उसी पीठ के समक्ष आना चाहिए जिसने EWS याचिका का फैसला किया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने मामले की सुनवाई से किया था इनकार
इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 16% कोटा देने वाले अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। HC ने कहा था कि SC ने HC द्वारा किसी भी याचिका पर विचार ना करने के आदेश दिए हैं।

20 मई को राज्यपाल ने किए थे अध्यादेश पर हस्ताक्षर

गौरतलब है कि 20 मई को महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) आरक्षण कानून, 2018 के तहत मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे HC के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को किया था खारिज

9 मई को महाराष्ट्र सरकार की इस वर्ष पीजी मेडिकल और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में मराठा समुदाय के लिए कोटा पर रोक लगाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस एम. आर. शाह की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि समानता का अधिकार उन छात्रों का भी है जो राज्यों में मेडिकल दाखिलो के इच्छुक हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सुनाया गया निर्णय

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए योग्य डॉक्टरों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था कि 27.3.2019 को प्रकाशित संशोधित आरक्षण सीट मैट्रिक्स अनिर्दिष्ट है क्योंकि यह SEBC उम्मीदवारों की श्रेणी के लिए एक प्रावधान बनाता है जिसके अवैध होने के नाते, वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया में SEBC आरक्षण के सीमित उद्देश्य के लिए प्रभाव नहीं दिया जाएगा।

जस्टिस एस. बी. शुकरे और जस्टिस पी. वी. गणेदीवाला की पीठ ने फैसला सुनाया था कि राज्य सरकार की अधिसूचना 8 मार्च, 2019 के तहत स्वास्थ्य विज्ञान के पाठ्यक्रमों में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के कोटे को पीजी डेंटल और मेडिकल प्रवेश के लिए लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि NEET के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 2018 में 16 अक्टूबर और 2 नवंबर को शुरू हुई थी जबकि मराठा समुदाय के लिए 16% आरक्षण शुरू करने वाले SEBC अधिनियम को 30 नवंबर, 2018 को लागू किया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने सभी निजी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त कॉलेजों पर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 16% कोटा देने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाया था। यह कोटा, इंस्टीट्यूट कोटा और NRI कोटा सहित सभी सीटों पर होना था।